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Delhi: सरकार का अधिकारियों को निर्देश, LG से न लें सीधे आदेश; बताया- संविधान और SC के आदेशों का हो रहा उल्लंघन

Fri, 24 Feb 2023 10:30 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Fri, 24 Feb 2023 10:30 PM IST
सार

उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि एलजी द्वारा सचिवों को सीधे आदेश जारी करना संविधान और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन है। 

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orders received directly from LG are a violation of constitution and directives of Supreme Court said manish s
मनीष सिसोदिया - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

दिल्ली सरकार ने शुक्रवार को अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे उपराज्यपाल से सीधे आदेश लेना बंद करें। साथ ही मंत्रियों ने अपने विभागों के सचिव को दिए निर्देश में कहा कि ट्रांजेक्शन ऑफ बिजनेस रूल्स का सख्ती से पालन करें। साथ ही एलजी से मिलने वाले किसी भी सीधे आदेश के बारे में संबंधित मंत्री को रिपोर्ट करें। सरकार का दावा है कि एलजी के ऐसे असांविधानिक आदेशों को लागू करना टीबीआर के नियम 57 का उल्लंघन माना जाएगा।

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उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि एलजी की तरफ से दिया जाने वाला ऐसा कोई भी आदेश, संविधान और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन है। संविधान और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को लागू कराने के लिए सरकार की ओर से गंभीरता से काम किया जाएगा। आदेश में कहा गया है कि दिल्ली सरकार के पास केवल भूमि, पुलिस और सार्वजनिक आदेश जैसे तीन विषयों को छोड़कर बाकी सभी पर अधिकार है। इन तीन विषयों को ‘आरक्षित’ कहा जाता है, जबकि दिल्ली सरकार के नियंत्रण वाले बाकी विषयों को ‘स्थानांतरित’ कहा जाता है।

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स्थानांतरित विषयों के मामले में, अनुच्छेद 239एए(4) का प्रावधान बताता है कि एलजी किसी भी स्थानांतरित विषय पर मंत्रिपरिषद के फैसले से अलग राय रख सकते हैं। हालांकि, इस मतभेद को टीबीआर के नियम 49, 50, 51 और 52 में निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से पूरा किया जाना चाहिए। इन प्रावधानों का मूल यह है कि विचारों के अंतर को यांत्रिक रूप से प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए और नियम 51 और 52 के तहत निर्देश जारी करने से पहले उन मतभेदों को हल करने का हरसंभव प्रयास किया जाना चाहिए।

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एलजी करें मंत्री से चर्चा
सरकार का कहना है कि नियम- 49 के मुताबिक एलजी को संबंधित मंत्री के साथ चर्चा और संवाद से किसी भी मतभेद को सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए। अगर किसी समाधान पर नहीं पहुंचा जा सकता है तो एलजी इस मामले को मंत्रिपरिषद को भेजने का निर्देश दे सकते हैं। इसी तरह, नियम- 50 एलजी और मंत्रिपरिषद के बीच मतभेद होने पर पालन की जाने वाली प्रक्रिया बताता है। एलजी को ऐसे मामले को केंद्र सरकार को भेजना चाहिए। सरकार के आदेश में कहा गया है कि पिछले कुछ महीनों में एलजी ने नियम 49 और 50 में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना सीधे नियम 51 और 52 के तहत निर्देश जारी किए हैं।

उपमुख्यमंत्री ने दी चेतावनी
सिसोदिया ने बताया कि सरकार ने चेतावनी दी है कि एलजी से सीधे प्राप्त ऐसे कोई भी आदेश संविधान और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन हैं और इन आदेशों के कार्यान्वयन को गंभीरता से देखा जाएगा। पिछले दिनों ऐसे कई उदाहरण देखने को मिले हैं, जब एलजी ने संविधान और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करते हुए चुनी हुई सरकार को दरकिनार कर दिया। इसमें हज कमेटी के सदस्यों की नियुक्ति, एमसीडी में एल्डरमैन का मनोनयन, एमसीडी में पीठासीन अधिकारी की नियुक्ति, सीआरपीसी 196 के मामलों में अभियोजन स्वीकृति सहित अन्य फैसले शामिल हैं।

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