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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Orders issued for action against illegal paths and environmental violations in the Aravallis within three months

Delhi NCR News: अरावली में अवैध रास्ते और पर्यावरण उल्लंघन पर तीन माह में कार्रवाई के आदेश

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 04 Aug 2026 09:28 PM IST
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-बिना अनुमति बनाए गए कच्चे रास्ते और पर्यावरण नियमों के उल्लंघन की होगी जांच, दोषियों पर होगी कार्रवाई
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अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने अरावली क्षेत्र में अवैध कच्चे रास्ते और पर्यावरण नियमों के उल्लंघन के मामले में सख्त रूख दिखाते हुए संबंधित विभागों को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि अरावली देश की महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहर है। इसकी सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जानी चाहिए। बिना कानूनी अनुमति वन क्षेत्र में सड़क निर्माण या किसी भी तरह की गैर-वानिकी गतिविधि की इजाजत नहीं दी जा सकती।


पीठ ने हरियाणा राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (एसईआईएए) को तीन महीने के भीतर पूरे मामले की जांच कर उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया है। वहीं, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) को पर्यावरण नियमों के उल्लंघन के लिए पर्यावरणीय मुआवजा तय करने और संबंधित पक्ष को सुनवाई का अवसर देने को कहा है। इसके अलावा वन (संरक्षण) अधिनियम के तहत भी आवश्यक कानूनी कार्रवाई जल्द शुरू करने के निर्देश दिए हैं। एनजीटी ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नियमों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही, अरावली क्षेत्र की सुरक्षा के लिए संबंधित एजेंसियों को प्रभावी कार्रवाई करनी होगी।
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मामला हरियाणा के ग्राम पंचनोता स्थित अरावली क्षेत्र का
यह मामला हरियाणा के ग्राम पंचनोता स्थित अरावली क्षेत्र का है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि एक खनन कंपनी ने अपनी खदान तक पहुंचने के लिए अरावली के प्लांटेशन क्षेत्र से बिना अनुमति कच्चा रास्ता बना लिया। वहां से भारी वाहनों का संचालन किया, जिससे वन क्षेत्र और पर्यावरण को नुकसान पहुंचा। मामले की जांच के लिए एनजीटी की ओर से गठित संयुक्त समिति ने अपनी रिपोर्ट में पुष्टि की कि बनाया गया रास्ता अरावली प्लांटेशन क्षेत्र का हिस्सा है। कंपनी ने इसके लिए वन विभाग से जरूरी अनुमति नहीं ली थी। जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी ने पर्यावरण स्वीकृति की कई शर्तों का पालन नहीं किया। इनमें सुरक्षा क्षेत्र बनाए रखना, धूल नियंत्रण, वायु गुणवत्ता की निगरानी और भूजल की जांच जैसी महत्वपूर्ण शर्तें शामिल हैं।
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