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ऑनलाइन शॉपिंग से पारंपरिक बाजार को लगा करारा झटका

Fri, 14 Oct 2016 12:19 AM IST
यशलोक सिंह/अमर उजाला, गुड़गांव
यशलोक सिंह/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Fri, 14 Oct 2016 12:19 AM IST
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Online shopping took a big blow to the traditional market
ऑनलाइन शॉपिंग - फोटो : डेमो

यह फेस्टिवल सीजन ई-कॉमर्स बनाम पारंपरिक बाजार नजर आ रहा है। साइबर सिटी में दिनों दिन ऑनलाइन शॉपिंग का ट्रेंड जोर पकड़ता जा रहा है। 

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यही कारण है कि नवरात्र, दशहरा, करवाचौथ और दीपावली को लेकर आम बाजारों में ग्राहकों की कमी होती जा रही है। लोग भीड़ भरे स्थानों पर जाने से बचने के लिए ई-कॉमर्स व एम-कॉमर्स प्लेटफार्म को पसंद कर रहे हैं। 
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बाजार विशेषज्ञों का तो यहां तक कहना है कि इस ऑनलाइन शॉपिंग ने बाजार का पूरा फार्मूला ही बदल दिया है। पारंपरिक बाजारों में ग्राहकों की काफी कमी हो गई है। 
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ऑनलाइन शॉपिंग ने बाजार को 60 फीसदी तक प्रभावित किया है। यही कारण है कि आम कारोबारी धंधा मंदा होने से काफी परेशान है।

गुडग़ांव के मॉल्स से लेकर, सदर बाजार और सेक्टरों तक की मॉर्केट में ऑनलाइन से मुकाबले की तैयारी चल रही है। मगर हकीकत की में देखा जाए तो उनकी यह तैयारी ई-कॉमर्स के आगे कहीं नहीं ठहरती है। 

पारंपरिक बाजार के डिस्काउंट और ऑफर ऑनलाइन के आगे बौने साबित हो रहे हैं। युवा वर्ग सबसे अधिक इसी ट्रेंड की ओर प्रभावित होता जा रहा है। वह घर या ऑफिस में बैठे-बैठे ऑनलाइन शॉपिंग कर रहा है। 

गुडग़ांव में ऑनलाइन कारोबार करने वाली एक हजार छोटी-बड़ी कंपनियां हैं। देश में ई-कॉमर्स सेक्टर के कारोबार का ग्रोथ रेट जहां 50 फीसदी है वहीं यह गुडग़ांव में 100 फीसदी के आंकड़े को भी पार गया गया है। 

सदर बाजार के कारोबारी अतिम जिंदल का कहना है कि ऑनलाइन शॉपिंग ने पारंपरिक बाजार का समीकरण बिगाड़ दिया है। जहां पहले त्यौहारों के दस दिन पहले ही बाजारों में ग्राहकों की भीड़ उमड़ती थी अब ऐसा नहीं है। 

ग्राहक दुकानदारों से मोलभाव करता है और कहता है कि ऑनलाइन तो यह आइटम इतने में मिल रहा है। ऑनलाइन के बढ़ते ट्रेड से हर कारोबारी परेशान है। 

सदर बाजार के कारोबारी अंकित का कहना है कि ऑनलाइन शॉपिंग बाजार को काफी तेजी से प्रभावित करने लगा है। फ्लिपकार्ट, अमेजोन, जबांग, मिंत्रा, शॉपोक्लूज, शॉपोक्लिक व स्नैपडील जैसी कंपनियों के बढ़ते कारोबार से पारंपरिक बाजार दिनों दिन कमजोर होता जा रहा है। 


चाइनीज उत्पादों के विरोध से पारंपरिक कारोबारी परेशान
कारोबारियों का कहना है कि वह ई. कॉमर्स व एम. कॉमर्स कंपनियों से थोड़ा बहुत मुकाबला चीनी उत्पादानों के जरिए कर सकते हैं। 

मगर इस बार चीनी उत्पादों को लेकर ग्राहकों में काफी गुस्सा देखा जा रहा है। एक व्यापारी का कहना है कि ऑनलाइन शॉपिंग की सबसे बड़ी खूबी इसका सस्ता होता है। 

चीनी उत्पाद भी सस्ते होते हैं मगर इसे बेचना अब काफी मुश्किल हो गया है। ऐसे में कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। ई-कॉमर्स कंपनियां अपने हर आइटम पर 20 से 80 फीसदी तक छूट दे रही हैं। जबकि आम दुकानदारों के पास इसका अधिक विकल्प नहीं है। 

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