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एम्स में डेंगू-चिकनगुनिया से पीड़ित करीब आधा दर्जन मरीज भर्ती, अपोलो में एक युवक की मौत

Sun, 18 Sep 2016 10:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 18 Sep 2016 10:19 AM IST
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one died in Apollo hospital in delhi due dengue and chikungunya

पहले डेंगू फिर चिकनगुनिया और अब एक ही मरीज को डेंगू और चिकनगुनिया दोनों बीमारी साथ-साथ हो रही है। एक ही मरीज को दोनों बीमारी एक होने से मरीज की हालत और नाजुक बन जाती है।

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ऐसे ही करीब आधा दर्जन मरीज एम्स में भर्ती हैं। पिछले दिनों में अपोलो अस्पताल में एक युवक की मौत हुई थी जो डेंगू और चिकनगुनिया दोनों बीमारियों से पीड़ित था।
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अखिल भारतीय आयुवर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक का कहना है कि डेंगू और चिकनगुनिया शुरुआती दौर में खतरनाक नहीं होता है लेकिन यदि इसे नियंत्रित नहीं किया गया तब खतरा बढ़ जाता है।
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चिकित्सक का कहना है कि डेंगू और चिकनगुनिया दोनों एक साथ होने पर खतरा बढ़ जाता है, लेकिन यदि इन दोनों संक्रमण के अलावा दूसरी कोई गंभीर बीमारी न हो तो मरीज की मौत की संभावना नहीं के बराबर होती है।

सर गंगा राम के मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ.अतुल गोगिया का कहना है कि डेंगू और चिकनगुनिया दोनों एक साथ हो जाए तो खतरा तो रहता है लेकिन इससे घबराने की जरुरत नहीं होती। डॉ.गोगिया का कहना है कि ऐसी स्थिति में भी मरीज की जान पर कोई खतरा नहीं होता जब तक दूसरी कोई गंभरी बीमारी न हो। 
 
डेंगू व चिकनगुनिया फैलने पर मुख्यमंत्री का पुतला फूंका

दिल्ली प्रदेश शिवसेना ने दिल्ली में डेंगू, चिकनगुनिया आदि बीमारी फैलने पर दिल्ली सरकार के खिलाफ जंतर मंतर पर शनिवार को धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान शिव सैनिकों ने मुख्यमंत्री का पुतला जलाया। इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व दिल्ली प्रदेश शिवसेना के प्रमुख नीरज सेठी ने किया।

इस मौके पर उन्होंने कहा कि दिल्ली में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया का प्रकोप हर घर हर गली हर मोहल्ले में है, लेकिन आप सरकार के मुख्यमंत्री और ज्यादातर मंत्री शहर से बाहर है।

स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन महामारी का मखौल उड़ा रहे है। वह आज भी संसाधन उपलब्ध कराने के बजाए सब कुछ ठीक होने का दावा कर रहे है। अस्पतालों और डिस्पेंसिरियों में दवाइयों व ब्लड टेस्ट के लिए इधर उधर धक्के खाने को मजबूर है।


मोहल्ला क्लीनिकों और डिस्पेंसरियों में ब्लड टेस्ट और दवाइयों का कोई इंतजाम नहीं है। इस कारण लोगों को निजी अस्पतालों को मनमाना पैसा देकर इलाज करवाना पड़ रहा है।

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