RTI की जानकारी न देना पड़ा महंगा
आरटीआई की क्या ताकत है शायद इस बात का अंदाजा उन अधिकारियों को हो गया
आरटीआई में मांगी गई जानकारी न देने का परिणाम फरीदाबाद के निगम अधिकारियों को जुर्माना देकर भुगतन पड़ा। फरीदाबाद के नगर निगम अधिकारियों को आरटीआई का जवाब न देना भारी पड़ने लगा है।
सिर्फ 50 रुपये की आरटीआई के बदले 2500 रुपये बतौर जुर्माना आरटीआई कार्यकर्ता को नगर निगम ने दिए हैं। कार्यकर्ता की शिकायत पर राज्य सूचना आयुक्त ने यह कार्रवाई की है।
अवैध निर्माण की मांगी थी जानकारी
आरटीआई कार्यकर्ता रवीन्द्र चावला ने नगर निगम से वर्ष 2012-13 में शहर में
हुए अवैध निर्माणों और उन पर की गई कार्रवाई की सूचना मांगी थी। उन्होंने
पूछा था कि किन-किन लोगों ने अवैध निर्माण किया है और शिकायत मिलने के बाद
निगम ने क्या कार्रवाई की।
आरटीआई कार्यकर्ता को निगम ने निर्धारित समय में
जवाब नहीं दिया। कार्यकर्ता ने इसके खिलाफ राज्य सूचना आयुक्त के यहां
अपनी शिकायत दर्ज कराई। राज्य सूचना आयुक्त ने 21 फरवरी 2014 को जुर्माना देने का निगम को आदेश दिया। पिछले दिनों यहां लंबित मामलों की सुनवाई करने आए राज्य सूचना आयुक्त
रिटायर्ड मेजर जनरल जेएस कुंडू से आरटीआई कार्यकर्ता ने दोबारा शिकायत दर्ज
कराई।
इस पर उन्होंने निगम अधिकारियों को 2500 रुपये जुर्माना अदा करने का
आदेश दिया। सोमवार को जेटीओ बलबीर पंवार ने आरटीआई कार्यकर्ता रवीन्द्र
चावला को बतौर जुर्माना 2500 रुपये दिए। उन्होंने बताया कि यह राशि लैंड
लाइसेंसिंग ऑफिसर द्वारा दी गई है।