'केंद्र सरकार के दबाव में डलवाए गए ABVP को वोट'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव का फैसला आते ही विश्वविद्यालय में चल रही महीने भर की सरगर्मियां आज शांत हो गईं। डूसू चुनाव में आए नतीजे इसी साल हुए लोकसभा चुनाव के परिणाम की याद दिलाते हैं, जिसमें बीजेपी ने कांग्रेस को धो डाला था।
ऐसा ही कुछ शनिवार को घोषित हुए डूसू चुनाव के परिणाम में देखने को मिला। गौरतलब है कि बीजेपी की स्टूडेंट विंग अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने विश्वविद्यालय के चारों पदों पर हुए चुनाव में सभी सीटें जीतकर एनएसयूआई को खाता भी खोलने नहीं दिया।
इस बाबत जब एनएसयूआई के अध्यक्ष आरएम जॉन से बात की गई तो उन्होंने कहा कि, हम पंजाब और राजस्थान में तो जीत गए पर दिल्ली में हमारी हार हो गई। हम इसके कारणों की तह तक जाएंगे और आवश्यक कार्रवाई करेंगे।
केंद्र के कहने पर कॉलेजों ने बनाया छात्रों पर दबाव
डूसू चुनाव में अपना खाता भी न खोल सकी एनएसयूआई ने सीधे-सीधे अपनी हार का ठीकरा केंद्र सरकार के मत्थे मढ़ दिया। एबीवीपी की जीत और अपनी हार का कारण एनएसयूआई अध्यक्ष आरएम जॉन ने केंद्र सरकार को बताते हुए कहा कि ये पहली बार है जब प्रिंसिपलों और कॉलेजों ने केंद्र सरकार के दबाव में आकर छात्रों को एबीवीपी को वोट देने के लिए कहा है।
पिछले साल चार में से एक सीट जीतने वाली एनएसयूआई का मानना है कि ये केंद्र सरकार ही है जिसने कॉलेजों पर दबाव डाला कि वो छात्रों को एबीवीपी को वोट देने के लिए कहें और इसी का नतीजा है कि डूसू चुनाव में एनएसयूआई का सूपड़ा ही साफ हो गया।
एबीवीपी की इस जीत ने यह साबित कर दिया है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में एबीवीपी
सबसे लोकप्रिय संगठन बन चुका है। यह सफलता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि
पिछले चुनाव में एबीवीपी को तीन सीटें ही मिली थी, जबकि इस बार चारो सीटों
को जीत कर उसने नया इतिहास लिख दिया है।