उत्तरी दिल्ली निगम के BJP पार्षदों को कोई तवज्जो नहीं दे रहे अधिकारी, आखिर क्यों
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उत्तरी दिल्ली नगर निगम में सत्तारूढ़ भाजपा के पार्षदों को अधिकारी कोई तवज्जो नहीं दे रहे हैं। अधिकारी न तो उनसे फोन पर बात करते हैं और न ही उनसे मिलते हैं। ऐसे में पार्षदों की सलाह पर अधिकारियों के काम करने की उम्मीद नहीं की जा सकती।
नगर निगम में चारों ओर भ्रष्टाचार का बोलबाला है। उत्तरी दिल्ली नगर निगम की सदन की बैठक में सोमवार को भाजपा पार्षदों ने अपना दर्द बयां किया। सदन की बैठक में भाजपा के करीब समस्त पार्षदों ने अलग-अलग के अलावा एक सुर में आयुक्त समेत समस्त अधिकारियों के उपेक्षापूर्ण व्यवहार के बारे में बताया।
उनकी लाचारी विपक्षी दल के पार्षद की भांति दिखाई दी। उन्होंने कहा कि आयुक्त उनसे मुलाकात नहीं करते हैं। वह उनके कार्यालय में एक-डेढ़ घंटा इंतजार करते रहते हैं, जबकि इस दौरान आयुक्त अन्य लोगों से मिलते रहते हैं।
अधिकारी उनके फोन भी नहीं उठाते
दूसरी ओर आयुक्त समस्त कामकाज में मनमर्जी कर रहे हैं। न तो उनसे सुझाव लिए जाते हैं और न ही उनके सुझाव पर कोई विचार किया जाता है। इसके अलावा अन्य अधिकारी उनके फोन भी नहीं उठाते हैं।
इस तरह उनके इलाकों में न तो काम हो रहा है और न ही समस्याओं का समाधान होता है। नगर निगम में भ्रष्टाचार का बोलबाला है कोई भी कार्य रिश्वत दिए बिना नहीं हो रहा है। अधिकारियों एवं कर्मचारियों की नियुक्ति करने एवं कामकाज देने में भी रिश्वत का खेल हो रहा है।
उधर, आयुक्त पर पार्षदों की नाराजगी और शिकायतों का कोई असर नहीं दिखा। उन्होंने पार्षदों को दो टूक कहा कि वह कार्यालय में खाली नहीं बैठे रहते। उन्हें निरंतर केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, उप राज्यपाल सचिवालय और दिल्ली सरकार में जाना पड़ता है।
इसके अलावा वह विभिन्न इलाकों का औचक निरीक्षण करते हैं। जनता से मिलने के लिए सप्ताह में दो दिन सुबह 10 से 11 बजे तक मिलने का समय तय कर रखा है। इस समय उनसे कोई भी मिलने के लिए आ सकता है। अगर किसी पार्षद को अन्य समय मिलना है तो वह उनके कार्यालय से मिलने का समय निश्चित कराएं।