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अब ट्रेनों के नॉन एसी कोच में भी लगेंगे डस्टबिन
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Sun, 01 Nov 2015 09:22 AM IST
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स्टेशन ही नहीं अब देश की ट्रेनें भी नीट एंड क्लीन होंगी। रेलवे ने ट्रेनों के एसी कोच के बाद अब नॉन एसी कोच में भी डस्टबिन लगाने की प्लानिंग की है। इसके लिए कोच के डिजाइन में भी बदलाव किया गया है।
अब जो नए कोच बनेंगे, उनमें डस्टबिन के लिए स्पेस दिया जाएगा। रेलवे अधिकारियों का दावा है कि मार्च 2016 से पहले ये कोच ट्रैक पर आ जाएंगे।
रेलवे बोर्ड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर शिवेंद्र मोहन ने शनिवार को गाजियाबाद रेलवे स्टेशन के निरीक्षण के दौरान पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ट्रेनों और स्टेशनों की सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अभी तक 8000 कोच में 19000 बॉयो टॉयलेट्स लगाए जा चुके हैं, ताकि स्टेशनों को साफ-सुथरा बनाया जा सके। उन्होंने बताया कि देश में हर साल करीब 3000 नए कोच ट्रैक पर आ जाते हैं।
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भविष्य में जो भी कोच बनेंगे उनमें डस्टबिन भी लगाए जाएंगे, ताकि ट्रेनों के अंदर भी कचरा बिखरा न दिखाई दे। डस्टबिन न होने से यात्री खिड़कियों से भी कचरा बाहर फेंक देेते हैं। स्लीपर क्लास कोच में भी डस्टबिन लग जाने के बाद लोग कचरा बाहर नहीं फेंकेंगे।
स्टेशन पर गंदगी देख फोटो खींचकर ले गए ईडी
रेलवे बोर्ड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर शिवेंद्र मोहन ने शनिवार को सभी प्लेटफार्म, सर्कुलेटिंग एरिया, वेटिंग हॉल, टिकट काउंटर्स का निरीक्षण कर सफाई और यात्री सुविधाओं का जायजा लिया।
उन्हें प्लेटफार्म नंबर 5/6 पर गंदगी मिली। वेटिंग हॉल में सीपेज और जाले लगे मिले। एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ने अपने मोबाइल से गंदगी और छत में लगे जाले की फोटो खींचकर ले गए।
उन्होंने वेटिंग हाल में सीपेज को ठीक कराने के निर्देश दिए। शिवेंद्र मोहन ने बताया कि 2 अक्तूबर 2014 से शुरू किए गए स्वच्छ भारत अभियान की समीक्षा भी की गई।
उन्होंने बताया कि लोग सफाई के प्रति जागरूक होकर अभियान से जुडे़े हैं, लेकिन अभी सफाई व्यवस्था को ठीक किए जाने की गुंजाइश बाकी है।
उन्होंने गंदगी फैलाने वालों पर जुर्माना लगाने के भी निर्देश दिए। इस दौरान डीटीएम डीके चोपड़ा, एसएसई वीके शर्मा, स्टेशन अधीक्षक सुरेश मेहता, सीएमआई आरके प्रसाद, सीएचआई जितेंद्र दुबे, सुंदर लाल मौजूद रहे।
एनजीओ की मदद से तैनात होंगी एंबुलेंस
स्टेशन पर एनजीओ की मदद से चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जाएगी। रेलवे अधिकारी एनजीओ से मदद लेकर स्टेशन पर एंबुलेंस तैनात करेंगे, ताकि घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सके।
फिलहाल रेलवे अस्पताल में एक एंबुलेंस तैनात है, लेकिन यह अक्सर गाजियाबाद से बाहर रहती है। शनिवार को प्रेसवार्ता में यह मुद्दा उठाया तो एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर ने बताया कि स्टेशन मास्टर कक्ष में पर फर्स्ट एड बॉक्स रखा जाएगा।
घायल या बीमार यात्रियों के इलाज के लिए डॉक्टरों की टीम तत्काल पहुंचेगी। स्थानीय अधिकारी एनजीओ की मदद से एंबुलेंस तैनात कराएंगे।
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अब जो नए कोच बनेंगे, उनमें डस्टबिन के लिए स्पेस दिया जाएगा। रेलवे अधिकारियों का दावा है कि मार्च 2016 से पहले ये कोच ट्रैक पर आ जाएंगे।
रेलवे बोर्ड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर शिवेंद्र मोहन ने शनिवार को गाजियाबाद रेलवे स्टेशन के निरीक्षण के दौरान पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ट्रेनों और स्टेशनों की सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि अभी तक 8000 कोच में 19000 बॉयो टॉयलेट्स लगाए जा चुके हैं, ताकि स्टेशनों को साफ-सुथरा बनाया जा सके। उन्होंने बताया कि देश में हर साल करीब 3000 नए कोच ट्रैक पर आ जाते हैं।
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भविष्य में जो भी कोच बनेंगे उनमें डस्टबिन भी लगाए जाएंगे, ताकि ट्रेनों के अंदर भी कचरा बिखरा न दिखाई दे। डस्टबिन न होने से यात्री खिड़कियों से भी कचरा बाहर फेंक देेते हैं। स्लीपर क्लास कोच में भी डस्टबिन लग जाने के बाद लोग कचरा बाहर नहीं फेंकेंगे।
स्टेशन पर गंदगी देख फोटो खींचकर ले गए ईडी
रेलवे बोर्ड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर शिवेंद्र मोहन ने शनिवार को सभी प्लेटफार्म, सर्कुलेटिंग एरिया, वेटिंग हॉल, टिकट काउंटर्स का निरीक्षण कर सफाई और यात्री सुविधाओं का जायजा लिया।
उन्हें प्लेटफार्म नंबर 5/6 पर गंदगी मिली। वेटिंग हॉल में सीपेज और जाले लगे मिले। एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ने अपने मोबाइल से गंदगी और छत में लगे जाले की फोटो खींचकर ले गए।
उन्होंने वेटिंग हाल में सीपेज को ठीक कराने के निर्देश दिए। शिवेंद्र मोहन ने बताया कि 2 अक्तूबर 2014 से शुरू किए गए स्वच्छ भारत अभियान की समीक्षा भी की गई।
उन्होंने बताया कि लोग सफाई के प्रति जागरूक होकर अभियान से जुडे़े हैं, लेकिन अभी सफाई व्यवस्था को ठीक किए जाने की गुंजाइश बाकी है।
उन्होंने गंदगी फैलाने वालों पर जुर्माना लगाने के भी निर्देश दिए। इस दौरान डीटीएम डीके चोपड़ा, एसएसई वीके शर्मा, स्टेशन अधीक्षक सुरेश मेहता, सीएमआई आरके प्रसाद, सीएचआई जितेंद्र दुबे, सुंदर लाल मौजूद रहे।
एनजीओ की मदद से तैनात होंगी एंबुलेंस
स्टेशन पर एनजीओ की मदद से चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जाएगी। रेलवे अधिकारी एनजीओ से मदद लेकर स्टेशन पर एंबुलेंस तैनात करेंगे, ताकि घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सके।
फिलहाल रेलवे अस्पताल में एक एंबुलेंस तैनात है, लेकिन यह अक्सर गाजियाबाद से बाहर रहती है। शनिवार को प्रेसवार्ता में यह मुद्दा उठाया तो एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर ने बताया कि स्टेशन मास्टर कक्ष में पर फर्स्ट एड बॉक्स रखा जाएगा।
घायल या बीमार यात्रियों के इलाज के लिए डॉक्टरों की टीम तत्काल पहुंचेगी। स्थानीय अधिकारी एनजीओ की मदद से एंबुलेंस तैनात कराएंगे।