फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Noida News ›   UP ATS action Farhan Nabi Siddiqui arrested on terror funding charges

प्रिंटिंग प्रेस की आड़ में आतंक का प्रचार: 11 करोड़ का फंड, घुसपैठियों को पनाह; यहां हुआ टेरर फंडिंग का खुलासा

Mon, 10 Nov 2025 10:09 AM IST
अनुज कुमार नवीन कुमार, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
नवीन कुमार, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा Published by: अनुज कुमार Updated Mon, 10 Nov 2025 10:09 AM IST
सार

यूपी एटीएस ने ग्रेटर नोएडा की इस्तांबुल इंटरनेशनल प्रा. लि. व हकीकत प्रिंटिंग पब्लिकेशन से फरहान नबी सिद्दीकी को टेरर फंडिंग के आरोप में गिरफ्तार किया। कंपनी में हुसैन हिल्मी इशिक की उर्दू-अंग्रेजी किताबें छापी जा रही थीं, जो धार्मिक वैमनस्य फैलाने वाली पाई गईं।

विज्ञापन
UP ATS action Farhan Nabi Siddiqui arrested on terror funding charges
आरोपी फरहान नबी सिद्दीकी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

औद्योगिक सेक्टर साइट-5 की कंपनी में जिन भड़काऊ सामग्री वाली किताबों का प्रकाशन हो रहा था, उन पर हकीकत किताबेवी प्रकाशन और हुसैन हिल्मी इशिक लिखा हुआ है। हुसैन हिल्मी इशिक तुर्किये के इस्लामी विद्वान थे, जबकि हकीकत किताबेवी प्रकाशन का नाम प्रिंटिंग प्रेस का है। जांच में पता चला है कि कंपनी के अंदर के माहौल ऐसा है, जैसे वहां पर कंपनी की आड़ में अवैध गतिविधियां चलाई जा रही थीं। इसके साक्ष्य भी मिले हैं। कंपनी भी तीन लोगों के नाम पर है। इनमें फरहान, उसका भाई और एक तुर्किये का निवासी हैं।

विज्ञापन


यूपी एसटीएस ने शनिवार को ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक साइट-5 स्थित कंपनी से फरहान नबी सिद्दीकी को टेरर फंडिंग के आरोप में गिरफ्तार किया है। एक बिल्डिंग के अंदर इस्तांबुल इंटरनेशनल प्रा. लि. और हकीकत प्रिंटिंग पब्लिकेशन के नाम से कंपनी चल रही थी।
विज्ञापन


आरोप है कि वो अपने साथियों के साथ मिलकर धार्मिक समुदायों के बीच वैमनस्यता फैलाने के लिए विदेशों से 11 करोड़ का फंड जुटाने और बंग्लादेशी घुसपैठियों को पनाह देने का काम कर रहे थे। साथ ही कंपनी में भड़काऊ सामग्री वाली किताबों का प्रकाशन किया जा रहा था। कंपनी के अंदर बड़ी संख्या में किताबें रखी है। प्रिंटिंग प्रेस भी लगी है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


किताबों पर हुसैन हिल्मी इशिक लिखा है। साथ ही हकीकत किताबेवी प्रकाशन के नाम से छापी जा रही है। किताबों का प्रकाशन उर्दू और अंग्रेजी में किया गया है। हालांकि मौके की स्थिति से पता चल रहा है कि कंपनी में बड़ी मात्रा में किताबों का प्रकाशन नहीं हो रहा था। लेकिन वहां के हालात से लग रहा है कि कंपनी की आड़ में वहां पर अवैध गतिविधियां हो रही थी। पुलिस पूछताछ में वहां काम करने वाले लोगों ने पहले आरओ दिल्ली नंबर की तीन गाड़ियों भी खड़ी है।

फाउंडेशन से जुड़े अहमत, महमत व फैजान की तलाश
धार्मिक समुदायों के बीच वैमनस्यता फैलाने के लिए भड़काऊ किताबों को प्रकाशित कर वितरित करने और मस्जिद-मदरसे बनाने के लिए विदेश से फंडिंग जुटाने वाले दिल्ली निवासी फरहान और उसके साथियों ने कई मुखौटा कंपनियां बनाई थीं।

स्वास्थ्य, सोशल सर्विस आदि के कारोबार के फर्जी चेहरे वाली उनकी कंपनियों का असली काम देश में अस्थिरता का माहौल पैदा करना था। फरहान की गिरफ्तारी के बाद उसके बाकी साथियों नासी तोर्खा, अहमत तोर्बा, महमत कुपेली और फैजान नबी की तलाश एटीएस ने तेज कर दी है। बता दें कि एटीएस की जांच में सामने आया है कि हकीकत वाकफी फाउंडेशन और अन्य मुखौटा कंपनियों के जरिये ये सभी किसी बड़ी साजिश का ताना-बाना बुन रहे थे। 

पुलिस को दी थी अपहरण की सूचना शनिवार को परिजनों ने कासना कोतवाली पुलिस ने फरहान के अपहरण की सूचना दी। बताया कि कुछ लोग फरहान को उठा कर ले गए, लेकिन पुलिस को एटीएस की कार्रवाई की जानकारी थी। पुलिस ने परिजनों को इसकी जानकारी नहीं दी। सूचना पर पुलिस जांच करने भी पहुंची। काफी देर बाद परिजनों को एटीएस की कार्रवाई का पता चला।

औद्योगिक सेक्टर साइट-5 के उद्यमियों का कहना है कि आरोपी फरहान अन्य उद्यमियों के साथ ज्यादा मेलजोल नहीं रखता था। वहां बनी एसोसिएशन में भी शामिल नहीं था। उनके यहां पर विशेष धर्म के काफी लोगों का आना-जाना रहता था। इस कारण अन्य उद्यमी भी उससे दूरी बनाकर रखते थे। उसकी गतिविधियां पसंद नहीं थी।

जांच में पता चला है कि आरोपी अपने ऑफिस के अंदर मुर्गियां पालता था। अंदर काफी अंड़े मिले। जिनसे चूजे निकलते थे और फिर उनका हलाल करता था। इसके लिए कंपनी के अंदर एक धारदार दाव मिला है। वहां मौजूद कर्मचारियों का कहना है कि दाव से मुर्गी और उसके चूजों को काटा जाता था। फिर उनके मांस को पकाकर परोसा जाता था।

जिस भूखंड पर आरोपी फरहान की कंपनी लगी है, उसके दोनों तरफ के भूखंड अभी खाली है। वहां उद्योग नहीं लगे हैं। इस कारण आसपास की कंपनियों में काम करने वाले लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं है। पड़ोसी की कंपनी में काम कर रहे एक सुरक्षाकर्मी ने बताया कि एक्सपो मार्ट में प्रदर्शनी के समय यहां पर काफी लोग आते थे।

वाकफी फाउंडेशन में अहमत तोर्वा, फरहान नबी सिद्दीकी, नासी तोर्खा और महमत कुपेली निदेशक हैं। वहीं इस्तानबुल इंटरनेशनल प्रा. लि. कंपनी में फरहान और नासी तोर्चा के साथ फैजान नबी भी निदेशक हैं। इस कंपनी को दिसंबर 2014 में बनाया गया था। वहीं नासी तोर्बा और फरहान दो अन्य कंपनियों रियल ग्लोबल एक्सप्रेस लाजिस्टिक प्रा. लि. और प्रोडक्ट्स प्रा. लि. से भी जुड़े हैं। एटीएस इन कंपनियों के पूर्व निदेशकों के बारे में भी छानबीन करने के लिए उनको सरगर्मी से तलाश रही है। ताकि इस नेटवर्क के बारे में बाकी जानकारियां हासिल की जा सकें। बताया जा रहा है कि जर्मनी और तुर्किये से उनसे मिलने वाले लोग किस मकसद से आते थे। उनको मस्जिद और मदरसे बनाने के लिए किन अंतरराष्ट्रीय इस्लामिक संगठनों द्वारा फंडिंग की जा रही थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed