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Noida News: शेल कंपनियों के जरिये हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग में चीन के नागरिक समेत तीन गिरफ्तार

Thu, 23 Jul 2026 08:57 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jul 2026 08:57 PM IST
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Three people, including a Chinese national, arrested for hawala and money laundering through shell companies.
गिरोह के सरगना का नगालैंड के पते पर आधार कार्ड भी मिला, 2020 से बिना वीजा के रह रहा था
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की नोएडा यूनिट ने हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग के अंतरराष्ट्रीय गिरोह का खुलासा किया है। बुधवार रात करीब 10 बजे सेक्टर-93 स्थित पूर्वांचल सिल्वर सिटी से सरगना चीन के नागरिक लियाओ लॉन्गहुई, गाजियाबाद के संजीव कुमार और औरैया के कौशलेंद्र को गिरफ्तार किया। एसटीएफ का दावा है कि ये भारत में शेल कंपनियां बनाकर करोड़ों रुपये के अवैध लेन-देन, हवाला और अन्य आर्थिक अपराधों को अंजाम दे रहे थे। 2020 में वीजा समाप्त होने के बाद लॉन्गहुई अवैध रूप से भारत में रहकर नेटवर्क संचालित कर रहा था। उसके कब्जे से फर्जी आधार कार्ड भी बरामद हुआ है।
गिरफ्तारी और बरामदगी के आधार पर थाना फेस-2 में प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। पूछताछ में सामने आया कि लॉन्गहुई 2018 में भारत आया था। वह अपने ससुर मुगेन यू और साले क्वीपिंग टैंग की वाईटीएल मैन्युफेक्चरिंग प्रा.लि. का संचालन करता था। कंपनी मोबाइल का कवर बनाती थी।
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एसटीएफ के अनुसार, चीन से आयातित कच्चे माल की कीमतों में हेराफेरी की जाती थी और तैयार माल को दिल्ली के करोलबाग, नेहरू प्लेस सहित विभिन्न बाजारों में अंडर इनवॉयसिंग के जरिये बेचा जाता था। अवैध रूप से अर्जित रकम हवाला चैनलों के जरिये चीन भेजी जाती थी। यह नेटवर्क केवल व्यापारिक अनियमितताओं तक सीमित नहीं था बल्कि इसके जरिये बड़ी मात्रा में अवैध धन का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लेन-देन किया जा रहा था।
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एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक राज कुमार मिश्र ने बताया कि आरोपियों के कब्जे से पांच लैपटॉप, नौ मोबाइल, एक टैबलेट, विभिन्न कंपनियों की 10 मोहरें, 11 बैंक चेकबुक, चीन के दो पासपोर्ट और एक पहचान पत्र, पैन कार्ड, कंपनी गठन से जुड़े दस्तावेज, विभिन्न बैंकों के करीब 4.72 करोड़ रुपये के चेक और नकदी बरामद की गई हैं। अब मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), आयकर विभाग और अन्य केंद्रीय एजेंसियों से भी समन्वय किया जा सकता है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके।
सूचना पर एसटीएफ ने सेक्टर-83 स्थित वाईटीएल मैन्युफेक्चरिंग प्रा.लि. की गतिविधियों की जांच शुरू की फिर पूछताछ के दौरान लॉन्गहुई आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। उसने बताया कि बाकी दस्तावेज उसके सेक्टर-93 स्थित आवास पर रखे हैं। जब एसटीएफ उसके फ्लैट पर पहुंची तो वहां से कई कंपनियों की चेकबुक, बैंक दस्तावेज, मोहरें और फर्जी पहचान पत्र बरामद हुए। इसी आधार पर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। लॉन्गहुई से बरामद आधार कार्ड पर उसका फोटो लगा लेकिन नाम सैमुअल लोथा लिखा है और पता नगालैंड के कोहिमा का दर्ज है।
नटवरलाल से भी जुड़ रहे नेटवर्क के तार
जांच में सामने आया कि 2019 में वाईटीएल मैन्युफेक्चरिंग में रवि कुमार ढककर उर्फ नटवरलाल शेयरधारक था। उसने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कंपनी का पैन और जीएसटी पंजीकरण भी कराया था। वह पहले से ही धोखाधड़ी, जालसाजी और विदेशी अधिनियम के मामलों में गिरफ्तार होकर गौतमबुद्धनगर जेल में बंद है। एसटीएफ अब इस पुराने मामले और वर्तमान नेटवर्क के बीच संबंधों की भी जांच कर रही है।


ये हैं शेल कंपनियां
लॉन्गहुई ने संजीव कुमार और कौशलेंद्र की मदद शेल कंपनियां बनाई थीं। एसटीएफ के अनुसार, संजीव चार्टर्ड अकाउंटेंट है। वह कंपनियों के गठन, बैंक खाते खुलवाने और दस्तावेज तैयार कराने में अहम भूमिका निभाता था। एसटीएफ अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कितने चार्टर्ड अकाउंटेंट, कंपनी सचिव या अन्य पेशेवर जुड़े हुए थे। शेल कंपनियों के नाम जेएनएस इंफ्रा हाइट्स प्रा.लि., रेफान एंटरप्राइजेज इंडिया प्रा.लि., टाइडीडेस्क एसेंशियल प्रा.लि., जेड वन एंटरप्राइजेज, हनुराज ट्रेडिंग सॉल्यूशन प्रा.लि., यूपीमैक्स इंडिया प्रा.लि., मेजेटेक पावर इंडिया प्रा.लि., एक्सीलेंस मोबाइल टेक इंडिया प्रा.लि. है। हांगकांग में पंजीकृत एचके हानको कम्युनिकेशन ट्रेडिंग कंपनी और एचके इंचियो लिमिटेड जैसी कंपनियों का भी इस्तेमाल धन के ट्रांसफर और हवाला कारोबार में किया जा रहा था। एसटीएफ का दावा है कि इन कंपनियों का उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग के उद्देश्य से किया जाता था। आरोपी ने अपने चालक देवेंद्र के नाम से हनुराज ट्रेडिंग सॉल्यूशन प्रा.लि. कंपनी बनाई है। गिरोह कर्मचारियों और अन्य लोगों को धन का लालच देकर उनके दस्तावेजों के आधार पर कंपनियां खोलता था। बाद में उन कंपनियों के बैंक खातों का पूरा नियंत्रण लॉन्गहुई के पास आ जाता था।
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