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Noida News: स्लम क्षेत्र की बच्चियों को गुड टच-बैड टच की दी जानकारी
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-पश्चिमी दिल्ली पुलिस ने दिखाई सरकारी फिल्म कोमल
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। पश्चिमी दिल्ली पुलिस ने स्लम क्षेत्रों की बच्चियों को यौन शोषण से बचाव और आत्म सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से एक विशेष अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत पुलिस अधिकारियों ने बच्चियों को सहज और असहज स्पर्श (गुड टच-बैड टच) के बीच का अंतर फिल्म के माध्यम से समझाया। इसके लिए केंद्रीय सरकार की बनाई गई शिक्षाप्रद लघु फिल्म कोमल का प्रदर्शन किया गया, जो बाल सुरक्षा पर आधारित है।
कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों ने बच्चियों को यह बताया कि किसी भी प्रकार की अनुचित छुअन या असहज व्यवहार की स्थिति में वे बिना डर के तुरंत अपने माता-पिता, शिक्षकों या पुलिस को इसकी जानकारी दें। पुलिस कर्मियों ने यह भी समझाया कि मौन रहना गलत है और समय पर बात करना ही सुरक्षा का सबसे बड़ा साधन है। अभियान के दौरान महिला पुलिस अधिकारियों ने बच्चियों के साथ संवाद स्थापित करते हुए उनकी शंकाओं का समाधान भी किया। इस दौरान बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और सुरक्षित बचपन, सुरक्षित भारत जैसे नारों के साथ आत्मविश्वास बढ़ाने वाली गतिविधियां भी कराई गईं। बच्चियों को बताया गया कि पुलिस हमेशा उनकी मदद के लिए तैयार है और किसी भी परिस्थिति में 1098 (बाल सहायता हेल्पलाइन) या 112 नंबर पर संपर्क किया जा सकता है।
वर्जन-- --
हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर बच्ची अपने अधिकारों को समझे और किसी भी अनुचित व्यवहार की स्थिति में बिना झिझक मदद मांग सके। फिल्म कोमल जैसे माध्यम बच्चों को सशक्त और सजग बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
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डी एस भास्कर , उपायुक्त पुलिस, पश्चिम जिला
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। पश्चिमी दिल्ली पुलिस ने स्लम क्षेत्रों की बच्चियों को यौन शोषण से बचाव और आत्म सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से एक विशेष अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत पुलिस अधिकारियों ने बच्चियों को सहज और असहज स्पर्श (गुड टच-बैड टच) के बीच का अंतर फिल्म के माध्यम से समझाया। इसके लिए केंद्रीय सरकार की बनाई गई शिक्षाप्रद लघु फिल्म कोमल का प्रदर्शन किया गया, जो बाल सुरक्षा पर आधारित है।
कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों ने बच्चियों को यह बताया कि किसी भी प्रकार की अनुचित छुअन या असहज व्यवहार की स्थिति में वे बिना डर के तुरंत अपने माता-पिता, शिक्षकों या पुलिस को इसकी जानकारी दें। पुलिस कर्मियों ने यह भी समझाया कि मौन रहना गलत है और समय पर बात करना ही सुरक्षा का सबसे बड़ा साधन है। अभियान के दौरान महिला पुलिस अधिकारियों ने बच्चियों के साथ संवाद स्थापित करते हुए उनकी शंकाओं का समाधान भी किया। इस दौरान बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और सुरक्षित बचपन, सुरक्षित भारत जैसे नारों के साथ आत्मविश्वास बढ़ाने वाली गतिविधियां भी कराई गईं। बच्चियों को बताया गया कि पुलिस हमेशा उनकी मदद के लिए तैयार है और किसी भी परिस्थिति में 1098 (बाल सहायता हेल्पलाइन) या 112 नंबर पर संपर्क किया जा सकता है।
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हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर बच्ची अपने अधिकारों को समझे और किसी भी अनुचित व्यवहार की स्थिति में बिना झिझक मदद मांग सके। फिल्म कोमल जैसे माध्यम बच्चों को सशक्त और सजग बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
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डी एस भास्कर , उपायुक्त पुलिस, पश्चिम जिला