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बीमार और बुजुर्ग, सुरक्षा कवच से अब भी दूर

Sun, 30 Jan 2022 01:51 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 30 Jan 2022 01:51 AM IST
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Sick and elderly, still away from the protective shield
नोएडा (योगेश शर्मा)। कोरोना के तीसरी लहर में बीमार और बुजुर्गों पर भारी पड़ने की आशंका जाहिर की गई थी। यह आशंका अब हकीकत में बदलती दिख रही है, क्योंकि तीसरी लहर में जान गांवाने वाले सभी कोरोना संक्रमित गंभीर बीमारियों से पीड़ित पाए गए हैं। इसी को ध्यान में रख 10 जनवरी से एहतियाती खुराक देने की शुरुआत की गई थी। लेकिन जिले में करीब 30 फीसदी बुजुर्गों, फ्रंटलाइन वर्कर और स्वास्थ्य कर्मियों को ही वैक्सीन की एहतियाती डोज लग पाई है। करीब 68 फीसदी लोग वैक्सीन के सुरक्षा कवच से अभी दूर हैं। इनमें 60 साल से अधिक उम्र के बीमार बुजुर्गों की तादात सबसे ज्यादा है।
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महामारी की तीसरी लहर में अब तक कुल 12 कोरोना संक्रमित जान गंवा चुके हैं। इनमें से एक दिमागी ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) 11 वर्षीय बच्ची, एक टीबी व अन्य बीमारियों से पीड़ित लुक्सर जेल का बंदी, पुरानी बीमारियों से पीड़ित तीन युवा और सात गंभीर बीमारियों से पीड़ित 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग शामिल हैं। तीसरी लहर में 1 जनवरी से अब तक 30,375 लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। इसे वैक्सीन के सुरक्षा कवच का ही असर माना जा रहा है कि औसत 99 फीसदी मरीज होम आइसोलेशन में उपचार के बाद ही स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि अस्पतालों में भर्ती मरीजों का आंकड़ा एक फीसदी से ही कम रहा।
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वहीं, इस संक्रमण से आईसीयू, ऑक्सीजन सपोर्ट और मौत के कगार पर पहुंचे लगभग सभी मरीजों में बुजुर्ग और पहले से अन्य बीमारियों से पीड़ितों की संख्या ज्यादा रही। जनपद में 26,300 स्वास्थ्य कर्मियों, 19,957 फ्रंटलाइन वर्कर को एहतियाती डोज दी जानी है। इसके अलावा गंभीर बीमारियों से पीड़ित 60 वर्ष से अधिक उम्र के 39,660 लोगों को एहतियाती डोज दी जानी है। इस हिसाब से 85,917 लोगों को बूस्टर डोज देने का लक्ष्य है, जबकि शनिवार तक केवल 27,818 को ही कवर किया जा सका। इसमें सबसे ज्यादा बुजुर्ग शामिल हैं। 10 हजार से अधिक ऐसे भी बुजुर्ग हैं, जिन्हें अब तक वैक्सीन की पहली या फिर दूसरी डोज भी नहीं लगी है। शुक्रवार को जिन तीन मौतों की पुष्टि हुई, उनमें से किसी को भी वैक्सीन की एक भी डोज नहीं लगी थी।
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टीबी रोगियों को शिकार बना रहा संक्रमण
कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वालों को कोरोना अपनी गिरफ्त में ले रहा है। ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) मरीजों में संक्रमण का खतरा अन्य मरीजों से अधिक होता है। ऐसे में मरीजों को सतर्कता बरतना जरूरी है। विशेषकर उन मरीजों को जो पहले से फेफड़ों की समस्या से जूझ रहे हैं। फेलिक्स अस्पताल के चेयरमैन डॉ. डीके गुप्ता ने बताया कि कोरोना संक्रमित होने वालों को खांसी परेशान कर रही है। यह खांसी दो से तीन हफ्तों से अधिक समय तक भी देखी जा रही है। टीबी के लक्षणों में यह प्रमुख है। यदि दो हफ्ते तक लगातार खांसी होती रहती है तो उसकी जांच करानी चाहिए। आमतौर पर दमा, गले में इंफेक्शन, टॉन्सिलाइटिस, फेरनजाइटिस, ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों के इंफेक्शन, निमोनिया या हृदय रोग की वजह से खांसी होती है। लिहाजा खांसी को लेकर सतर्क रहना जरूरी है। चूंकि कोरोना से फेफड़े कमजोर हो जाते हैं, जिससे टीबी का खतरा सबसे ज्यादा होता है। इस बार कोरोना संक्रमित मरीजों में टीबी के संक्रमण के केस भी बहुत मिल रहे हैं।
टीबी के लक्षण-
- भूख नहीं लगना, सीने में दर्द होना, खांसी के साथ बलगम आना, बलगम में कभी-कभी खून आना, हल्का बुखार आना, वजन कम होना, दो सप्ताह या अधिक समय तक खांसी आना।

इनकी जांच जरूरी
- बुजुर्ग मरीज, मधुमेह, दिल की बीमारी, हार्ट में ब्लॉकेज के मरीज, टीबी, एचआईवी, फेफड़े, लीवर, किडनी व मोटापा से पीड़ित मरीज, हल्के संक्रमण से जूझ रहे ऐसे मरीज जिन्हें पांच दिन से ज्यादा समय तक सांस लेने में दिक्कत हो।
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