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25 फीसदी कीमत पर होगी आरटीपीसीआर जांच
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संदीप वर्मा
ग्रेटर नोएडा। गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) के बॉयोटेक विभाग के तीन प्रोफेसरों ने कोविड-19 वायरस की पहचान के लिए आइसोथर्मल आरटीपीसीआर (रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पॉलीमरेस चेन रिएक्शन) टेस्ट किट तैयार की है। जिम्स में इसका पहला 50 लोगों पर हुआ क्लीनिकल ट्रायल सफल रहा है। खास बात यह है कि इसकी कीमत मौजूदा आरटीपीसीआर टेस्ट से एक चौथाई यानी करीब 25 फीसदी होगी।
आइसोथर्मल होने के चलते इसे किसी भी गांव या अन्य स्थान में आसानी से ले जाकर टेस्ट किया जा सकता है। अब जिम्स में 100 लोगों पर दूसरा ट्रायल होगा। वर्ष 2020 में जब कोरोना महामारी आई थी तब देश में बेहद कम स्थानों पर आरटीपीसीआर लैब थीं। कोरोना टेस्ट किट भी उपलब्ध कम थी। ऐसे में साइंस और टेक्नोलॉजी मंत्रालय की ओर से जीबीयू के बॉयोटेक विभाग को सस्ती और बेहतर टेस्ट किट तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
बायोटेक्नोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विक्रांत नैन और जीबीयू के रजिस्ट्रार डॉ. विश्वास त्रिपाठी और डॉ. दीपाली सिंह ने मिलकर यह किट तैयार की है। इसमें राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान के प्रोफेसर का भी सहयोग लिया गया। पहले चरण में 50 मरीजों पर किए गए क्लीनिकल ट्रॉयल में 94 फीसदी तक सटीक परिणाम आ रहे हैं।
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रंग बदलने पर पता चलेगा संक्रमण
आइसोथर्मल आरटीपीसीआर टेस्ट किट को गर्म पानी में रखकर ही टेस्ट कर सकते हैं। किट में रंग बदलने पर पता चल सकेगा कि कोविड संक्रमण है या नहीं। परिणाम जानने के लिए लैब की जरूरत नहीं पड़ती। इससे 20 से 25 लाख रुपये की लैब का खर्च भी बच सकेगा।
किसी भी तापमान में गांवों में भी जाकर कर सकेंगे टेस्ट
जीबीयू के रजिस्ट्रार डॉ. विश्वास त्रिपाठी ने बताया कि नई टेस्ट किट को सामान्य तापमान में भी रखा जा सकता है। इसके लिए मरीज को लैब आने की जरूरत भी नहीं। किसी गांव या अन्य स्थान पर भी इसे ले जाकर टेस्ट किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि एक बार में करीब 200 लोगों तक के टेस्ट किए जा सकते हैं।
दूसरे क्लीनिकल ट्रायल के बाद होगा उत्पादन
अब 100 लोगों पर जिम्स में ही क्लीनिकल ट्रायल शुरू किया जाएगा। भारत सरकार के विज्ञान और तकनीकी विभाग से मंजूरी के बाद किसी कंपनी से इसके उत्पादन पर बात कर इसका उत्पादन शुरू किया जा सकता है। प्रयास किया जा रहा है कि तीसरी लहर आने से पहले इसका उत्पादन शुरू किया जा सके।
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ग्रेटर नोएडा। गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) के बॉयोटेक विभाग के तीन प्रोफेसरों ने कोविड-19 वायरस की पहचान के लिए आइसोथर्मल आरटीपीसीआर (रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पॉलीमरेस चेन रिएक्शन) टेस्ट किट तैयार की है। जिम्स में इसका पहला 50 लोगों पर हुआ क्लीनिकल ट्रायल सफल रहा है। खास बात यह है कि इसकी कीमत मौजूदा आरटीपीसीआर टेस्ट से एक चौथाई यानी करीब 25 फीसदी होगी।
आइसोथर्मल होने के चलते इसे किसी भी गांव या अन्य स्थान में आसानी से ले जाकर टेस्ट किया जा सकता है। अब जिम्स में 100 लोगों पर दूसरा ट्रायल होगा। वर्ष 2020 में जब कोरोना महामारी आई थी तब देश में बेहद कम स्थानों पर आरटीपीसीआर लैब थीं। कोरोना टेस्ट किट भी उपलब्ध कम थी। ऐसे में साइंस और टेक्नोलॉजी मंत्रालय की ओर से जीबीयू के बॉयोटेक विभाग को सस्ती और बेहतर टेस्ट किट तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
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बायोटेक्नोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विक्रांत नैन और जीबीयू के रजिस्ट्रार डॉ. विश्वास त्रिपाठी और डॉ. दीपाली सिंह ने मिलकर यह किट तैयार की है। इसमें राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान के प्रोफेसर का भी सहयोग लिया गया। पहले चरण में 50 मरीजों पर किए गए क्लीनिकल ट्रॉयल में 94 फीसदी तक सटीक परिणाम आ रहे हैं।
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रंग बदलने पर पता चलेगा संक्रमण
आइसोथर्मल आरटीपीसीआर टेस्ट किट को गर्म पानी में रखकर ही टेस्ट कर सकते हैं। किट में रंग बदलने पर पता चल सकेगा कि कोविड संक्रमण है या नहीं। परिणाम जानने के लिए लैब की जरूरत नहीं पड़ती। इससे 20 से 25 लाख रुपये की लैब का खर्च भी बच सकेगा।
किसी भी तापमान में गांवों में भी जाकर कर सकेंगे टेस्ट
जीबीयू के रजिस्ट्रार डॉ. विश्वास त्रिपाठी ने बताया कि नई टेस्ट किट को सामान्य तापमान में भी रखा जा सकता है। इसके लिए मरीज को लैब आने की जरूरत भी नहीं। किसी गांव या अन्य स्थान पर भी इसे ले जाकर टेस्ट किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि एक बार में करीब 200 लोगों तक के टेस्ट किए जा सकते हैं।
दूसरे क्लीनिकल ट्रायल के बाद होगा उत्पादन
अब 100 लोगों पर जिम्स में ही क्लीनिकल ट्रायल शुरू किया जाएगा। भारत सरकार के विज्ञान और तकनीकी विभाग से मंजूरी के बाद किसी कंपनी से इसके उत्पादन पर बात कर इसका उत्पादन शुरू किया जा सकता है। प्रयास किया जा रहा है कि तीसरी लहर आने से पहले इसका उत्पादन शुरू किया जा सके।