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पांच हजार रुपये देने के बाद ही बनेगा स्थायी लाइसेंस
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पीड़ित देवराज।
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नोएडा। सेक्टर-33 स्थित उपसंभागीय परिवहन कार्यालय के बाहर बिचौलियों का राज खत्म नहीं हो पा रहा है। आलम यह है कि कार्यालय के बाहर बिचौलिये लोगों को पकड़ लेते हैं और काम कराने के एवज में मोटी कमाई कर रहे हैं। ऐसा एक मामला सामने आया है। इसमें बिचौलियों ने एक युवक से लर्निंग लाइसेंस बनवाने के लिए पांच हजार रुपये ले लिए। पीड़ित का आरोप है कि अब स्थायी लाइसेंस के लिए पांच हजार रुपये और मांगे जा रहे हैं। नोएडा निवासी देवराज फूड डिलीवरी का काम करते हैं। महीने का कुल 12 हजार रुपये कमा लेते हैं। कुछ दिन पहले वह एआरटीओ कार्यालय में लाइसेंस बनवाने के लिए आए थे। कार्यालय के बाहर ही एक बिचौलिये ने लाइसेंस बनवाने की बात कहकर रोक लिया।
उन्होंने इनकार भी किया, लेकिन उसने लिपिकों की कार्यशैली और जल्द लाइसेंस बनवाने का झांसा देकर बातों में फंसा लिया। बिचौलिये ने डीएल बनवाने के लिए पांच हजार रुपये मांगे। देवराज ने उसे एक हजार रुपये एडवांस दे दिए। लर्निंग लाइसेंस बन जाने के बाद बिचौलिये ने पूरे पैसे देने को कहा, लेकिन पैसे नहीं होने की वजह से उसने आधे ही पैसे लेने को कहा। जब वह नहीं माना तो पीड़ित ने दोस्त से पैसे उधार मांग कर बिचौलिये को दे दिए। दो दिन बाद देवराज ने बिचौलिये से लाइसेंस को स्थायी कराने की बात कही तो उसने फिर से पांच हजार रुपये मांगे। जब देवराज ने पहले ही पैसे देने की बात कही तो बिचौलिये ने मुकरते हुए कहा कि वह तो लर्निंग लाइसेंस का था। पांच हजार रुपये और देने पर ही परमानेंट डीएल बन पाएगा। लाख मिन्नतों के बाद भी बिचौलिये ने उसकी एक सुनी। संवाद
बाउंड्री के बाहर हमारा कोई लेना-देना नहीं
मामले में एआरटीओ प्रशासन एके पांडेय का कहना है कि जिस व्यक्ति से बिचौलिये ने पैसे लिए हैं, उससे हमारा कोई लेना-देना नहीं है। हमारा परिसर बरामदे के बाहर तक है। ग्रिल की बाउंड्री के बाहर क्या हो रहा है, इससे भी कोई लेना-देना नहीं है। यदि बिचौलिये ने ऐसा किया है तो पीड़ित को उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करानी चाहिए।
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उन्होंने इनकार भी किया, लेकिन उसने लिपिकों की कार्यशैली और जल्द लाइसेंस बनवाने का झांसा देकर बातों में फंसा लिया। बिचौलिये ने डीएल बनवाने के लिए पांच हजार रुपये मांगे। देवराज ने उसे एक हजार रुपये एडवांस दे दिए। लर्निंग लाइसेंस बन जाने के बाद बिचौलिये ने पूरे पैसे देने को कहा, लेकिन पैसे नहीं होने की वजह से उसने आधे ही पैसे लेने को कहा। जब वह नहीं माना तो पीड़ित ने दोस्त से पैसे उधार मांग कर बिचौलिये को दे दिए। दो दिन बाद देवराज ने बिचौलिये से लाइसेंस को स्थायी कराने की बात कही तो उसने फिर से पांच हजार रुपये मांगे। जब देवराज ने पहले ही पैसे देने की बात कही तो बिचौलिये ने मुकरते हुए कहा कि वह तो लर्निंग लाइसेंस का था। पांच हजार रुपये और देने पर ही परमानेंट डीएल बन पाएगा। लाख मिन्नतों के बाद भी बिचौलिये ने उसकी एक सुनी। संवाद
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बाउंड्री के बाहर हमारा कोई लेना-देना नहीं
मामले में एआरटीओ प्रशासन एके पांडेय का कहना है कि जिस व्यक्ति से बिचौलिये ने पैसे लिए हैं, उससे हमारा कोई लेना-देना नहीं है। हमारा परिसर बरामदे के बाहर तक है। ग्रिल की बाउंड्री के बाहर क्या हो रहा है, इससे भी कोई लेना-देना नहीं है। यदि बिचौलिये ने ऐसा किया है तो पीड़ित को उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करानी चाहिए।
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