राष्ट्रीय मिर्गी दिवस आज: जूता सुंघाने और झाड़- फूंक से नहीं दूर होती मिर्गी, समय पर इलाज कराना जरूरी
फेलिक्स अस्पताल के निदेशक डॉ. डीके गुप्ता ने बताया कि मिर्गी लाइलाज नहीं है, बल्कि दवा से इसका इलाज संभव है। इलाज में देरी से बीमारी जानलेवा बन रही है। लक्षण दिखने पर उपचार शुरू करें। मिर्गी से ग्रसित व्यक्ति को किभी भी दौरा पड़ सकता है। उसे अकेले कभी नहीं छोड़ना चाहिए। चार से पांच माह दवा का सेवन और तनाव मुक्त रहने से बीमारी से जीत सकते हैं।
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नोएडा में जागरूकता की कमी और उपचार में देरी से मिर्गी का मर्ज बढ़ रहा है। इसकी बड़ी वजह अंधविश्वास भी है। विश्व में मिर्गी के मरीजों की संख्या सात करोड़ से ज्यादा बताई जा रही है। जबकि भारत में मरीजों की संख्या करीब 1.20 करोड़ है, हर साल एक लाख मरीज बढ़ रहे हैं।
देहात क्षेत्र में सबसे ज्यादा मरीज सामने आ रहे हैं। बड़ी संख्या में मरीज डॉक्टर तक पहुंचते ही नहीं है और समय पर सही उपचार कराने की जगह जूता सुंघाने और झाड़-फूंक कराने के कारण मर्ज को बढ़ा लेते हैं। देश में हर साल 17 नवंबर को राष्ट्रीय मिर्गी दिवस मनाया जाता है। इसके माध्यम से पीड़ितों व परिजनों को जागरूक किया जाता है।
यह बरतें सावधानी
पर्याप्त नींद लें, तेज रोशनी से बचें, शराब व नशीली दवाओं का सेवन न करें, वाहन चलाते समय हेलमेट का इस्तेमाल अवश्य करें, टीवी और कंप्यूटर के आगे ज्यादा देर तक नहीं बैठें, फास्ट फूड खाने से बचें, हरी एवं पत्तेदार सब्जियां अच्छे से धोकर खाएं।
लाइलाज नहीं बीमारी
फेलिक्स अस्पताल के निदेशक डॉ. डीके गुप्ता ने बताया कि मिर्गी लाइलाज नहीं है, बल्कि दवा से इसका इलाज संभव है। इलाज में देरी से बीमारी जानलेवा बन रही है। लक्षण दिखने पर उपचार शुरू करें। मिर्गी से ग्रसित व्यक्ति को किभी भी दौरा पड़ सकता है। उसे अकेले कभी नहीं छोड़ना चाहिए। चार से पांच माह दवा का सेवन और तनाव मुक्त रहने से बीमारी से जीत सकते हैं।
मरीजों को डॉक्टरों के पास ले जाने की जरूरत
मेट्रो अस्पताल की न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सोनिया लाल ने बताया कि इस रोग से पीड़ित हर व्यक्ति की परेशानी अलग-अलग हो सकती है। विकासशील देशों में तीन चौथाई लोगों को आवश्यक उपचार नहीं मिल पाता है। लोगों को इसे समझने की जरूरत है और मरीजों को डॉक्टरों के पास ले जाने की जरूरत है।
किसी भी उम्र में हो सकती है बीमारी
वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. कपिल के सिंघल ने बताया कि यह रोग बच्चे के पैदा होने से लेकर किसी भी उम्र में हो सकता है। दिमाग में इसका ट्यूमर कभी भी पनप सकता है। ट्यूमर के अलावा किसी हादसे में ब्रेन हैमरेज होने के बाद भी यह रोग हो सकता है। अधिकांश लोगों को नहीं पता कि रोग कई प्रकार का होता है।