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Noida News: आधे से ज्यादा प्रधान केवल 12वीं पढ़े, 5% अब भी निरक्षर
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गाजीपुर। जिले के ग्राम प्रधानों की शिक्षा से जुड़ी पंचायत राज विभाग की रिपोर्ट ने चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं। 1236 ग्राम प्रधानों में से अधिकांश यानी आधे से ज्यादा प्रधानों ने केवल इंटरमीडिएट तक ही पढ़ाई की है। 5 प्रतिशत प्रधान निरक्षर हैं। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, 672 प्रधान कक्षा 9 से 12 पास हैं। वहीं, 238 प्रधान उच्च शिक्षा प्राप्त हैं, जिनमें स्नातक, परास्नातक और विशेष योग्यता वाले शामिल हैं। इसके अलावा 274 प्रधान केवल कक्षा 8 तक पढ़ पाए, और 62 प्रधान निरक्षर हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षित नेतृत्व पंचायत स्तर पर योजनाओं की समझ और पारदर्शिता को बढ़ावा देता है। पढ़े-लिखे प्रधान नई तकनीक और शासन की डिजिटल व्यवस्थाओं को आसानी से अपनाते हैं। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि शिक्षा के अभाव में कई बार सरकारी योजनाओं का लाभ गांव तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाता है। ग्राम पंचायतों का नेतृत्व अब बड़ी संख्या में युवाओं और महिलाओं तक पहुंच चुका है, लेकिन रिपोर्ट बताती है कि अभी भी शिक्षा के स्तर को मजबूत करने की जरूरत है। विशेषकर ग्रामीण इलाकों में, जहां आज भी कुछ पंचायतें ऐसे हाथों में हैं जिनकी पढ़ाई बेहद सीमित है।
प्रधान का शिक्षित होना जरुरी-गांव की बागडोर संभाल रहे शिक्षित प्रधानों से उम्मीद की जाती है कि वे सरकारी योजनाओं को बेहतर ढंग से समझकर जनता तक पहुंचाएं। वहीं निरक्षर प्रधानों के सामने यह चुनौती है कि वे ग्राम विकास की योजनाओं को समझने और लागू कराने में सहयोगियों पर ज्यादा निर्भर रहते हैं।
निरक्षर प्रधानों को जागरूक करके उन्हें साक्षर बनाने का प्रयास किया जाएगा। ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन में सहूलियत हो सकें।
-रमेश चंद्र उपाध्याय, प्रभारी डीपीआरओ, गाजीपुर।
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प्रधान का शिक्षित होना जरुरी-गांव की बागडोर संभाल रहे शिक्षित प्रधानों से उम्मीद की जाती है कि वे सरकारी योजनाओं को बेहतर ढंग से समझकर जनता तक पहुंचाएं। वहीं निरक्षर प्रधानों के सामने यह चुनौती है कि वे ग्राम विकास की योजनाओं को समझने और लागू कराने में सहयोगियों पर ज्यादा निर्भर रहते हैं।
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निरक्षर प्रधानों को जागरूक करके उन्हें साक्षर बनाने का प्रयास किया जाएगा। ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन में सहूलियत हो सकें।
-रमेश चंद्र उपाध्याय, प्रभारी डीपीआरओ, गाजीपुर।