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Noida News: पेड़ गिरने से शख्स की मौत से लिया सबक, हर छह माह में होगी छंटाई

Sun, 21 Sep 2025 09:11 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 21 Sep 2025 09:11 PM IST
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Lessons learned from the death of a man due to falling tree, pruning will be done every six months
पीडब्ल्यूडी ने सड़कों और फुटपाथों के साथ लगे पेड़ों की देखभाल के लिए नई एसओपी जारी की
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हरियाली बढ़ाने के साथ सड़क पर चलने वाले लोगों और वाहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उद्देश्य
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05 मीटर तक रहेगी सेंट्रल वर्ज पर लगे पेड़ों की ऊंचाई

अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। लोक निर्माण विभाग (पीडब्लयूडी) ने सड़कों के किनारे हरियाली बढ़ाने के साथ ही पड़ों की देखभाल को और सख्त किया है। इस संबंध में विभाग की ओर से पेड़ों की देखभाल और छंटाई के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की गई है। इसका उद्देश्य केवल हरियाली बढ़ाना नहीं बल्कि सड़क पर चलने वाले लोगों और वाहनों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करना है।
माना जा रहा है कि पिछले माह कालकाजी में तेज बारिश के दौरान सड़क पर चल रहे वाहनों पर नीम का पेड़ गिरने से एक शख्स की मौत व उसकी बेटी के गंभीर रूप से घायल होने की घटना ने राजधानी में पेड़ों की सुरक्षा और रखरखाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। इस घटना से सबक लेते हुए विभाग की तरफ से एसओपी जारी की गई है। एसओपी के अनुसार, अब अधिकारियों को हर छह माह में सड़कों के सेंट्रल वर्ज और फुटपाथों पर लगे पेड़ों की छंटाई करनी होगी। साथ ही, सूखे और कमजोर पेड़ों को समय पर हटाना अनिवार्य होगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पेड़, पौधे और झाड़ियां सड़क पर लगे ट्रैफिक लाइट, संकेतक, यू-टर्न और स्ट्रीट लाइटों की दृश्यता में बाधा न डालें।
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सेंट्रल वर्ज पर लगे पेड़ों की ऊंचाई अधिकतम पांच मीटर तक रखी जा सकती है जबकि झाड़ियों की ऊंचाई 1 से 1.2 मीटर तक सीमित रहेगी। यदि किसी पेड़ की शाखाएं बिजली की तारों या स्ट्रीट लाइटों में रुकावट पैदा करती हैं तो उन्हें काटने के लिए वन विभाग से अनुमति लेकर तुरंत हटाया जाएगा।
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हरित क्षेत्र में माली की तैनाती अनिवार्य

एसओपी के मुताबिक, पीडब्ल्यूडी की बागवानी शाखा को निर्देश दिया गया है कि हर 2500 वर्ग मीटर हरित क्षेत्र पर कम से कम एक माली की तैनाती सुनिश्चित की जाए। साथ ही, सभी कर्मचारियों को प्रभारी अभियंता की ओर से अनुमोदित वर्दी पहनना अनिवार्य होगा। नियम का पालन न करने पर सेवा प्रदाता पर प्रति कर्मचारी प्रतिदिन 50 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। फुटपाथों और सेंट्रल वर्ज पर पेड़ों और झाड़ियों की नियमित सफाई करने, टूटे-फूटे पौधों को बदलने और समय पर पौधरोपण करने पर भी जोर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इन कदमों से न केवल राजधानी की हरियाली बेहतर होगी बल्कि लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।



कई बार हो चुके हैं हादसे

राजधानी में पेड़ों के गिरने से हादसों की घटनाएं नई नहीं हैं। कुछ वर्षों में मानसून या आंधी-तूफान के दौरान कई लोगों की मौत हो चुकी है। वर्ष 2022 में लोधी रोड इलाके में बड़ा पेड़ कार पर गिर गया था जिसमें एक महिला की मौत हो गई थी। इसी साल आईटीओ के पास पुराना पेड़ ऑटो रिक्शा पर गिरने से चालक गंभीर रूप से घायल हो गया था। वहीं, सिविल लाइंस और करोल बाग जैसे पुराने इलाकों में पेड़ों की कमजोर जड़ों और जलभराव की वजह से बार-बार ऐसी घटनाएं सामने आती रही हैं। कालकाजी की घटना ने इस समस्या की गंभीरता को और उजागर कर दिया।




निगरानी और जवाबदेही हो तय

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि एसओपी के क्रियान्वयन पर सख्ती बरतनी होगी। केवल एसओपी जारी कर देना पर्याप्त नहीं है बल्कि इसकी निगरानी और जवाबदेही तय करनी होगी। दिल्ली में बढ़ते हादसों और सुरक्षा खतरों को देखते हुए पीडब्ल्यूडी की यह नई एसओपी हरियाली और जन सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की एक अहम कोशिश मानी जा रही है।
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