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पर्यावरण संरक्षण के लिए घटाई जाएगी पटाखों की संख्या
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पर्यावरण संरक्षण के लिए घटाई जाएगी पटाखों की संख्या
नोएडा। शहर में होने वाली रामलीलाओं का समय नजदीक आ रहा है। आयोजन में पटाखे और प्लास्टिक के पत्तल जहां प्रदूषण एवं गंदगी का कारण बनते हैं। इससे पर्यावरण को खासा नुकसान पहुंचता है। इसे देखते हुए इस बार पर्यावरण संरक्षण के लिए आयोजकों द्वारा कई प्रयास किए जा रहे हैं। आयोजकों द्वारा जागरूकता रैली, प्लास्टिक बहिष्कार जैसे कई कदम उठाए गए हैं। ताकि प्रदूषण को रोका जा सके।
सेक्टर-21ए नोएडा स्टेडियम में सनातन धर्म रामलीला समिति द्वारा आयोजित रामलीला में इस बार आयोजन की भव्यता पर पहले से अधिक खर्च नजर आएगा। वहीं, पटाखों की संख्या कम कर दी जाएगी। समिति के महासचिव संजय बाली ने बताया कि पुतलों में लगने वाले पटाखों की संख्या में काफी कमी की जा रही है। साथ ही कोशिश की जा रही है कि कम प्रदूषण वाले पटाखों का इस्तेमाल किया जाए। हालांकि, ग्रीन पटाखे नहीं मिलने से थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बताया कि हर साल जहां रावण में पांच हजार पटाखे लगाए जाते थे। वहीं, इस बार तीन हजार पटाखे ही लगाए जाएंगे। साथ ही जिन पुतलों में तीन हजार पटाखे होते थे, उनमें दो हजार का प्रयोग होगा। इसके साथ ही प्रतिबंधित प्लास्टिक का प्रयोग बिलकुल नहीं किया जाएगा। सेक्टर-62 श्रीराम मित्र मंडल द्वारा आयोजित होने वाली रामलीला में जागरूकता रैली के माध्यम से लोगों को पर्यावरण संरक्षण की सीख दी जाएगी। समिति के महासचिव मुन्ना कुमार शर्मा ने बताया कि रैली का मकसद अधिक से अधिक लोगों को पर्यावरण संरक्षण का महत्व समझाना है। साथ ही आयोजन में प्रतिबंधित प्लास्टिक को रोकने के लिए इंतजाम किए गए हैं। वहीं, दर्शकों को भी समझाया जाएगा कि वह प्लास्टिक से दूर रहें। पुतलों में पटाखों की संख्या तो उतनी ही रहेगी, लेकिन कोशिश होगी कि ग्रीन पटाखे या कम प्रदूषण वाले पटाखे इस्तेमाल किए जाएं। सेक्टर-46 श्रीराम लखन धार्मिक लीला कमेटी के महासचिव राघवेंद्र दुबे ने कहा कि आयोजन में पर्यावरण को नुकसान ना पहुंचे, इस बात का पूरा ख्याल रखा जाएगा। आयोजन को ईको फ्रेंडली बनाने के प्रयास होंगे। सेक्टर-12 बजरंग रामलीला समिति के अध्यक्ष शिवलाल ने कहा कि यहां की रामलीला में स्थानीय लोग मिलकर कार्य करते हैं। हमारा उद्देश्य रहता है कि जितना हो सके पर्यावरण संरक्षण के साथ लीला मंचन किया जाए। भंगेल में होने वाली श्री राम लखन लीला कमेटी के पदाधिकारी यागवेंद्र ने कहा कि रामलीला के दौरान किरदारों के अभिनय और मंच सज्जा पर अधिक ध्यान दिया जाएगा। पटाखों का इस्तेमाल कम किया जाएगा।
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नोएडा। शहर में होने वाली रामलीलाओं का समय नजदीक आ रहा है। आयोजन में पटाखे और प्लास्टिक के पत्तल जहां प्रदूषण एवं गंदगी का कारण बनते हैं। इससे पर्यावरण को खासा नुकसान पहुंचता है। इसे देखते हुए इस बार पर्यावरण संरक्षण के लिए आयोजकों द्वारा कई प्रयास किए जा रहे हैं। आयोजकों द्वारा जागरूकता रैली, प्लास्टिक बहिष्कार जैसे कई कदम उठाए गए हैं। ताकि प्रदूषण को रोका जा सके।
सेक्टर-21ए नोएडा स्टेडियम में सनातन धर्म रामलीला समिति द्वारा आयोजित रामलीला में इस बार आयोजन की भव्यता पर पहले से अधिक खर्च नजर आएगा। वहीं, पटाखों की संख्या कम कर दी जाएगी। समिति के महासचिव संजय बाली ने बताया कि पुतलों में लगने वाले पटाखों की संख्या में काफी कमी की जा रही है। साथ ही कोशिश की जा रही है कि कम प्रदूषण वाले पटाखों का इस्तेमाल किया जाए। हालांकि, ग्रीन पटाखे नहीं मिलने से थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बताया कि हर साल जहां रावण में पांच हजार पटाखे लगाए जाते थे। वहीं, इस बार तीन हजार पटाखे ही लगाए जाएंगे। साथ ही जिन पुतलों में तीन हजार पटाखे होते थे, उनमें दो हजार का प्रयोग होगा। इसके साथ ही प्रतिबंधित प्लास्टिक का प्रयोग बिलकुल नहीं किया जाएगा। सेक्टर-62 श्रीराम मित्र मंडल द्वारा आयोजित होने वाली रामलीला में जागरूकता रैली के माध्यम से लोगों को पर्यावरण संरक्षण की सीख दी जाएगी। समिति के महासचिव मुन्ना कुमार शर्मा ने बताया कि रैली का मकसद अधिक से अधिक लोगों को पर्यावरण संरक्षण का महत्व समझाना है। साथ ही आयोजन में प्रतिबंधित प्लास्टिक को रोकने के लिए इंतजाम किए गए हैं। वहीं, दर्शकों को भी समझाया जाएगा कि वह प्लास्टिक से दूर रहें। पुतलों में पटाखों की संख्या तो उतनी ही रहेगी, लेकिन कोशिश होगी कि ग्रीन पटाखे या कम प्रदूषण वाले पटाखे इस्तेमाल किए जाएं। सेक्टर-46 श्रीराम लखन धार्मिक लीला कमेटी के महासचिव राघवेंद्र दुबे ने कहा कि आयोजन में पर्यावरण को नुकसान ना पहुंचे, इस बात का पूरा ख्याल रखा जाएगा। आयोजन को ईको फ्रेंडली बनाने के प्रयास होंगे। सेक्टर-12 बजरंग रामलीला समिति के अध्यक्ष शिवलाल ने कहा कि यहां की रामलीला में स्थानीय लोग मिलकर कार्य करते हैं। हमारा उद्देश्य रहता है कि जितना हो सके पर्यावरण संरक्षण के साथ लीला मंचन किया जाए। भंगेल में होने वाली श्री राम लखन लीला कमेटी के पदाधिकारी यागवेंद्र ने कहा कि रामलीला के दौरान किरदारों के अभिनय और मंच सज्जा पर अधिक ध्यान दिया जाएगा। पटाखों का इस्तेमाल कम किया जाएगा।
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