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Noida News: संकोच छोड़ समाधान की ओर बढ़ें, पुलिस से तत्काल संपर्क करें
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- एडीसीपी शैव्या गोयल ने पारस पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों को दी आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर याद रखने की सलाह
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। पुलिस समाज में कानून व्यवस्था का पालन कराने और नागरिकों की सुरक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहती है। पुलिस को देखकर डरना नहीं चाहिए। किसी भी तरह के संकोच से बचना चाहिए। मदद हासिल करने के लिए सबसे पहले पुलिस का दरवाजा खटखटाना चाहिए। पुलिस का काम अपराध की रोकथाम और जांच करने के अलावा जरूरत पड़ने पर तुरंत सहायता पहुंचाना है।
बृहस्पतिवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर ग्रेनो वेस्ट के टेक जोन-7 मिलक लच्छी स्थित पारस पब्लिक स्कूल में आयोजित पुलिस की पाठशाला में एडीसीपी सेंट्रल नोएडा शैव्या गोयल ने ये बातें कहीं। उन्होंने स्कूली छात्रों को पुलिस की जिम्मेदारियों, हेल्पलाइन नंबरों की उपयोगिता और साइबर ठगी से बचाव के उपाय बताएं। उन्होंने कहा कि डिजिटल अरेस्ट के मामलों में ठग खुद को किसी सरकारी एजेंसी या पुलिस अधिकारी बताकर वीडियो या फोन कॉल पर डराते हैं। केस दर्ज होने की बात कहकर जांच के नाम पर तुरंत हिरासत में लेने की बात कहते हैं। साथ ही स्क्रीन पर वर्चुअल लॉक या नोटिस दिखाकर धमकाते हैं। जिसके झांसे में आकर लोग पैसे ट्रांसफर कर देते हैं। इसी तरह बैंकिंग फ्रॉड के मामलों में जालसाज फर्जी कॉल, मैसेज या लिंक भेजकर बैंक अकाउंट डिटेल्स, ओटीपी और पासवर्ड हासिल कर लेते हैं। एडीसीपी ने किसी भी परिस्थिति में बैंकिंग डिटेल्स या ओटीपी किसी को नहीं बताने को कहा। वहीं स्टॉक एक्सचेंज फ्रॉड के बारे में समझाया कि सोशल मीडिया या व्हाट्सएप ग्रुप पर निवेश के नाम पर लालच देकर ठगी की जाती है। फर्जी कंपनियां और एप की सहायता से लोगों को मुनाफे का झांसा दिया जाता है।
उन्होंने छात्रों को किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करने की सलाह दी। साथ ही संदिग्ध कॉल व संदेश पर मिलने पर तुरंत सतर्क होने और साइबर फ्रॉड की स्थिति में 1930 नंबर या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अगर हेल्पलाइन नंबर व्यस्त मिले तो नजदीकी थाने में इसकी तत्काल सूचना दी जा सकती है। किसी भी अनजान व्यक्ति से बैंक या आधार की जानकारी साझा नहीं करें और सोशल मीडिया पर ओटीपी, पासवर्ड या निजी तस्वीरें भेजने से बचें। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि साइबर अपराधी पहले भरोसा जीतते हैं और फिर ठगी करते हैं।
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स्टॉक के माध्यम से निवेश किए गए खाते की जानकारी नेशनल सिक्योरिटी डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) और सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड सीडीएसएल से प्राप्त करें। उन्होंने हेल्पलाइन नंबर डायल-112 आपातकालीन सेवा, महिला हेल्पलाइन 1090, साइबर फ्रॉड की शिकायत के लिए 1930 व चाइल्ड लाइन नंबर-1098 के बारे में बताया। साथ ही हर छात्र को हेल्पलाइन नंबर याद रखने की सलाह दी। उन्होंने बच्चों से यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर इन नंबरों को दोस्तों और परिजनों को भी बताएं। जिससे अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें।
इस मौके पर स्कूल के चेयरमैन योगराज नागर और निदेशक धरम सिंह नागर ने अमर उजाला की पहल की सराहना की। स्कूल की प्रधानाचार्य डॉ. श्रीजता दत्ता ने कहा कि आज के समय में बच्चों को सुरक्षा, कानून और जिम्मेदारी की शिक्षा देना उतना ही जरूरी है जितना कि किताबों का ज्ञान।
छात्रों ने पूछे सवाल, एडीसीपी ने दिए जवाब
कार्यक्रम में एडीसीपी ने छात्रों से सीधे सवाल पूछे और कहा कि आपात स्थिति में तुरंत सही नंबर डायल करना जीवन बचा सकता है। एडीसीपी ने धैर्यपूर्वक सभी सवालों का जवाब दिया और कहा कि पुलिस हर नागरिक की सुरक्षा के लिए है। उन्होंने छात्रों से ट्रैफिक नियमों का पालन करने, माता-पिता को सीट बेल्ट और हेलमेट पहनने के लिए प्रेरित करने और सड़क सुरक्षा अभियान में भाग लेने की अपील की। कार्यक्रम में मौजूद सभी बच्चों ने कहा कि पुलिस का सम्मान करेंगे। कानून का पालन करेंगे और जरूरत पड़ने पर पुलिस को अपराध रोकने में मदद करेंगे।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। पुलिस समाज में कानून व्यवस्था का पालन कराने और नागरिकों की सुरक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहती है। पुलिस को देखकर डरना नहीं चाहिए। किसी भी तरह के संकोच से बचना चाहिए। मदद हासिल करने के लिए सबसे पहले पुलिस का दरवाजा खटखटाना चाहिए। पुलिस का काम अपराध की रोकथाम और जांच करने के अलावा जरूरत पड़ने पर तुरंत सहायता पहुंचाना है।
बृहस्पतिवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर ग्रेनो वेस्ट के टेक जोन-7 मिलक लच्छी स्थित पारस पब्लिक स्कूल में आयोजित पुलिस की पाठशाला में एडीसीपी सेंट्रल नोएडा शैव्या गोयल ने ये बातें कहीं। उन्होंने स्कूली छात्रों को पुलिस की जिम्मेदारियों, हेल्पलाइन नंबरों की उपयोगिता और साइबर ठगी से बचाव के उपाय बताएं। उन्होंने कहा कि डिजिटल अरेस्ट के मामलों में ठग खुद को किसी सरकारी एजेंसी या पुलिस अधिकारी बताकर वीडियो या फोन कॉल पर डराते हैं। केस दर्ज होने की बात कहकर जांच के नाम पर तुरंत हिरासत में लेने की बात कहते हैं। साथ ही स्क्रीन पर वर्चुअल लॉक या नोटिस दिखाकर धमकाते हैं। जिसके झांसे में आकर लोग पैसे ट्रांसफर कर देते हैं। इसी तरह बैंकिंग फ्रॉड के मामलों में जालसाज फर्जी कॉल, मैसेज या लिंक भेजकर बैंक अकाउंट डिटेल्स, ओटीपी और पासवर्ड हासिल कर लेते हैं। एडीसीपी ने किसी भी परिस्थिति में बैंकिंग डिटेल्स या ओटीपी किसी को नहीं बताने को कहा। वहीं स्टॉक एक्सचेंज फ्रॉड के बारे में समझाया कि सोशल मीडिया या व्हाट्सएप ग्रुप पर निवेश के नाम पर लालच देकर ठगी की जाती है। फर्जी कंपनियां और एप की सहायता से लोगों को मुनाफे का झांसा दिया जाता है।
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उन्होंने छात्रों को किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करने की सलाह दी। साथ ही संदिग्ध कॉल व संदेश पर मिलने पर तुरंत सतर्क होने और साइबर फ्रॉड की स्थिति में 1930 नंबर या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अगर हेल्पलाइन नंबर व्यस्त मिले तो नजदीकी थाने में इसकी तत्काल सूचना दी जा सकती है। किसी भी अनजान व्यक्ति से बैंक या आधार की जानकारी साझा नहीं करें और सोशल मीडिया पर ओटीपी, पासवर्ड या निजी तस्वीरें भेजने से बचें। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि साइबर अपराधी पहले भरोसा जीतते हैं और फिर ठगी करते हैं।
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इस मौके पर स्कूल के चेयरमैन योगराज नागर और निदेशक धरम सिंह नागर ने अमर उजाला की पहल की सराहना की। स्कूल की प्रधानाचार्य डॉ. श्रीजता दत्ता ने कहा कि आज के समय में बच्चों को सुरक्षा, कानून और जिम्मेदारी की शिक्षा देना उतना ही जरूरी है जितना कि किताबों का ज्ञान।
छात्रों ने पूछे सवाल, एडीसीपी ने दिए जवाब
कार्यक्रम में एडीसीपी ने छात्रों से सीधे सवाल पूछे और कहा कि आपात स्थिति में तुरंत सही नंबर डायल करना जीवन बचा सकता है। एडीसीपी ने धैर्यपूर्वक सभी सवालों का जवाब दिया और कहा कि पुलिस हर नागरिक की सुरक्षा के लिए है। उन्होंने छात्रों से ट्रैफिक नियमों का पालन करने, माता-पिता को सीट बेल्ट और हेलमेट पहनने के लिए प्रेरित करने और सड़क सुरक्षा अभियान में भाग लेने की अपील की। कार्यक्रम में मौजूद सभी बच्चों ने कहा कि पुलिस का सम्मान करेंगे। कानून का पालन करेंगे और जरूरत पड़ने पर पुलिस को अपराध रोकने में मदद करेंगे।