{"_id":"642ef13c9f2663ad8c037824","slug":"investigation-could-not-be-completed-even-in-10-years-noida-news-c-1-gnd1002-410315-2023-04-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Noida News: 10 साल में भी पूरी नहीं हो पाई जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Noida News: 10 साल में भी पूरी नहीं हो पाई जांच
विज्ञापन
10 साल में भी पूरी नहीं हो पाई जांच
नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ लापरवाही व भ्रष्टाचार का मामला
कई जांचें काफी पुरानी, मामले में दूसरी एजेंसियों की भी चल रही जांच
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ लापरवाही, भ्रष्टाचार समेत कई मामलों की जांच पिछले 10 साल में भी पूरी नहीं हो पाई है। इसमें शासन स्तर पर 15 तो नोएडा प्राधिकरण के स्तर पर 41 जांचें हैं। एक मामला 18 साल पुराना है। कई मामलों में सीबीआई, आयकर समेत दूसरी एजेंसियां भी जांच में शामिल हैं। वहीं कई मामलों में प्राधिकरण ने वृहद दंड की संस्तुति शासन से की है। इसमें बर्खास्तगी तक करने को कहा गया है। कुछ मामलों में शासन स्तर पर भी कार्रवाई हुई है।
योगी सरकार बनने के बाद प्राधिकरण और शासन स्तर पर 46 मामलों में जांच चल रही है। इसमें प्राधिकरण स्तर पर 30 तो शासन स्तर पर 15 जांचें शामिल हैं। प्राधिकरण की ओर से जांच के बाद कुछ मामलों में शासन को जांच के लिए रेफर किया है। इसमें कुछ मामलों में प्राधिकरण ने जांच पूरी कर शासन को रिपोर्ट भेजी है, लेकिन अधिकांश मामलों में जांच चल रही है।
इस तरह के मामलों में चल रहीं जांचें
आय से अधिक संपत्ति, कार्य में लापरवाही, लीज डीड गलत पंजीकृत करने, किसी मुकदमे में जेल जाने, मुआवजे में अनियमितता, सतर्कता जांच के संबंध में, कॉल सेंटर ऑपरेटर रखे जाने में अनियमितता, वाणिज्यिक भूखंड के आवंटन में अनियमितता, प्राधिकरण के अलग-अलग मामलों में कोर्ट में प्रस्तुति में लापरवाही, अलग-अलग शिकायतें, दीवार गिरने, बिना अनुमति गायब रहने, फर्जी चेक भुगतान, सड़क पर घास उग आने, भूमिगत विद्युत केबल डालने के काम में अनियमितता, ठेके दिलाने, गलत तरीके से एनओसी देने, उत्तरदायित्व के प्रति लापरवाही, उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लिए बिना स्थानांतरण, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेश के बाद अनियमितता के जांच शामिल हैं।
विज्ञापन
यादव सिंह और उसके सहयोगियों की जांच
प्राधिकरण और शासन स्तर पर यादव सिंह और उनके साथ काम करने वाले अधिकारियों की भी जांच चल रही है। कुछ मामलों में यादव सिंह बरी हो चुके हैं। वहीं बीते जुलाई में सीबीआई ने प्राधिकरण से आठ अधिकारियों के खिलाफ केस चलाने की अनुमति मांगी थी। प्राधिकरण ने इस मामले में शासन स्तर पर बात करने को कहा था। अब शासन स्तर पर इसकी जांच चल रही है।
आम्रपाली मामले में सीईओ खुद जांच अधिकारी
आम्रपाली मामले में सीईओ खुद ही जांच अधिकारी हैं। जमीन आवंटन से लेकर बकाये की वसूली में लापरवाही की वजह से प्राधिकरणों को हुए आर्थिक नुकसान सहित अन्य मामलों में जांच चल रही है। तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ जांच कराने के बाद शासन को रिपोर्ट सौंपी जानी है। इसमें प्राधिकरण के तत्कालीन अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है।
सुपरटेक सहित तीन मामलों की जांच ओएसडी सौम्य श्रीवास्तव के पास
सुप्रीम कोर्ट की ओर से ट्विन टावर मामले में प्राधिकरण के भ्रष्टाचार की जांच के लिए यूपी सरकार से कहा गया था। यूपी शासन की ओर से प्राधिकरण को इसकी जांच सौंपी गई है। वर्तमान समय में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी सौम्य श्रीवास्तव के पास सुपरटेक मामले में आरोपियों की जांच शामिल है। इसके अलावा टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप में प्रभारी वरिष्ठ प्रबंधक एचएस खम्पा समेत दो अन्य की जांच और कार्यों में शिथिलता बरतने के आरोप में दो तत्कालीन और एक अन्य अधिकारी की जांच शामिल है।
जांच के बाद प्राधिकरण स्तर पर कई प्रकार की कार्रवाई की गई है। इसमें आरोपी का वेतन कम करने, बर्खास्तगी, निलंबन, प्रतिकूल प्रविष्टि, शासन को बर्खास्तगी की अनुशंसा आदि शामिल हैं। कई मामले काफी छोटे स्तर के हैं। हालांकि अब तक कुल 157 मामलों में प्रतिकूल प्रविष्टि की कार्रवाई हुई है।
यह मामले भी जांच के दायरे में
-गढ़ी शाहदरा में लीज बैक का मामला
-स्पोर्ट्स सिटी में गलत तरीके से बिल्डरों के प्लॉट डिवाइड करने का मामला
-गेझा सहित अन्य मामलों में फर्जी तरीके से मुआवजे का मामला
यह है प्राधिकरण और शासन का आंकड़ा
-56 मामलों की चल रही जांच
-एक साल में 19 जांचें हुईं पूरी
-तीन अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए शासन को लिखा गया
-दो अधिकारियों का वेतन रोका गया
-100 अधिकारियों-कर्मचारियों को मिली चेतावनी
-159 अधिकारियों-कर्मचारियों को मिली है प्रतिकूल प्रविष्टि
-नोएडा प्राधिकरण के विधि अधिकारी वीरेंद्र सिंह नागर को बर्खास्त करने की अनुशंसा
-सुपरटेक मामले में 24 अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज
विज्ञापन
नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ लापरवाही व भ्रष्टाचार का मामला
कई जांचें काफी पुरानी, मामले में दूसरी एजेंसियों की भी चल रही जांच
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ लापरवाही, भ्रष्टाचार समेत कई मामलों की जांच पिछले 10 साल में भी पूरी नहीं हो पाई है। इसमें शासन स्तर पर 15 तो नोएडा प्राधिकरण के स्तर पर 41 जांचें हैं। एक मामला 18 साल पुराना है। कई मामलों में सीबीआई, आयकर समेत दूसरी एजेंसियां भी जांच में शामिल हैं। वहीं कई मामलों में प्राधिकरण ने वृहद दंड की संस्तुति शासन से की है। इसमें बर्खास्तगी तक करने को कहा गया है। कुछ मामलों में शासन स्तर पर भी कार्रवाई हुई है।
योगी सरकार बनने के बाद प्राधिकरण और शासन स्तर पर 46 मामलों में जांच चल रही है। इसमें प्राधिकरण स्तर पर 30 तो शासन स्तर पर 15 जांचें शामिल हैं। प्राधिकरण की ओर से जांच के बाद कुछ मामलों में शासन को जांच के लिए रेफर किया है। इसमें कुछ मामलों में प्राधिकरण ने जांच पूरी कर शासन को रिपोर्ट भेजी है, लेकिन अधिकांश मामलों में जांच चल रही है।
विज्ञापन
इस तरह के मामलों में चल रहीं जांचें
आय से अधिक संपत्ति, कार्य में लापरवाही, लीज डीड गलत पंजीकृत करने, किसी मुकदमे में जेल जाने, मुआवजे में अनियमितता, सतर्कता जांच के संबंध में, कॉल सेंटर ऑपरेटर रखे जाने में अनियमितता, वाणिज्यिक भूखंड के आवंटन में अनियमितता, प्राधिकरण के अलग-अलग मामलों में कोर्ट में प्रस्तुति में लापरवाही, अलग-अलग शिकायतें, दीवार गिरने, बिना अनुमति गायब रहने, फर्जी चेक भुगतान, सड़क पर घास उग आने, भूमिगत विद्युत केबल डालने के काम में अनियमितता, ठेके दिलाने, गलत तरीके से एनओसी देने, उत्तरदायित्व के प्रति लापरवाही, उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लिए बिना स्थानांतरण, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेश के बाद अनियमितता के जांच शामिल हैं।
विज्ञापन
यादव सिंह और उसके सहयोगियों की जांच
प्राधिकरण और शासन स्तर पर यादव सिंह और उनके साथ काम करने वाले अधिकारियों की भी जांच चल रही है। कुछ मामलों में यादव सिंह बरी हो चुके हैं। वहीं बीते जुलाई में सीबीआई ने प्राधिकरण से आठ अधिकारियों के खिलाफ केस चलाने की अनुमति मांगी थी। प्राधिकरण ने इस मामले में शासन स्तर पर बात करने को कहा था। अब शासन स्तर पर इसकी जांच चल रही है।
आम्रपाली मामले में सीईओ खुद जांच अधिकारी
आम्रपाली मामले में सीईओ खुद ही जांच अधिकारी हैं। जमीन आवंटन से लेकर बकाये की वसूली में लापरवाही की वजह से प्राधिकरणों को हुए आर्थिक नुकसान सहित अन्य मामलों में जांच चल रही है। तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ जांच कराने के बाद शासन को रिपोर्ट सौंपी जानी है। इसमें प्राधिकरण के तत्कालीन अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है।
सुपरटेक सहित तीन मामलों की जांच ओएसडी सौम्य श्रीवास्तव के पास
सुप्रीम कोर्ट की ओर से ट्विन टावर मामले में प्राधिकरण के भ्रष्टाचार की जांच के लिए यूपी सरकार से कहा गया था। यूपी शासन की ओर से प्राधिकरण को इसकी जांच सौंपी गई है। वर्तमान समय में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी सौम्य श्रीवास्तव के पास सुपरटेक मामले में आरोपियों की जांच शामिल है। इसके अलावा टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप में प्रभारी वरिष्ठ प्रबंधक एचएस खम्पा समेत दो अन्य की जांच और कार्यों में शिथिलता बरतने के आरोप में दो तत्कालीन और एक अन्य अधिकारी की जांच शामिल है।
जांच के बाद प्राधिकरण स्तर पर कई प्रकार की कार्रवाई की गई है। इसमें आरोपी का वेतन कम करने, बर्खास्तगी, निलंबन, प्रतिकूल प्रविष्टि, शासन को बर्खास्तगी की अनुशंसा आदि शामिल हैं। कई मामले काफी छोटे स्तर के हैं। हालांकि अब तक कुल 157 मामलों में प्रतिकूल प्रविष्टि की कार्रवाई हुई है।
यह मामले भी जांच के दायरे में
-गढ़ी शाहदरा में लीज बैक का मामला
-स्पोर्ट्स सिटी में गलत तरीके से बिल्डरों के प्लॉट डिवाइड करने का मामला
-गेझा सहित अन्य मामलों में फर्जी तरीके से मुआवजे का मामला
यह है प्राधिकरण और शासन का आंकड़ा
-56 मामलों की चल रही जांच
-एक साल में 19 जांचें हुईं पूरी
-तीन अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए शासन को लिखा गया
-दो अधिकारियों का वेतन रोका गया
-100 अधिकारियों-कर्मचारियों को मिली चेतावनी
-159 अधिकारियों-कर्मचारियों को मिली है प्रतिकूल प्रविष्टि
-नोएडा प्राधिकरण के विधि अधिकारी वीरेंद्र सिंह नागर को बर्खास्त करने की अनुशंसा
-सुपरटेक मामले में 24 अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज