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शाहबेरी में बने अवैध मकान टूटेंगे

Sat, 08 Jun 2019 12:15 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 08 Jun 2019 12:15 AM IST
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Illegal make flat will crush in Shahberi
शाहबेरी में बने अवैध मकान टूटेंगे
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ग्रेटर नोएडा। शाहबेरी गांव में बने अवैध मकान जल्द टूटेंगे। इसकी रणनीति तैयार कर ली गई है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने सर्वे कर 1025 मकान व 428 दुकानें चिह्नित कर ली गई हैं। डीएम से भारी मात्रा में सुरक्षा बल शीघ्र उपलब्ध कराने को कहा गया है। शासन से भी इस पर स्वीकृति मिल चुकी है। पहले इन घरों में रहने वालों से खाली कराया जाएगा। उसके बाद ढहाया जाएगा।
बीते साल जुलाई में शाहबेरी में दो बिल्डिंग ढह गई थी, जिसमें नौ लोगों की मौत हो गई थी। जांच में सामने आया कि बिल्डिंग ढहने के पीछे सबसे बड़ी वजह खराब गुणवत्ता थी। उसके बाद बिल्डिंग बनाने वाले आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई। लेकिन शाहबेरी ऐसे तमाम लोग सक्रिय हैं, जो कृषि जमीन पर अवैध निर्माण कर रहे हैं।
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प्राधिकरण ने सर्वे कराया, जिसके तहत 1025 मकान व 428 दुकानें को बनाने वाले 271 व्यक्तियों को नोटिस जारी की, जिसमें 258 के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हुई। इसके बावजूद शाहबेरी में अवैध निर्माण रुक नहीं रहा। अब इन मकानों व दुकानों को ढहाने की तैयारी चल रही है। इन मकानों में लोग रहते हैं। सूत्र बताते हैं कि अवैध निर्माण को ढहाने के लिए शासन ने भी स्वीकृत दे दी है। प्राधिकरण अधिकारियों ने सुरक्षाबल मिलने पर कार्रवाई की बात कही है।
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दोषी अफसरों पर भी गिरेगी गाज
शाहबेरी हादसे और वहां हुए अवैध निर्माण के पीछे प्राधिकरण के अधिकारियों की लापरवाही भी सामने आई है। कमिश्नर ने अपनी जांच रिपोर्ट में इसका जिक्र भी किया है। उन दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी शीघ्र हो सकती है। प्रदेश सरकार ने प्राधिकरण से इन अफसरों की सूची मांगी है। इन दोषी अफसरों को चिह्नित करने के लिए तीन अफसरों की एक समिति बनाई गई है।
फ्लैट खरीदारों की बढ़ी मुसीबत
प्राधिकरण पुलिस व प्रशासन के साथ मिलकर अवैध मकानों को ढहाने की तैयारी कर रही है, लेकिन इसका नुकसान वहां रहने वालों को होगा। सस्ते आवास के चक्कर में जो खरीदार यहां घर खरीद लिए हैं, उनके लिए परेशानी हो जाएगी। उनको रिफंड मिल पाना भी मुश्किल है।

18 करोड़ मुआवजा भी फंसा है
शाहबेरी की जमीन का अधिग्रहण 2008-09 में हुआ था। करीब 155 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जा रही थी। मुआवजे का पैसा भी प्राधिकरण ने जिला प्रशासन को दे दिया था। जिला प्रशासन ने 18 करोड़ रुपये किसानों को बांट भी दिए थे। बाकी दिए जाने थे। इस बीच कोर्ट से जमीन का अधिग्रहण रद्द हो गया। प्राधिकरण अपना पैसा भी वापस नहीं ले सका। प्राधिकरण ने जिला प्रशासन को कई बार पत्र लिखकर पैसा वापस दिलाने को कहा, लेकिन अभी तक नहीं मिल सका है।
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