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Noida News: साढ़े 14 साल बाद पुलिस टीम पर हमले के मामले में सात आरोपी बरी
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एटा, कासगंज और आगरा के ध्यानार्थ
(अदालत से)
-जेवर में 2012 में दबिश के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमले का लगा था आरोप
-न किसी गवाह ने आरोपियों को पहचाना, न शिनाख्त परेड हुई, सभी आरोपी बरी
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। जेवर थाना क्षेत्र के गांव मेंहदीपुर में वर्ष 2012 में पुलिस टीम पर हुए हमले के मामले में अदालत ने सभी सात आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। अभियोजन के अनुसार 18 अप्रैल 2012 को कासगंज थाने में दर्ज अपहरण के मामले में वांछित सोहलीन की गिरफ्तारी के लिए उपनिरीक्षक राजेंद्र प्रसाद सारस्वत पुलिस टीम के साथ मेंहदीपुर पहुंचे थे।
दबिश के दौरान गांव के करीब 30 लोगों ने लाठी-डंडे और फरसों से लैस होकर पुलिस पर हमला किया और पकड़े गए सोहलीन को जबरन छुड़ा ले गए थे। इस पर जेवर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था। आरोपियों में अहमद सईद, भूरा, दिलशाद, शेरदीन, सन्तार, मुस्तकीम और सोहलीन शामिल थे। उन पर बलवा, जानलेवा हमला, सरकारी कार्य में बाधा और हिरासत से छुड़ाने समेत कई धाराओं में आरोप तय हुए थे। अदालत ने माना कि पुलिस टीम के मेंहदीपुर जाने की बात साबित है और गवाहों के बयानों में इस पर कोई विरोधाभास नहीं है। लेकिन हमलावर भीड़ में आरोपियों की मौजूदगी का कोई विशिष्ट साक्ष्य नहीं मिला। विवेचक ने शिनाख्त नहीं कराई और आरोपियों की गिरफ्तारी उनके सामने नहीं हुई। गवाहों के बयान से किसी को चोट पहुंचने, सरकारी संपत्ति को नुकसान या जानलेवा प्रहार की पुष्टि नहीं होती।
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(अदालत से)
-जेवर में 2012 में दबिश के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमले का लगा था आरोप
-न किसी गवाह ने आरोपियों को पहचाना, न शिनाख्त परेड हुई, सभी आरोपी बरी
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। जेवर थाना क्षेत्र के गांव मेंहदीपुर में वर्ष 2012 में पुलिस टीम पर हुए हमले के मामले में अदालत ने सभी सात आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। अभियोजन के अनुसार 18 अप्रैल 2012 को कासगंज थाने में दर्ज अपहरण के मामले में वांछित सोहलीन की गिरफ्तारी के लिए उपनिरीक्षक राजेंद्र प्रसाद सारस्वत पुलिस टीम के साथ मेंहदीपुर पहुंचे थे।
दबिश के दौरान गांव के करीब 30 लोगों ने लाठी-डंडे और फरसों से लैस होकर पुलिस पर हमला किया और पकड़े गए सोहलीन को जबरन छुड़ा ले गए थे। इस पर जेवर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था। आरोपियों में अहमद सईद, भूरा, दिलशाद, शेरदीन, सन्तार, मुस्तकीम और सोहलीन शामिल थे। उन पर बलवा, जानलेवा हमला, सरकारी कार्य में बाधा और हिरासत से छुड़ाने समेत कई धाराओं में आरोप तय हुए थे। अदालत ने माना कि पुलिस टीम के मेंहदीपुर जाने की बात साबित है और गवाहों के बयानों में इस पर कोई विरोधाभास नहीं है। लेकिन हमलावर भीड़ में आरोपियों की मौजूदगी का कोई विशिष्ट साक्ष्य नहीं मिला। विवेचक ने शिनाख्त नहीं कराई और आरोपियों की गिरफ्तारी उनके सामने नहीं हुई। गवाहों के बयान से किसी को चोट पहुंचने, सरकारी संपत्ति को नुकसान या जानलेवा प्रहार की पुष्टि नहीं होती।
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