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दिसंबर तक खत्म होगा ओखला में कूड़े का पहाड़ : केजरीवाल
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मुख्यमंत्री ने शहरी विकास मंत्री, मेयर और डिप्टी मेयर के साथ ओखला लैंडफिल साइट का किया दौरा
निगम का मई 2024 तक ओखला लैंडफिल साइट को साफ करने का है लक्ष्य
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11,000 टन से ज्यादा कचरा रोज निकलता है दिल्ली में
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। ओखला लैंडफिल साइट के आसपास रहने वाले लोगों को दिसंबर तक कूड़े के पहाड़ से निजात मिलने की उम्मीद जगी है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को दौरा कर कूड़े की प्रोसेसिंग प्रक्रिया की समीक्षा की और दिसंबर तक कूड़ा खत्म करने की बात कही। हालांकि, निगम का मई 2024 तक कूड़े को साफ करने का लक्ष्य है।
दिल्ली में रोजाना करीब 11,000 टन से ज्यादा कचरा निकलता है। एमसीडी की मानें तो इसमें से करीब 8,000 टन गीले कचरे को ओखला, तेहखंड, गाजीपुर और बवाना में स्थित वेस्ट टु एनर्जी प्लांट में भेजा जाता है। दूसरा बड़ा हिस्सा टैगोर गार्डन और द्वारका सहित दूसरे कंपोस्ट प्लांट में ले जाया जाता है। प्लास्टिक कचरा एमआरएफ प्लांट में जा रहा है। इसके बावजूद करीब 27 फीसदी कचरा अब भी तीनों लैंडफिल साइटों पर ही जमा हो रहा है। केजरीवाल के मुताबिक,
हम कोशिश करेंगे कि दिसंबर तक ओखला लैंडफिल साइट को साफ कर दें। इस साइट पर अभी 40 लाख मीट्रिक टन कूड़ा बचा है। यहां से कूड़ा खोदकर निकालने की क्षमता तो 17 हजार मीट्रिक प्रतिदिन टन है, लेकिन कूड़े को डिस्पोज करने की क्षमता अभी 4-4.5 मीट्रिक टन ही है। यहां कचरा डिस्पोज करने की क्षमता बढ़ाई जाएगी। उम्मीद है एक अप्रैल तक कूड़े को डिस्पोज करने की क्षमता 10 हजार मीट्रिक टन और एक जून तक 15 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन हो जाए। अगर प्रतिदिन 15 हजार मीट्रिक टन कूड़ा डिस्पोज किया जाता है, तो ओखला में कूड़े को दिसंबर तक साफ किया जा सकता है।
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निगम चुनाव में दी थीं 10 गारंटी
निगम चुनाव से पहले आप ने दिल्लीवालों को दस गारंटी दी थी। तीनों कूड़े के पहाड़ों को साफ करना पहली प्राथमिकता में शामिल था। इसी क्रम में केजरीवाल ने ओखला साइट का दौरा कर कूड़ा हटाने के कार्य का जायजा लिया। इस दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुतिकरण के जरिए कूड़े को खत्म करने को लेकर उठाए गए कदमों की विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर शहरी विकास मंत्री कैलाश गहलोत, मेयर डॉ. शैली ओबरॉय, डिप्टी मेयर आले इकबाल समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। योजना है कि कूड़ा साफ कर यहां सीएंडडी वेस्ट का बड़ा प्लांट व बॉयोमैथोनेशन का प्लांट लगाया जाएगा। इसी तरह गाजीपुर और भलस्वा लैंडफिल साइट पर भी काम चल रहा है। अगले-दो-तीन दिन में मुख्यमंत्री वहां का भी दौरा करेंगे।
कूड़े के पहाड़ों की मौजूदा स्थिति
- ओखला लैंडफिल
- 1996 से कूड़ा आ रहा
- क्षेत्रफल करीब 63 एकड़
- 40 लाख मीट्रिक टन कूड़ा बचा
- 2019 में बॉयो माइनिंग शुरू की गई
- 1 मार्च 2023 तक करीब 25.56 लाख मीट्रिक टन कूड़ा हटाया
- मई 2024 तक साफ करने का लक्ष्य है
गाजीपुर लैंडफिल
- 1984 से कूड़ा आ रहा
- 70 एकड़ क्षेत्रफल में फैली है साइट
- 140 लाख टन कचरा बचा
- 2019 में ऊंचाई 65 मीटर हो गई
- 2002 में यहां क्षमता से ज्यादा कूड़ा हुआ
- चार साल में 21 बार लगी आग
- अप्रैैल 2024 तक खत्म करने का लक्ष्य
भलस्वा लैंडफिल साइट
- 1994 में कूड़ा डालना शुरू किया
- 70 एकड़ में फैली
- ऊंचाई करीब 60 मीटर
- 70 लाख टन कचरा बचा
- दिसंबर तक खत्म करने का लक्ष्य
- आए दिन लगती रहती है यहां आग
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निगम का मई 2024 तक ओखला लैंडफिल साइट को साफ करने का है लक्ष्य
11,000 टन से ज्यादा कचरा रोज निकलता है दिल्ली में
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। ओखला लैंडफिल साइट के आसपास रहने वाले लोगों को दिसंबर तक कूड़े के पहाड़ से निजात मिलने की उम्मीद जगी है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को दौरा कर कूड़े की प्रोसेसिंग प्रक्रिया की समीक्षा की और दिसंबर तक कूड़ा खत्म करने की बात कही। हालांकि, निगम का मई 2024 तक कूड़े को साफ करने का लक्ष्य है।
दिल्ली में रोजाना करीब 11,000 टन से ज्यादा कचरा निकलता है। एमसीडी की मानें तो इसमें से करीब 8,000 टन गीले कचरे को ओखला, तेहखंड, गाजीपुर और बवाना में स्थित वेस्ट टु एनर्जी प्लांट में भेजा जाता है। दूसरा बड़ा हिस्सा टैगोर गार्डन और द्वारका सहित दूसरे कंपोस्ट प्लांट में ले जाया जाता है। प्लास्टिक कचरा एमआरएफ प्लांट में जा रहा है। इसके बावजूद करीब 27 फीसदी कचरा अब भी तीनों लैंडफिल साइटों पर ही जमा हो रहा है। केजरीवाल के मुताबिक,
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हम कोशिश करेंगे कि दिसंबर तक ओखला लैंडफिल साइट को साफ कर दें। इस साइट पर अभी 40 लाख मीट्रिक टन कूड़ा बचा है। यहां से कूड़ा खोदकर निकालने की क्षमता तो 17 हजार मीट्रिक प्रतिदिन टन है, लेकिन कूड़े को डिस्पोज करने की क्षमता अभी 4-4.5 मीट्रिक टन ही है। यहां कचरा डिस्पोज करने की क्षमता बढ़ाई जाएगी। उम्मीद है एक अप्रैल तक कूड़े को डिस्पोज करने की क्षमता 10 हजार मीट्रिक टन और एक जून तक 15 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन हो जाए। अगर प्रतिदिन 15 हजार मीट्रिक टन कूड़ा डिस्पोज किया जाता है, तो ओखला में कूड़े को दिसंबर तक साफ किया जा सकता है।
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निगम चुनाव में दी थीं 10 गारंटी
निगम चुनाव से पहले आप ने दिल्लीवालों को दस गारंटी दी थी। तीनों कूड़े के पहाड़ों को साफ करना पहली प्राथमिकता में शामिल था। इसी क्रम में केजरीवाल ने ओखला साइट का दौरा कर कूड़ा हटाने के कार्य का जायजा लिया। इस दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुतिकरण के जरिए कूड़े को खत्म करने को लेकर उठाए गए कदमों की विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर शहरी विकास मंत्री कैलाश गहलोत, मेयर डॉ. शैली ओबरॉय, डिप्टी मेयर आले इकबाल समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। योजना है कि कूड़ा साफ कर यहां सीएंडडी वेस्ट का बड़ा प्लांट व बॉयोमैथोनेशन का प्लांट लगाया जाएगा। इसी तरह गाजीपुर और भलस्वा लैंडफिल साइट पर भी काम चल रहा है। अगले-दो-तीन दिन में मुख्यमंत्री वहां का भी दौरा करेंगे।
कूड़े के पहाड़ों की मौजूदा स्थिति
- ओखला लैंडफिल
- 1996 से कूड़ा आ रहा
- क्षेत्रफल करीब 63 एकड़
- 40 लाख मीट्रिक टन कूड़ा बचा
- 2019 में बॉयो माइनिंग शुरू की गई
- 1 मार्च 2023 तक करीब 25.56 लाख मीट्रिक टन कूड़ा हटाया
- मई 2024 तक साफ करने का लक्ष्य है
गाजीपुर लैंडफिल
- 1984 से कूड़ा आ रहा
- 70 एकड़ क्षेत्रफल में फैली है साइट
- 140 लाख टन कचरा बचा
- 2019 में ऊंचाई 65 मीटर हो गई
- 2002 में यहां क्षमता से ज्यादा कूड़ा हुआ
- चार साल में 21 बार लगी आग
- अप्रैैल 2024 तक खत्म करने का लक्ष्य
भलस्वा लैंडफिल साइट
- 1994 में कूड़ा डालना शुरू किया
- 70 एकड़ में फैली
- ऊंचाई करीब 60 मीटर
- 70 लाख टन कचरा बचा
- दिसंबर तक खत्म करने का लक्ष्य
- आए दिन लगती रहती है यहां आग