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Noida News: कानूनी सलाह
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शानवी बानो, अधिवक्ता
घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम
- इस कानून में केवल मारपीट ही घरेलू हिंसा नहीं है। शारीरिक, यौन, मौखिक एवं भावनात्मक हिंसा के साथ आर्थिक हिंसा को भी इसके दायरे में रखा गया है। दहेज या संपत्ति की मांग को लेकर उत्पीड़न भी इसके अंतर्गत आ सकता है।
- महिला को वैवाहिक या साझा घरेलू संबंध वाले घर में रहने का अधिकार है। घर उसके नाम पर न होने की स्थिति में भी कानून के तहत उसे निवास संबंधी राहत मिल सकती है।
- पीड़ित महिला मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन देकर सुरक्षा आदेश, निवास आदेश, आर्थिक राहत, बच्चों की अंतरिम अभिरक्षा और मानसिक पीड़ा के लिए मुआवजे जैसी राहत मांग सकती है।
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- अधिनियम घरेलू संबंध में रहने वाली महिलाओं को संरक्षण देता है। इसमें पत्नी के अलावा मां, बहन, बेटी या घरेलू संबंध में रहने वाली अन्य महिला भी परिस्थितियों के अनुसार संरक्षण मांग सकती है।
- पीड़ित महिला की सहायता के लिए संरक्षण अधिकारी, पुलिस, सेवा प्रदाता और आश्रय गृह जैसी व्यवस्थाएं हैं। संरक्षण अधिकारी घरेलू घटना रिपोर्ट तैयार कराने और अदालत में राहत दिलाने की प्रक्रिया में सहायता कर सकता है।
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घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम
- इस कानून में केवल मारपीट ही घरेलू हिंसा नहीं है। शारीरिक, यौन, मौखिक एवं भावनात्मक हिंसा के साथ आर्थिक हिंसा को भी इसके दायरे में रखा गया है। दहेज या संपत्ति की मांग को लेकर उत्पीड़न भी इसके अंतर्गत आ सकता है।
- महिला को वैवाहिक या साझा घरेलू संबंध वाले घर में रहने का अधिकार है। घर उसके नाम पर न होने की स्थिति में भी कानून के तहत उसे निवास संबंधी राहत मिल सकती है।
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- पीड़ित महिला मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन देकर सुरक्षा आदेश, निवास आदेश, आर्थिक राहत, बच्चों की अंतरिम अभिरक्षा और मानसिक पीड़ा के लिए मुआवजे जैसी राहत मांग सकती है।
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- अधिनियम घरेलू संबंध में रहने वाली महिलाओं को संरक्षण देता है। इसमें पत्नी के अलावा मां, बहन, बेटी या घरेलू संबंध में रहने वाली अन्य महिला भी परिस्थितियों के अनुसार संरक्षण मांग सकती है।
- पीड़ित महिला की सहायता के लिए संरक्षण अधिकारी, पुलिस, सेवा प्रदाता और आश्रय गृह जैसी व्यवस्थाएं हैं। संरक्षण अधिकारी घरेलू घटना रिपोर्ट तैयार कराने और अदालत में राहत दिलाने की प्रक्रिया में सहायता कर सकता है।