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Noida News: फर्जी भर्ती कराई और शिक्षा विभाग को भेजा भी नोटिस, दो गिरफ्तार
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यूपी एसटीएफ ने प्रयागराज में दबोचा, जौनपुर की यूनिवर्सिटी समेत तीन मुहरें और अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर वाले दस्तावेज बरामद
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। यूपी स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की नोएडा यूनिट ने फर्जी तरीके से शिक्षकों की भर्ती कराने और शिक्षा विभाग को नोटिस भेजकर गोपनीय सूचना मांगने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। प्रयागराज के फाफामऊ के मिलन चौक शांतिपुरम निवासी आरोपी बजरंगी लाल गुप्ता और चुरियानी फतेहपुर के जयप्रकाश तिवारी लोगों को नौकरी दिलाने व बर्खास्त शिक्षकों को बहाल कराने के नाम पर वसूली भी करते थे। आरोपियों से इन तीन फर्जी मुहरें, दो मोबाइल, एक टैब और कई अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर वाले दस्तावेज बरामद हुए हैं। इसमें जौनपुर यूनिवर्सिटी की मुहर भी है। साथ ही प्रतापगढ़, भदोही, झांसी, कौशांबी में केस दर्ज हैं।
अपर पुलिस अधीक्षक राजकुमार मिश्रा ने बताया कि कौशांबी के जिला विद्यालय निरीक्षक को यूपी एसटीएफ के अधिकारी की तरफ से नोटिस भेजा गया था जिसमें कुछ शिक्षकों की गोपनीय सूचना मांगी गई थी। पत्र भेजने के बाद कुछ लोग लगातार फोन कर दबाव बना रहे थे। इस पर एसटीएफ नोएडा ने जांच शुरू की। 8 जुलाई को कुछ संदिग्धों के प्रयागराज में होने की सूचना मिली। इस पर टीम वहां पहुंची और फाफामऊ के एफ ब्लाॅक से सड़क किनारे खड़े दो लोगों को हिरासत में लेकर कौशांबी के थाना मंझनपुर लाकर पूछताछ की गई। उसके बाद गिरफ्तार किया गया।
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फर्जी प्रमाण पत्र पर शिक्षक बना था बजरंगी
अफसरों ने बताया कि बजरंगी ने 2012 में एमएड की पढ़ाई पूरी की। 2013 में कौशांबी के राजकीय हाईस्कूल पलाना कछार में शिक्षक के पद पर भर्ती हो गया। शिकायत पर जांच में बजरंगी की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के प्रमाण पत्र फर्जी मिले। शिक्षा विभाग ने उसे बर्खास्त कर दिया। उसके बाद आरोपी ने फर्जीवाड़ा शुरू किया।
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17 अभ्यर्थियों की करा दी थी नियुक्ति
अधिकारियों ने बताया कि बजरंगी ने 2016-17 की शिक्षक भर्ती में 17 अभ्यार्थियों से नौकरी लगवाने के नाम पर पैसा लिया था। फिर फर्जी तरीके से उनकी नियुक्ति करा दी। खुलासा होने पर झांसी में केस दर्ज हुआ। उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। एसटीएफ व शिक्षा निदेशालय के नाम से बीएसए और डीआईओएस को नोटिस भेजकर अवैध उगाही करने लगा। पत्र जय प्रकाश तिवारी बनाता था।
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चार शिक्षकों को बहाल कराने का कर रहा था प्रयास
अफसरों ने बताया कि जांच के बाद प्रयागराज के बीएसए ने फर्जी दस्तावेज का प्रयोग करने पर चार शिक्षक धीरेंद्र कुमार सिंह, जितेंद्र कुमार, अरविंद कुमार व मोहम्मद इदरीश की सेवा समाप्त कर दी थी। आरोपी बजरंगी लाल गुप्ता अपने साथी जय प्रकाश के साथ मिलकर चारों शिक्षकों के दस्तावेज सही देखने का प्रयास किया। इसके लिए वीर बहादुर पूर्वाचल यूनिवर्सिटी जौनपुर से कूट-रचित प्रमाण पत्र बनवा लिया। उसके आधार पर चारों शिक्षकों की बर्खास्तगी को निरस्त कराने का प्रयास कर रहा था।
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बीएसए कार्यालय में टाइपिस्ट था जय प्रकाश तिवारी
आरोपी जय प्रकाश तिवारी के पिता फतेहपुर बीएसए कार्यालय में चालक थे। उस कारण कार्यालय के बाबू राजेश तिवारी से जान पहचान हो गई। कुछ दिन बाद राजेश तिवारी टाइपिस्ट का काम करने लगा। तभी उसकी मुलाकात आरोपी बजरंगी लाल गुप्ता से हुई और दोनों साथ काम करने लगे। बजरंगी के कहने पर जय प्रकाश अध्यापकों के फर्जी दस्तावेज व कार्यालय के फर्जी नोटिस बनाकर देता था। बजरंगी इन नोटिस को संबंधित को भेजता था। साथ ही विभागीय अफसरों को एसटीएफ व अन्य अफसरों के नाम से फोन करता था।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। यूपी स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की नोएडा यूनिट ने फर्जी तरीके से शिक्षकों की भर्ती कराने और शिक्षा विभाग को नोटिस भेजकर गोपनीय सूचना मांगने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। प्रयागराज के फाफामऊ के मिलन चौक शांतिपुरम निवासी आरोपी बजरंगी लाल गुप्ता और चुरियानी फतेहपुर के जयप्रकाश तिवारी लोगों को नौकरी दिलाने व बर्खास्त शिक्षकों को बहाल कराने के नाम पर वसूली भी करते थे। आरोपियों से इन तीन फर्जी मुहरें, दो मोबाइल, एक टैब और कई अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर वाले दस्तावेज बरामद हुए हैं। इसमें जौनपुर यूनिवर्सिटी की मुहर भी है। साथ ही प्रतापगढ़, भदोही, झांसी, कौशांबी में केस दर्ज हैं।
अपर पुलिस अधीक्षक राजकुमार मिश्रा ने बताया कि कौशांबी के जिला विद्यालय निरीक्षक को यूपी एसटीएफ के अधिकारी की तरफ से नोटिस भेजा गया था जिसमें कुछ शिक्षकों की गोपनीय सूचना मांगी गई थी। पत्र भेजने के बाद कुछ लोग लगातार फोन कर दबाव बना रहे थे। इस पर एसटीएफ नोएडा ने जांच शुरू की। 8 जुलाई को कुछ संदिग्धों के प्रयागराज में होने की सूचना मिली। इस पर टीम वहां पहुंची और फाफामऊ के एफ ब्लाॅक से सड़क किनारे खड़े दो लोगों को हिरासत में लेकर कौशांबी के थाना मंझनपुर लाकर पूछताछ की गई। उसके बाद गिरफ्तार किया गया।
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फर्जी प्रमाण पत्र पर शिक्षक बना था बजरंगी
अफसरों ने बताया कि बजरंगी ने 2012 में एमएड की पढ़ाई पूरी की। 2013 में कौशांबी के राजकीय हाईस्कूल पलाना कछार में शिक्षक के पद पर भर्ती हो गया। शिकायत पर जांच में बजरंगी की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के प्रमाण पत्र फर्जी मिले। शिक्षा विभाग ने उसे बर्खास्त कर दिया। उसके बाद आरोपी ने फर्जीवाड़ा शुरू किया।
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17 अभ्यर्थियों की करा दी थी नियुक्ति
अधिकारियों ने बताया कि बजरंगी ने 2016-17 की शिक्षक भर्ती में 17 अभ्यार्थियों से नौकरी लगवाने के नाम पर पैसा लिया था। फिर फर्जी तरीके से उनकी नियुक्ति करा दी। खुलासा होने पर झांसी में केस दर्ज हुआ। उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। एसटीएफ व शिक्षा निदेशालय के नाम से बीएसए और डीआईओएस को नोटिस भेजकर अवैध उगाही करने लगा। पत्र जय प्रकाश तिवारी बनाता था।
चार शिक्षकों को बहाल कराने का कर रहा था प्रयास
अफसरों ने बताया कि जांच के बाद प्रयागराज के बीएसए ने फर्जी दस्तावेज का प्रयोग करने पर चार शिक्षक धीरेंद्र कुमार सिंह, जितेंद्र कुमार, अरविंद कुमार व मोहम्मद इदरीश की सेवा समाप्त कर दी थी। आरोपी बजरंगी लाल गुप्ता अपने साथी जय प्रकाश के साथ मिलकर चारों शिक्षकों के दस्तावेज सही देखने का प्रयास किया। इसके लिए वीर बहादुर पूर्वाचल यूनिवर्सिटी जौनपुर से कूट-रचित प्रमाण पत्र बनवा लिया। उसके आधार पर चारों शिक्षकों की बर्खास्तगी को निरस्त कराने का प्रयास कर रहा था।
बीएसए कार्यालय में टाइपिस्ट था जय प्रकाश तिवारी
आरोपी जय प्रकाश तिवारी के पिता फतेहपुर बीएसए कार्यालय में चालक थे। उस कारण कार्यालय के बाबू राजेश तिवारी से जान पहचान हो गई। कुछ दिन बाद राजेश तिवारी टाइपिस्ट का काम करने लगा। तभी उसकी मुलाकात आरोपी बजरंगी लाल गुप्ता से हुई और दोनों साथ काम करने लगे। बजरंगी के कहने पर जय प्रकाश अध्यापकों के फर्जी दस्तावेज व कार्यालय के फर्जी नोटिस बनाकर देता था। बजरंगी इन नोटिस को संबंधित को भेजता था। साथ ही विभागीय अफसरों को एसटीएफ व अन्य अफसरों के नाम से फोन करता था।