{"_id":"610bf3a48ebc3e88c11ea80d","slug":"fake-call-center-busted-in-greater-noida-used-to-cheat-foreigners-on-the-pretext-of-removing-viruses-and-bugs-from-the-computer","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"ग्रेटर नोएडा में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़: कंप्यूटर से वायरस और बग निकालने का झांसा देकर विदेशियों से करते थे ठगी, 32 गिरफ्तार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ग्रेटर नोएडा में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़: कंप्यूटर से वायरस और बग निकालने का झांसा देकर विदेशियों से करते थे ठगी, 32 गिरफ्तार
Thu, 05 Aug 2021 07:50 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, ग्रेटर नोएडा
अमर उजाला नेटवर्क, ग्रेटर नोएडा
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 05 Aug 2021 07:50 PM IST
सार
ग्रेटर नोएडा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। आरोपी कंप्यूटर से वायरस और बग निकालने का झांसा देकर विदेशियों से ठगी करते थे। पुलिस ने 32 आरोपियों को गिरफ्तार कर 55 कंप्यूटर, दो लैपटॉप, 32 मोबाइल, 20 हेडफोन समेत काफी सामान बरामद किया है।
विज्ञापन
फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
ग्रेनो वेस्ट में बिसरख कोतवाली पुलिस ने रात में संचालित हो रहे फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश कर 32 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने मौके से 55 कंप्यूटर, दो लैपटॉप, 32 मोबाइल, 20 हेडफोन आदि सामान बरामद किया है। पकड़े गए आरोपी हैकर से डाटा लेकर अमेरिका के नागरिकों को कॉल कर कंप्यूटर से वायरस व बग निकालने का झांसा देकर ठगते थे।
पकड़े गए आरोपियों में कॉल सेंटर का मैनेजर जहांगीरपुरी दिल्ली निवासी परविंद्र पाल सिंह शामिल है, लेकिन मालिक व लगभग 20 आरोपी फरार हैं। वहीं, हैकर की भी पहचान नहीं हो पाई है। आरोपी एक विदेशी नागरिक से तीन सौ से चार सौ डॉलर तक की वसूली करते थे।
एडिशनल डीसीपी अंकुर अग्रवाल और एसीपी योगेंद्र सिंह ने बताया कि बिसरख कोतवाली प्रभारी अनिता चौहान की टीम को सूचना मिली थी कि ग्रेनो वेस्ट में चेरी काउंटी सोसाइटी के पीछे रात में कुछ युवक आते हैं और सुबह होने से पहले लौट जाते हैं। पड़ताल करने पर पता चला कि अर्था स्पेशल इकोनॉमी जोन में फर्जी कॉल सेंटर चल रहा है।
विज्ञापन
पुलिस ने दबिश देकर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के पहुंचने पर आरोपी पहले उन्हें चाय-कॉफी ऑफर कर रहे थे। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि एक साल से कॉल सेंटर चल रहा है। जब अमेरिका में दिन निकलता है और देश में रात होती है तो आरोपियों की ड्यूटी शुरू होती थी।
विज्ञापन
पकड़े गए आरोपियों में कॉल सेंटर का मैनेजर जहांगीरपुरी दिल्ली निवासी परविंद्र पाल सिंह शामिल है, लेकिन मालिक व लगभग 20 आरोपी फरार हैं। वहीं, हैकर की भी पहचान नहीं हो पाई है। आरोपी एक विदेशी नागरिक से तीन सौ से चार सौ डॉलर तक की वसूली करते थे।
विज्ञापन
एडिशनल डीसीपी अंकुर अग्रवाल और एसीपी योगेंद्र सिंह ने बताया कि बिसरख कोतवाली प्रभारी अनिता चौहान की टीम को सूचना मिली थी कि ग्रेनो वेस्ट में चेरी काउंटी सोसाइटी के पीछे रात में कुछ युवक आते हैं और सुबह होने से पहले लौट जाते हैं। पड़ताल करने पर पता चला कि अर्था स्पेशल इकोनॉमी जोन में फर्जी कॉल सेंटर चल रहा है।
विज्ञापन
पुलिस ने दबिश देकर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के पहुंचने पर आरोपी पहले उन्हें चाय-कॉफी ऑफर कर रहे थे। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि एक साल से कॉल सेंटर चल रहा है। जब अमेरिका में दिन निकलता है और देश में रात होती है तो आरोपियों की ड्यूटी शुरू होती थी।
आरोपी निजी कार, दोपहिया और कैब से दिल्ली, हरियाणा, गाजियाबाद से आते थे। दो आरोपी गौतमबुद्घ नगर के रहने वाले हैं। आरोपी उपलब्ध कराये गए मोबाइल नंबरों पर कॉल कर कंप्यूटर सिस्टम में वायरस व बग आदि की समस्या की जानकारी देते हैं और इसे हल कर डॉलर वसूलते हैं।
खास बात यह है कि आरोपी एक या दो की दबाकर इस समस्या को हल कर देते थे, लेकिन इसमें काफी समय लेते थे, ताकि विदेशी को लगे कि कंपनी के प्रतिनिधि उनकी समस्या का हल करने में मेहनत कर रहे हैं।
ऐसे ठगते थे
कॉल सेंटर मालिक का सीधा संपर्क एक हैकर से है। हैकर विदेशी या फिर देश का है, इसकी जानकारी अभी पुलिस के पास नहीं है। हैकर सोशल मीडिया पर सक्रिय विदेशियों को लुभावने मैसेज, पोस्ट आदि के जरिये लिंक क्लिक करने पर विवश करते थे। जैसे ही कोई हैकर की वेबसाइट या लिंक खोलता था तो वह उसके कंप्यूटर या लैपटॉप सिस्टम में कुछ इस तरह की सेटिंग कर देते था कि वह काम नहीं करे।
इसके बाद उनका डाटा हैकर कॉल सेंटर संचालक को उपलब्ध करा देता था। फिर कॉल सेंटर के कर्मी खुद को उस कंपनी के प्रतिनिधि बताकर कॉल करते थे, जिस कंपनी का विदेशी नागरिक कंप्यूटर इस्तेमाल करता था।
खास बात यह है कि आरोपी एक या दो की दबाकर इस समस्या को हल कर देते थे, लेकिन इसमें काफी समय लेते थे, ताकि विदेशी को लगे कि कंपनी के प्रतिनिधि उनकी समस्या का हल करने में मेहनत कर रहे हैं।
ऐसे ठगते थे
कॉल सेंटर मालिक का सीधा संपर्क एक हैकर से है। हैकर विदेशी या फिर देश का है, इसकी जानकारी अभी पुलिस के पास नहीं है। हैकर सोशल मीडिया पर सक्रिय विदेशियों को लुभावने मैसेज, पोस्ट आदि के जरिये लिंक क्लिक करने पर विवश करते थे। जैसे ही कोई हैकर की वेबसाइट या लिंक खोलता था तो वह उसके कंप्यूटर या लैपटॉप सिस्टम में कुछ इस तरह की सेटिंग कर देते था कि वह काम नहीं करे।
इसके बाद उनका डाटा हैकर कॉल सेंटर संचालक को उपलब्ध करा देता था। फिर कॉल सेंटर के कर्मी खुद को उस कंपनी के प्रतिनिधि बताकर कॉल करते थे, जिस कंपनी का विदेशी नागरिक कंप्यूटर इस्तेमाल करता था।
एक लाख तक वेतन केवल अच्छी अंग्रेजी थी भर्ती की योग्यता
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि कॉल सेंटर में नौकरी लिए तकनीकी विशेषज्ञ होने की आवश्यकता नहीं थी। कॉल सेंटर में केवल उन युवकों को नौकरी मिलती थी, जो इंग्लिश स्पीकिंग में माहिर थे। इसके अलावा जिले के बाहर के युवकों की ही भर्ती की जाती थी। उन्हें अमेरिका वासियों के कंप्यूटर को ठीक करने का फॉर्मूला बता दिया जाता था।
इसे इस्तेमाल कर आरोपी सेकेंडों में कंप्यूटर लैपटॉप आदि ऑनलाइन सही कर देते थे, लेकिन डॉलर वसूलने के लिए विदेशी से लंबी बातचीत कर बताते थे कि उसने काफी प्रयास किया था। इसके लिए आरोपी युवकों को 25 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक का वेतन देते थे। कॉल सेंटर के मैनेजर को एक लाख का वेतन मिलता था। इसके अलावा सभी आरोपियों को वेतन का लगभग 50 फीसदी तक इंसेंटिव भी मिलता था।
कॉरपोरेट दफ्तरों की भरमार के कारण जिला बना पसंद
एडिशनल डीसीपी अंकुर अग्रवाल ने बताया कि ग्रेनो वेस्ट में एक साल से फर्जी कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा था। इससे पहले आरोपी दिल्ली के कोंडली में कॉल सेंटर चला रहे थे। हैकर का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। हैकर से डाटा लेने के बाद ही आरोपी अमेरिका के नागरिकों से संपर्क कर वायरस और बग निकालने का झांसा देकर ठगते थे। कंपनियों और कॉरपोरेट दफ्तरों की भरमार होने के कारण आरोपी फर्जी कॉल सेंटर चलाने के लिए जिले का रुख करते हैं, लेकिन पुलिस लगातार कार्रवाई कर आरोपियों को जेल भेज रही है।
इसे इस्तेमाल कर आरोपी सेकेंडों में कंप्यूटर लैपटॉप आदि ऑनलाइन सही कर देते थे, लेकिन डॉलर वसूलने के लिए विदेशी से लंबी बातचीत कर बताते थे कि उसने काफी प्रयास किया था। इसके लिए आरोपी युवकों को 25 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक का वेतन देते थे। कॉल सेंटर के मैनेजर को एक लाख का वेतन मिलता था। इसके अलावा सभी आरोपियों को वेतन का लगभग 50 फीसदी तक इंसेंटिव भी मिलता था।
कॉरपोरेट दफ्तरों की भरमार के कारण जिला बना पसंद
एडिशनल डीसीपी अंकुर अग्रवाल ने बताया कि ग्रेनो वेस्ट में एक साल से फर्जी कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा था। इससे पहले आरोपी दिल्ली के कोंडली में कॉल सेंटर चला रहे थे। हैकर का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। हैकर से डाटा लेने के बाद ही आरोपी अमेरिका के नागरिकों से संपर्क कर वायरस और बग निकालने का झांसा देकर ठगते थे। कंपनियों और कॉरपोरेट दफ्तरों की भरमार होने के कारण आरोपी फर्जी कॉल सेंटर चलाने के लिए जिले का रुख करते हैं, लेकिन पुलिस लगातार कार्रवाई कर आरोपियों को जेल भेज रही है।