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बच्चों को नहीं मिली किताबें
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नूंह। कोरोना काल में लंबे से समय से प्रभावित हो रही शिक्षा को देखते हुए भले ही स्कूलों को खोल दिया गया है लेकिन विद्यार्थी बिना किताबों के ही विद्यालय पहुंच रहे हैं। शिक्षा सत्र के 4 महीने बीत जाने के बाद भी विद्यार्थियों को अभी तक निशुल्क में दी जाने वाली किताबें नहीं मिल पाई हैं। सरकार ने किताबें नहीं देने पर विद्यार्थियों को राशि मुहैया कराने का वादा किया था लेकिन अभी तक न तो किताबें मिली और ना ही राशि।
कोरोना मामलों के कम होने के बाद 16 जुलाई से लगातार स्कूल खुल रहे हैं। अभिभावकों व विद्यार्थियों की मांग के बावजूद भी किताबें नहीं मिलने से पढ़ाई रुकी हुई है। देश व प्रदेश के सबसे पिछड़े जिले नूंह में वर्तमान में पहली से 12वीं कक्षा तक सरकारी स्कूलों में कुल विद्यार्थियों की संख्या 2 लाख 20 हजार है। यह प्रदेश में सबसे अधिक है। इस बार कोरोना की वजह से 40 हजार विद्यार्थियों की संख्या सरकारी स्कूलों में बढ़ी है। बीते वर्ष 1 लाख 80 हजार विद्यार्थी ही सरकारी स्कूलों में थे।
बता दें कि शिक्षा के अधिकार के अनुसार सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को पहली कक्षा से लेकर 8वीं कक्षा तक विद्यार्थियों को निशुल्क में खाना, किताब व वर्दी की सुविधा प्रदान करना है। बीते 2 वर्ष से नूंह जिले में सरकार द्वारा यह सुविधा 9 से 12वीं तक पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भी दी, लेकिन उनको भी इसका लाभ नहीं मिल रहा है। ऐसे में जिले में शिक्षा के इस अधिकार का बच्चों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिसके चलते बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह से चौपट हो रही है।
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पास हो चुके विद्यार्थियों से किताब दिलाने का किया था वादा
सरकार ने इस बार सीनियर कक्षा के विद्यार्थियों से निचली कक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को किताबें दिलाने का वादा किया था। लेकिन, सरकार द्वारा यह वादा ही रह गया। यह योजना जिले में सिरे नहीं चढ़ पाई। पहली से 12वीं तक सरकार द्वारा एससीईआरटी व एनसीईआरटी की किताबें दी जाती हैं।
किताबें खरीदने में असमर्थ हैं अभिभावक
अभिभावक रमेश, राहुल, रोबिन, इमरान ने बताया कि पहली से 8वीं तक की किताबें 800 व 9 से 12वीं तक की किताबें 1200 से अधिक रुपये में बेची जा रही हैं जोकि उनके बजट से बाहर हैं। निशुल्क किताबों के इंतजार में अभिभावकों द्वारा किताबें नहीं खरीदी गई हैं।
जिले के स्कूलों पर नजर
नूंह जिले में 99 वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल, 10 हाई स्कूल, 307 माध्यमिक व 500 प्राथमिक स्कूल हैं। इसके अलावा 5 आरोही मॉडल व 5 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय बने हुए हैं।
जल्द मिलेंगी किताबें
इस बारे में उपायुक्त शक्ति सिंह ने बताया कि जांच की जाएगी। विद्यार्थियों को किताबों का लाभ दिया जाएगा। प्रशासन शिक्षा को लेकर गंभीरता से कार्य कर रहा है।
इस बारे में जिला शिक्षा अधिकारी सुरेश गोरिया ने कहा कि इस बारे में पता कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
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कोरोना मामलों के कम होने के बाद 16 जुलाई से लगातार स्कूल खुल रहे हैं। अभिभावकों व विद्यार्थियों की मांग के बावजूद भी किताबें नहीं मिलने से पढ़ाई रुकी हुई है। देश व प्रदेश के सबसे पिछड़े जिले नूंह में वर्तमान में पहली से 12वीं कक्षा तक सरकारी स्कूलों में कुल विद्यार्थियों की संख्या 2 लाख 20 हजार है। यह प्रदेश में सबसे अधिक है। इस बार कोरोना की वजह से 40 हजार विद्यार्थियों की संख्या सरकारी स्कूलों में बढ़ी है। बीते वर्ष 1 लाख 80 हजार विद्यार्थी ही सरकारी स्कूलों में थे।
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बता दें कि शिक्षा के अधिकार के अनुसार सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को पहली कक्षा से लेकर 8वीं कक्षा तक विद्यार्थियों को निशुल्क में खाना, किताब व वर्दी की सुविधा प्रदान करना है। बीते 2 वर्ष से नूंह जिले में सरकार द्वारा यह सुविधा 9 से 12वीं तक पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भी दी, लेकिन उनको भी इसका लाभ नहीं मिल रहा है। ऐसे में जिले में शिक्षा के इस अधिकार का बच्चों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिसके चलते बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह से चौपट हो रही है।
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पास हो चुके विद्यार्थियों से किताब दिलाने का किया था वादा
सरकार ने इस बार सीनियर कक्षा के विद्यार्थियों से निचली कक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को किताबें दिलाने का वादा किया था। लेकिन, सरकार द्वारा यह वादा ही रह गया। यह योजना जिले में सिरे नहीं चढ़ पाई। पहली से 12वीं तक सरकार द्वारा एससीईआरटी व एनसीईआरटी की किताबें दी जाती हैं।
किताबें खरीदने में असमर्थ हैं अभिभावक
अभिभावक रमेश, राहुल, रोबिन, इमरान ने बताया कि पहली से 8वीं तक की किताबें 800 व 9 से 12वीं तक की किताबें 1200 से अधिक रुपये में बेची जा रही हैं जोकि उनके बजट से बाहर हैं। निशुल्क किताबों के इंतजार में अभिभावकों द्वारा किताबें नहीं खरीदी गई हैं।
जिले के स्कूलों पर नजर
नूंह जिले में 99 वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल, 10 हाई स्कूल, 307 माध्यमिक व 500 प्राथमिक स्कूल हैं। इसके अलावा 5 आरोही मॉडल व 5 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय बने हुए हैं।
जल्द मिलेंगी किताबें
इस बारे में उपायुक्त शक्ति सिंह ने बताया कि जांच की जाएगी। विद्यार्थियों को किताबों का लाभ दिया जाएगा। प्रशासन शिक्षा को लेकर गंभीरता से कार्य कर रहा है।
इस बारे में जिला शिक्षा अधिकारी सुरेश गोरिया ने कहा कि इस बारे में पता कर उचित कार्रवाई की जाएगी।