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Noida News: चेक बाउंस मामले में आरोपी को मिली जमानत
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(अदालत से)
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सत्र न्यायाधीश की अदालत ने चेक बाउंस मामले में लंबे समय से सुनवाई से गायब चल रहे आरोपी अमित कुमार को शर्तों के साथ जमानत दी है। थाना कासना क्षेत्र से जुड़े इस मामले में अमित कुमार के खिलाफ परिवाद एनआई एक्ट के तहत दर्ज है।
आरोपी की ओर से अधिवक्ता ने कहा कि आरोपी 7 अगस्त 2025 को पीलिया की गंभीर बीमारी के कारण अदालत में उपस्थित नहीं हो सका था। जिसके चलते विचारण न्यायालय ने उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) व कुर्की-जब्ती (एनएस) जारी करने के आदेश पारित किए थे। 25 जून को विचारण न्यायालय ने बल न दिए जाने के कारण उसकी जमानत प्रार्थना-पत्र खारिज कर दिया था। 31 अगस्त 2026 को थाना पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उसे वारंट बनाकर जिला कारागार भेज दिया गया था। तभी से वह जेल में निरुद्ध है। अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपी ने विचारण न्यायालय से पूर्व में मिली जमानत की शर्तों का दुरुपयोग किया और जानबूझकर सुनवाई में देरी करने की नीयत से अदालत में हाजिर नहीं हो रहा था, यही देखते हुए निचली अदालत ने उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। दोनों पक्षों की बहस सुनने और पत्रावली के अवलोकन के बाद न्यायालय ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना जमानत के लिए पर्याप्त आधार मानते हुए अर्जी स्वीकार कर ली।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सत्र न्यायाधीश की अदालत ने चेक बाउंस मामले में लंबे समय से सुनवाई से गायब चल रहे आरोपी अमित कुमार को शर्तों के साथ जमानत दी है। थाना कासना क्षेत्र से जुड़े इस मामले में अमित कुमार के खिलाफ परिवाद एनआई एक्ट के तहत दर्ज है।
आरोपी की ओर से अधिवक्ता ने कहा कि आरोपी 7 अगस्त 2025 को पीलिया की गंभीर बीमारी के कारण अदालत में उपस्थित नहीं हो सका था। जिसके चलते विचारण न्यायालय ने उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) व कुर्की-जब्ती (एनएस) जारी करने के आदेश पारित किए थे। 25 जून को विचारण न्यायालय ने बल न दिए जाने के कारण उसकी जमानत प्रार्थना-पत्र खारिज कर दिया था। 31 अगस्त 2026 को थाना पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उसे वारंट बनाकर जिला कारागार भेज दिया गया था। तभी से वह जेल में निरुद्ध है। अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपी ने विचारण न्यायालय से पूर्व में मिली जमानत की शर्तों का दुरुपयोग किया और जानबूझकर सुनवाई में देरी करने की नीयत से अदालत में हाजिर नहीं हो रहा था, यही देखते हुए निचली अदालत ने उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। दोनों पक्षों की बहस सुनने और पत्रावली के अवलोकन के बाद न्यायालय ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना जमानत के लिए पर्याप्त आधार मानते हुए अर्जी स्वीकार कर ली।
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