डीपीएस रैगिंग मामला : राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने चार हफ्ते में मांगा जवाब
- उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, गौतमबुद्धनगर के डीएम व एसएसपी को भेजा नोटिस
- नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का दिया हवाला
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डीपीएस हॉस्टल में 11वीं के छात्र से हुई रैगिंग की घटना को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने गंभीरता से लिया है। एनएचआरसी ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, डीएम और एसएसपी गौतमबुद्ध नगर को नोटिस भेजा है। तीनों अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर जवाब तैयार कर आयोग के समक्ष पेश होना है।
नोटिस में रैगिंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेशों का भी हवाला दिया गया है। अगर किसी स्कूल या कॉलेज में रैगिंग हो उसका जिम्मेदार स्कूल-कॉलेज प्रशासन होगा। इनकी प्रत्येक छात्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि डीपीएस प्रशासन ने रैगिंग की 5 को हुई पहली घटना के बाद कार्रवाई नहीं की और पीड़ित छात्र को प्राथमिक उपचार के बाद स्कूल न आने के बजाय घर पर ही रहने को बोला। 9 मई को उसी छात्र से दोबारा रैगिंग की गई। घटना की रिपोर्ट न दर्ज कराने के लिए पीड़ित छात्र के परिजनों को स्कूल प्रशासन ने रोका भी था।
डीपीएस प्रकरण में डीएम ने एसएसपी को लिखा पत्र
डीपीएस में रैगिंग को लेकर जिलाधिकारी एनपी सिंह ने एसएसपी को पत्र लिखकर मामले की जांच जल्द पूरी करने को कहा है। जिलाधिकारी ने कहा है कि जांच में इस बात का भी खुलासा होना चाहिए, घटना मारपीट है या फिर रैगिंग।
उन्होंने कहा कि यदि मारपीट की घटना है तो पुलिस अपनी कार्रवाई करे और यदि रैगिंग का मामला आता है तो रिपोर्ट उन्हें दी जाए, ताकि वह स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई कर सकें। वहीं, उन्होंने सिटी मजिस्ट्रेट और सभी उप जिलाधिकारियों को निर्देशित किया है कि वह अपने-अपने क्षेत्र के स्कूल-कॉलेज में एंटी रैगिंग कमेटी की जांच करें। जिन संस्थानों में यह कमेटी गठित न हो, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का नोटिस अभी नहीं मिला है। आयोग जो भी जानकारी मांगेगा, दी जाएगी। फिलहाल, इस संबंध में स्कूल की तरफ से छह आरोपी छात्रों को सस्पेंड कर दिया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। -एनपी सिंह, जिलाधिकारी