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Noida News: क्रिप्टो करेंसी की धोखाधड़ी में शामिल चार इन्फ्लुएंसर की एनसीआर में तलाश
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(नोटः खबर आगरा के ध्यानार्थ)
-एएसटी कॉइन डॉट बिज के नाम पर 1500 से अधिक लोगों से 500 करोड़ रुपये की ठगी का मामला
-साइबर क्राइम थाना आगरा पुलिस द्वारा क्रिप्टो में लालच देकर ठगी करने वाले दो मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी का मामला
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। क्रिप्टो करेंसी में सात गुना मुनाफे का सपना दिखाकर देशभर के निवेशकों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह जेपी ग्रीन्स और ग्रेटर नोएडा वेस्ट की आरजी लग्जरी सोसायटी में रह रहे थे। ठगी नेटवर्क में चार प्रमुख प्रचारक और रिकवरी एजेंट भी शामिल थे। जो खुद को क्रिप्टो इन्फ्लुएंसर बताकर लोगों को जाल में फंसाते थे। आगरा पुलिस इनकी तलाश ग्रेटर नोएडा सहित पूरे एनसीआर में कर रही है।
आगरा साइबर थाना पुलिस ने एएसटीकॉइन डॉट बिज (ASTCOIN.BIZ) नाम की फर्जी क्रिप्टो वेबसाइट बनाकर करीब 1500 से अधिक लोगों से 500 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी के मामले में गिरोह के दो मास्टरमाइंड विनोद कुमार निवासी बागपत और विनय कुमार (निवासी लखनऊ) को ग्रेटर नोएडा से गिरफ्तार किया था। ठग निवेशकों को फर्जी बैलेंस, बढ़ता हुआ मुनाफा और काल्पनिक ई-वॉलेट दिखाते थे। निवेशकों को यह भरोसा दिलाया जाता था कि उनकी रकम कुछ ही दिनों में कई गुना हो जाएगी। इस ठगी नेटवर्क में चार प्रमुख प्रचारक और रिकवरी एजेंट भी शामिल थे, जो खुद को क्रिप्टो इन्फ्लुएंसर बताकर लोगों को जाल में फंसाते थे। इनकी पहचान नरेंद्र कुमार सिसोदिया, शुभम सिसौदिया, गोपाल और सचिन स्वामी के रूप में हुई है। यह चारों नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली एनसीआर में बड़े होटलों और सभागारों में सेमिनार आयोजित कराते थे। सेमिनार में महंगी गाड़ियां, लग्जरी लाइफस्टाइल और करोड़ों की कमाई के सपने दिखाकर लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया जाता था। गिरोह के चार सदस्यों के फिलहाल नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली के आसपास के जिलों में छिपे होने की आशंका हैं।
ऐसे रचा गया ठगी का जालः
आगरा साइबर क्राइम थाने पुलिस के अनुसार गिरोह ने पहले एक फर्जी ईमेल आईडी astcoinbiz@ gmail.com बनाई और फिर नोएडा की एक आईटी कंपनी से संपर्क कर ASTCOIN.BIZ नाम की वेबसाइट बनाई थी। इसके बाद लिक्विड वेब कंपनी से सर्वर लिया था। जिसका यूजरनेम ASTSWAP रखा गया था। सर्वर पर पूरा नियंत्रण होने के कारण आरोपी मनमाने तरीके से मुनाफे के आंकड़े दिखा सकते थे। निवेशकों से प्रति व्यक्ति लगभग 8,500 रुपये में आईडी बनवाई जाती थी। जैसे-जैसे वह और लोगों को जोड़ते उनके अकाउंट में मुनाफा बढ़ता हुआ दिखाया जाता था। कुछ समय बाद अचानक वेबसाइट पर निकासी (विदड्रॉल) की सुविधा बंद कर दी जाती और सारा पैसा विभिन्न बैंक खातों, क्रिप्टो वॉलेट और थर्ड पार्टी अकाउंट्स में ट्रांसफर कर लिया जाता।
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दुबई तक फैला है ठगी का नेटवर्कः ठगी की रकम का बड़ा हिस्सा दुबई में रियल एस्टेट और क्रिप्टो करेंसी में निवेश किया गया था। आरोपियों के पास से दुबई का सिम कार्ड, लैपटॉप, तीन मोबाइल और दो फर्जी आधार कार्ड बरामद किए गए हैं। विनोद पर बागपत में गैंगस्टर एक्ट समेत कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। वह दुबई में करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी खरीद चुका है। पुलिस उसके डिजिटल खातों और विदेश मंत्रालय की मदद से दुबई में निवेश की गई संपत्तियों की जानकारी जुटा रही है। वर्ष 2019 में ग्रेटर नोएडा में पढ़ाई और नौकरी के दौरान दोनों की मुलाकात हुई और यहीं से फर्जी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म बनाने की योजना बनी।
500 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की आशंकाः पुलिस के मुताबिक मेरठ, बागपत, आगरा, अलीगढ़, नोएडा, गाजियाबाद के अलावा उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश तक इस गिरोह ने लोगों को शिकार बनाया। करीब 1500 से अधिक लोग सीधे तौर पर इस नेटवर्क से जुड़े थे, जबकि रैफरल सिस्टम के जरिये 3000 से ज्यादा निवेशकों से संपर्क हुआ। अनुमान है कि कुल ठगी की रकम 500 करोड़ रुपये से अधिक की है।
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(नोटः खबर आगरा के ध्यानार्थ)
-एएसटी कॉइन डॉट बिज के नाम पर 1500 से अधिक लोगों से 500 करोड़ रुपये की ठगी का मामला
-साइबर क्राइम थाना आगरा पुलिस द्वारा क्रिप्टो में लालच देकर ठगी करने वाले दो मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी का मामला
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। क्रिप्टो करेंसी में सात गुना मुनाफे का सपना दिखाकर देशभर के निवेशकों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह जेपी ग्रीन्स और ग्रेटर नोएडा वेस्ट की आरजी लग्जरी सोसायटी में रह रहे थे। ठगी नेटवर्क में चार प्रमुख प्रचारक और रिकवरी एजेंट भी शामिल थे। जो खुद को क्रिप्टो इन्फ्लुएंसर बताकर लोगों को जाल में फंसाते थे। आगरा पुलिस इनकी तलाश ग्रेटर नोएडा सहित पूरे एनसीआर में कर रही है।
आगरा साइबर थाना पुलिस ने एएसटीकॉइन डॉट बिज (ASTCOIN.BIZ) नाम की फर्जी क्रिप्टो वेबसाइट बनाकर करीब 1500 से अधिक लोगों से 500 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी के मामले में गिरोह के दो मास्टरमाइंड विनोद कुमार निवासी बागपत और विनय कुमार (निवासी लखनऊ) को ग्रेटर नोएडा से गिरफ्तार किया था। ठग निवेशकों को फर्जी बैलेंस, बढ़ता हुआ मुनाफा और काल्पनिक ई-वॉलेट दिखाते थे। निवेशकों को यह भरोसा दिलाया जाता था कि उनकी रकम कुछ ही दिनों में कई गुना हो जाएगी। इस ठगी नेटवर्क में चार प्रमुख प्रचारक और रिकवरी एजेंट भी शामिल थे, जो खुद को क्रिप्टो इन्फ्लुएंसर बताकर लोगों को जाल में फंसाते थे। इनकी पहचान नरेंद्र कुमार सिसोदिया, शुभम सिसौदिया, गोपाल और सचिन स्वामी के रूप में हुई है। यह चारों नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली एनसीआर में बड़े होटलों और सभागारों में सेमिनार आयोजित कराते थे। सेमिनार में महंगी गाड़ियां, लग्जरी लाइफस्टाइल और करोड़ों की कमाई के सपने दिखाकर लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया जाता था। गिरोह के चार सदस्यों के फिलहाल नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली के आसपास के जिलों में छिपे होने की आशंका हैं।
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ऐसे रचा गया ठगी का जालः
आगरा साइबर क्राइम थाने पुलिस के अनुसार गिरोह ने पहले एक फर्जी ईमेल आईडी astcoinbiz
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दुबई तक फैला है ठगी का नेटवर्कः ठगी की रकम का बड़ा हिस्सा दुबई में रियल एस्टेट और क्रिप्टो करेंसी में निवेश किया गया था। आरोपियों के पास से दुबई का सिम कार्ड, लैपटॉप, तीन मोबाइल और दो फर्जी आधार कार्ड बरामद किए गए हैं। विनोद पर बागपत में गैंगस्टर एक्ट समेत कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। वह दुबई में करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी खरीद चुका है। पुलिस उसके डिजिटल खातों और विदेश मंत्रालय की मदद से दुबई में निवेश की गई संपत्तियों की जानकारी जुटा रही है। वर्ष 2019 में ग्रेटर नोएडा में पढ़ाई और नौकरी के दौरान दोनों की मुलाकात हुई और यहीं से फर्जी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म बनाने की योजना बनी।
500 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की आशंकाः पुलिस के मुताबिक मेरठ, बागपत, आगरा, अलीगढ़, नोएडा, गाजियाबाद के अलावा उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश तक इस गिरोह ने लोगों को शिकार बनाया। करीब 1500 से अधिक लोग सीधे तौर पर इस नेटवर्क से जुड़े थे, जबकि रैफरल सिस्टम के जरिये 3000 से ज्यादा निवेशकों से संपर्क हुआ। अनुमान है कि कुल ठगी की रकम 500 करोड़ रुपये से अधिक की है।