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बाइक बोट फर्जीवाड़ाः जांच लखनऊ ईओडब्ल्यू भेजने की तैयारी पर सवाल
Tue, 04 Feb 2020 02:20 AM IST
नोएडा ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, ग्रेटर नोएडा
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Published by: नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 04 Feb 2020 02:20 AM IST
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2800 करोड़ के बाइक बोट फर्जीवाड़े की जांच लखनऊ आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) भेजे जाने की तैयारी से निवेशक नाखुश नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि धोखाधड़ी गौतमबुद्ध नगर में हुई है। यहां भी पुलिस कमिश्नरी प्रणाली लागू हो चुकी है और नोएडा आर्थिक अपराध शाखा (एनईओडब्ल्यू) इसकी जांच कर रही है। बावजूद इसके, लखनऊ जांच क्यों भेजी जा रही है? करीब 500 किमी दूर जांच जाने से निवेशकों को परेशानी होगी। हालांकि, अधिवक्ताओं का कहना है कि लखनऊ जांच स्थानांतरित होने से इस केस में और भी तथ्य जुटाए जा सकते हैं।
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गर्वित इनोवेटिव प्रमोटर्स लिमिटेड (बाइक बोट) का मुख्य दफ्तर दादरी के कोट गांव स्थित है। इस फर्जीवाड़े का पहला केस जयपुर के सुनील मीणा ने फरवरी 2019 में दादरी कोतवाली में दर्ज कराया था। इसके बाद दादरी कोतवाली में एक के बाद एक लगभग 50 एफआईआर दर्ज की गईं।
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मामले में 10 आरोपी जेल भेज दिए गए। कई मामलों में पुलिस आरोपियों पर चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। गौतमबुद्ध नगर पुलिस की सिफारिश पर यूपी सरकार ने इस मामले की जांच सीबीआई को भेजने के लिए मंजूरी देकर केंद्र सरकार को पत्र भेज दिया है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए 10 माह से दादरी स्थित बाइक बोट के दफ्तर पर निवेशक धरना दे रहे हैं। कई पीड़ित अभी भी गौतमबुद्ध नगर में बयान व केस दर्ज कराने के लिए भटक रहे हैं। ऐसे में लखनऊ से पत्र मिलने के बाद गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने फर्जीवाड़े की जांच लखनऊ ईओडब्ल्यू भेजने की तैयारी शुरू कर दी है।
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कर्ज में डूबे निवेशक कैसे वहन करेंगे खर्च
बाइक बोट फर्जीवाड़े के कई पीड़ित कर्ज में डूबे हुए हैं। उन्होंने कर्ज लेकर कंपनी में लगा दिया। अब उनके सामने आर्थिक संकट है। बाइक बोट दफ्तर पर बैठे निवेशकों का कहना है कि ऐसे में पीड़ित लखनऊ जाने आने का खर्च कैसे वहन करेंगे।
कोई भी यूनिट कर सकती है जांच
पुलिस सूत्रों का कहना है कि बाइक बोट की जांच के लिए डीजीपी कार्यालय से पत्र मिला है। जांच गौतमबुद्ध नगर से स्थानांतरण होने के बाद लखनऊ मुख्यालय के आदेश से प्रदेश की किसी भी यूनिट में भेजी जा सकती है।
जांच कहीं भी हो, बयान यही दर्ज हों
देश के लाखों निवेशकों से अरबों रुपये की धोखाधड़ी गौतमबुद्ध नगर में हुई है। हम आठ माह से बाइक बोट के दफ्तर पर धरना देकर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। फर्जीवाड़े की जांच कहीं भी हो, लेकिन जांच टीम को बयान व पूछताछ के लिए गौतमबुद्ध नगर ही आना होगा। निवेशक लखनऊ या कहीं और नहीं जाएंगे। इस मांग को लेकर आलाधिकारियों से मुलाकात करेंगे।
-मुन्ना फौजी, धरनारत निवेशक
संगठन नाखुश, पुलिस आयुक्त से मिलेंगे
फर्जीवाड़ा गौतमबुद्ध नगर में हुआ है। अब तक जांच भी यहीं हुई है। केस भी गौतमबुद्ध नगर अदालत में चल रहा है। ऐसे में जांच लखनऊ भेजे जाने की जानकारी से हमारा संगठन नाखुश है। इस संबंध में हम जल्द पुलिस आयुक्त से मिलेंगे।
-मिथलेश गिरी, महामंत्री-आल इंडिया एमएलएम विक्टिम हेल्प आर्गनाइजेशन
पहला शिकायतकर्ता बोला...
पूरे प्रकरण की जांच अब तक गौतमबुद्ध नगर में हुई है। मैं राजस्थान का रहने वाला है। केस के सिलसिले में अक्सर गौतमबुद्ध नगर आता हूं। अगर जांच लखनऊ गई तो मुझे वहां भी जाना होगा। ऐसे ही अन्य निवेशकों को भी परेशानी होगी। जांच गौतमबुद्ध नगर में ही रहे।
-संजय मीणा, (पहला केस दर्ज कराने वाले निवेशक)
अन्य साक्ष्य भी जुटा सकती है लखनऊ ईओडब्ल्यू
बाइक बोट फर्जीवाड़े के दादरी कोतवाली में 56 केस दर्ज हैं। इनमें 28 केस में गौतमबुद्ध नगर पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। राज्य सरकार को अधिकार है कि वह केस प्रदेश में किसी भी जांच एजेंसी से करा सकती है। अगर लखनऊ ईओडब्ल्यू जांच करेगी तो वह अन्य साक्ष्य आदि जुटाकर अपनी रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करेगी। अगर निवेशकों को कोई परेशानी है तो वह सरकार के सामने अपनी बात रख सकते हैं।
-भूपेंद्र कुमार शर्मा, अधिवक्ता
-जांच लखनऊ ईओडब्ल्यू भेजने के लिए वहीं से पत्र मिला है। वहां जांच भेजी जानी प्रस्तावित है, भेजी नहीं गई है। इस संबंध में अंतिम निर्णय पुलिस आयुक्त लेंगे।
-श्रीपर्णा गांगुली, अपर पुलिस आयुक्त