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Noida News: संक्रमण ठीक होने के बाद भी नहीं छूट रही खांसी, प्रदूषण से बढ़ रही परेशानी

Thu, 29 Oct 2026 05:52 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 29 Oct 2026 05:52 PM IST
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Cough persists even after recovery from infection; pollution exacerbates the problem
हर खांसी में एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं, लंबे समय तक लक्षण बने रहने पर डॉक्टर से कराएं जांच
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संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। मौसम में बदलाव और बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण संक्रमण ठीक होने के बाद भी लोगों को लंबे समय तक खांसी की परेशानी हो रही है। बुखार, जुकाम और गले में खराश जैसे लक्षण दूर होने के बावजूद खांसी बनी रह सकती है। ऐसे में कई लोग खुद से एंटीबायोटिक दवाएं लेने लगते हैं, जबकि हर तरह की खांसी में इन दवाओं की जरूरत नहीं होती। जिला अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, लगातार खांसी रहने पर उसके कारण का पता लगाना जरूरी है।

संक्रमण के बाद श्वास नलियों में कुछ समय तक संवेदनशीलता बनी रह सकती है। वायु प्रदूषण, धूल, धुआं और एलर्जी भी खांसी को बढ़ा सकते हैं। कुछ मामलों में दमा या सांस से जुड़ी दूसरी बीमारियों के कारण भी लंबे समय तक खांसी बनी रहती है। खासकर प्रदूषण बढ़ने पर ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करना परेशानी बढ़ा सकता है। वायरल संक्रमण या प्रदूषण के कारण होने वाली खांसी में एंटीबायोटिक दवाएं असरदार नहीं होती हैं। इनका बिना जरूरत इस्तेमाल करने से बैक्टीरिया पर दवाओं का असर कम होने का खतरा बढ़ता है। इसलिए खांसी लंबे समय तक बनी रहने पर डॉक्टर की सलाह से ही दवा लेनी चाहिए।
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बच्चों में खांसी की समस्या
जिला अस्पताल में तैनात बाल रोग विशेषज्ञ ललित के अनुसार, रोजाना 100 से ज्यादा बच्चे सर्दी, खांसी और जुकाम की समस्या लेकर आ रहे हैं। कुछ मामलों में आराम न मिलने का कारण शहर में हवा में घुल रहा प्रदूषण है। इससे कई दिनों तक खांसी नहीं जा रही होती है।
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प्रदूषण और संक्रमण का प्रभाव
जिला अस्पताल के इमरजेंसी के इंचार्ज असद के अनुसार, संक्रमण ठीक होने के बाद भी कई सप्ताह तक खांसी बने रहने की वजह वायुमार्ग में सूजन और संवेदनशीलता हो सकती है। इन दिनों 120 से ज्यादा मरीज सांस में दिक्कत की परेशानी लेकर आ रहे हैं। वायरल संक्रमण के बाद सांस की नलियों को सामान्य होने में समय लगता है। इससे धूल, धुआं, ठंडी हवा और प्रदूषण के संपर्क में आने पर खांसी बढ़ सकती है। नोएडा-एनसीआर में बढ़ता वायु प्रदूषण, खासकर पीएम 2.5 के सूक्ष्म कण, वायुमार्ग में जलन बढ़ाकर पहले से मौजूद सांस संबंधी समस्याओं को गंभीर कर सकते हैं।


कब लें डॉक्टर की सलाह और बचाव
लगातार खांसी एलर्जी, अस्थमा, नाक से गले में स्राव गिरने, एसिड रिफ्लक्स या टीबी जैसी बीमारियों का संकेत भी हो सकती है। यदि खांसी दो से तीन सप्ताह तक बनी रहती है, तो डॉक्टर मरीज के लक्षणों के आधार पर छाती का एक्सरे, बलगम की जांच, टीबी की जांच या फेफड़ों की कार्यक्षमता की जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। खांसी के साथ खून आना, सांस फूलना, सीने में दर्द, लगातार बुखार या वजन कम होना जैसे लक्षण नजरअंदाज नहीं करने चाहिए। मरीजों को बिना डॉक्टर की सलाह एंटीबायोटिक लेने से बचना चाहिए। प्रदूषण अधिक होने पर बाहर व्यायाम करने से बचना चाहिए, जरूरत पड़ने पर एन-95 मास्क पहनना चाहिए और पर्याप्त पानी पीना चाहिए।

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