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चिंताजनक: पक्षी विहार में दूषित पानी से बीमार हो रहे हैं परिंदे, घट रही मेहमान पक्षियों की संख्या, पानी में मिले घातक रसायन
Sun, 09 Jan 2022 09:03 AM IST
शाहरुख खान
ओम सेठी, अमर उजाला, नोएडा
ओम सेठी, अमर उजाला, नोएडा
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 09 Jan 2022 09:03 AM IST
सार
ओखला पक्षी विहार में प्रदूषण से मेहमान परिंदे भी बीमार हो रहे हैं। यही कारण है कि लगातार इनकी संख्या में गिरावट दर्ज की जा रही है।पक्षी विहार में कार्यरत एसआई कौशिक ने बताया कि सारा पानी यमुना नदी का है। यमुना काफी प्रदूषित हो गई हैं।
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पक्षी विहार में दूषित पानी से बीमार हो रहे हैं परिंदे
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ओखला पक्षी विहार में बह रहा पानी पक्षियों के लिए जानलेवा हो सकता है। वन विभाग ने पिछले दिनों पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए लैब में एक नमूना भेजा था। इसकी रिपोर्ट चिंताजनक स्थिति बयान करती है।
इस पानी में हानिकारक तत्व, केमिकल, धातु, तेल व ग्रीस की उपस्थिति दर्ज की गई है। विहार में प्रदूषण से मेहमान परिंदे भी बीमार हो रहे हैं। यही कारण है कि लगातार इनकी संख्या में गिरावट दर्ज की जा रही है।
पक्षी विहार में कार्यरत एसआई कौशिक ने बताया कि सारा पानी यमुना नदी का है। यमुना काफी प्रदूषित हो गई हैं। यहां के पानी में मिलने वाले माइक्रो और माइनर एलिमेंट्स दोनों की स्थिति चिंताजनक है। जांच में रिपोर्ट में भी पानी को प्रदूषित बताया गया है। इसमें हानिकारक तत्व, केमिकल, धातु, तेल व ग्रीस की उपस्थिति दर्ज की गई है।
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इससे पक्षियों पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, अधिकारियों ने इस बात का खुलासा नहीं किया कि जांच रिपोर्ट में कितने मिलीग्राम ग्रीस और तेल पाया गया है। पिछली बार मार्च 2020 में यहां के पानी की जांच की गई थी। तब एक लीटर पानी में 4 मिलीग्राम प्रति लीटर तेल और ग्रीस पाई गई थी। जबकि पानी में तेल और ग्रीस की मात्रा का सही पैमाना 0.1 मिलीग्राम प्रति लीटर होता है।
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इस पानी में हानिकारक तत्व, केमिकल, धातु, तेल व ग्रीस की उपस्थिति दर्ज की गई है। विहार में प्रदूषण से मेहमान परिंदे भी बीमार हो रहे हैं। यही कारण है कि लगातार इनकी संख्या में गिरावट दर्ज की जा रही है।
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पक्षी विहार में कार्यरत एसआई कौशिक ने बताया कि सारा पानी यमुना नदी का है। यमुना काफी प्रदूषित हो गई हैं। यहां के पानी में मिलने वाले माइक्रो और माइनर एलिमेंट्स दोनों की स्थिति चिंताजनक है। जांच में रिपोर्ट में भी पानी को प्रदूषित बताया गया है। इसमें हानिकारक तत्व, केमिकल, धातु, तेल व ग्रीस की उपस्थिति दर्ज की गई है।
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इससे पक्षियों पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, अधिकारियों ने इस बात का खुलासा नहीं किया कि जांच रिपोर्ट में कितने मिलीग्राम ग्रीस और तेल पाया गया है। पिछली बार मार्च 2020 में यहां के पानी की जांच की गई थी। तब एक लीटर पानी में 4 मिलीग्राम प्रति लीटर तेल और ग्रीस पाई गई थी। जबकि पानी में तेल और ग्रीस की मात्रा का सही पैमाना 0.1 मिलीग्राम प्रति लीटर होता है।
पर्यावरणविद् सुमन के अनुसार इस बार यह आंकड़ा अधिक हो सकता है, इसलिए अधिकारी जानकारी नहीं दे रहे हैं। मामले में बर्ड वॉचर आनंद आर्य ने बताया कि पक्षी विहार का पानी बहुत ही खराब है। इससे पक्षियों की मौत हो सकती है।
पानी में मिलने वाले ग्रीस, कूड़े से निकलने वाली गैस आदि जहरीले तत्व पक्षियों की उम्र को तीन से पांच साल तक कम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यहां का पानी बदबूदार और गंदगी से भरा है।
इस कारण यहां आने वाले पक्षियों की संख्या भी कम हो रही है। बर्ड वॉचर अतुल ने बताया कि प्रदूषित पानी पक्षियों के लिए जानलेवा है। पानी में तेल, ग्रीस, प्लास्टिक, कूड़ा, तांबा, शीशा, सोडियम पारा पक्षियों ही नहीं इंसानों की जिंदगी को भी खतरे में डाल सकता है। उन्होंने बताया कि पक्षी विहार के पानी में ऑक्सीजन का स्तर लगातार कम हो रहा है।
आंकड़ों पर नजर
साल पक्षी प्रजातियां
2018 11622 63
2019 12212 63
2020 8776 62
2021 8068 73
2022 9243 47
पानी में मिलने वाले ग्रीस, कूड़े से निकलने वाली गैस आदि जहरीले तत्व पक्षियों की उम्र को तीन से पांच साल तक कम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यहां का पानी बदबूदार और गंदगी से भरा है।
इस कारण यहां आने वाले पक्षियों की संख्या भी कम हो रही है। बर्ड वॉचर अतुल ने बताया कि प्रदूषित पानी पक्षियों के लिए जानलेवा है। पानी में तेल, ग्रीस, प्लास्टिक, कूड़ा, तांबा, शीशा, सोडियम पारा पक्षियों ही नहीं इंसानों की जिंदगी को भी खतरे में डाल सकता है। उन्होंने बताया कि पक्षी विहार के पानी में ऑक्सीजन का स्तर लगातार कम हो रहा है।
आंकड़ों पर नजर
साल पक्षी प्रजातियां
2018 11622 63
2019 12212 63
2020 8776 62
2021 8068 73
2022 9243 47