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Noida News: कश्मीरी गेट के पास दो किमी का हिस्सा बना जाम का हॉटस्पॉट
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जाम से छुटकारा पाने के लिए कई उपाय अपनाए, पर नहीं निकल सका स्थायी समाधान
सबसे बड़ा कारण महाराणा प्रताप अंतरराज्यीय बस अड्डा, यहीं रहता है सबसे ज्यादा दबाव
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2,600 से अधिक बसें रोज चलती हैं बस अड्डे से
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। रिंग रोड राजधानी के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक है लेकिन जगह-जगह रोजाना लगने वाले जाम से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासकर कश्मीरी गेट और उसके आसपास लगभग दो किलोमीटर का हिस्सा जाम का स्थायी हॉटस्पॉट बन गया है। पुलिस और अन्य विभागों की तरफ से वर्षों से जाम से छुटकारा पाने और स्थायी समाधान की तलाश की जा रही है लेकिन कोई हल नहीं निकाला जा सका है।
जाम का सबसे बड़ा कारण महाराणा प्रताप अंतरराज्यीय बस अड्डा (आईएसबीटी) है जो 1976 से दिल्ली की ट्रांसपोर्ट व्यवस्था का केंद्र बना हुआ है। रोजाना यहां से 2,600 से अधिक बसें निकलती हैं। डेढ़ लाख से ज्यादा यात्रियों की आवाजाही के कारण यहां का दबाव केवल बस अड्डे तक सीमित नहीं रहता बल्कि रिंग रोड, जीटी रोड और आसपास की सड़कों को भी प्रभावित करता है। यही कारण है कि यहां पर व्यस्त समय के साथ ही अन्य समय पर भी जाम लग रहा है। कुछ वर्षों में जाम से छुटकारा पाने के लिए कई उपाय अपना गए हैं। कभी आईएसबीटी से बाहर निकलने वाली बसों के लिए अलग लेन बनाई गई तो कभी शाम 4 बजे से रात 10 बजे तक बस अड्डे के सामने वाले यू-टर्न को बंद कर दिया गया। इससे थोड़ी राहत जरूर मिली लेकिन जाम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। हाल ही में चंदगीराम अखाड़ा से आने वाली बसों को रिंग रोड पर न आने देने और उन्हें जीटी रोड होते हुए वापस आईएसबीटी में प्रवेश कराने की व्यवस्था की गई है। ट्रैफिक पुलिस इस उपाय को सफल मान रही है और स्थायी रूप से लागू करने की तैयारी भी है।
अवैध पार्किंग व अतिक्रमण का संकट
जाम केवल बसों की संख्या से नहीं बल्कि आईएसबीटी के बाहर की अव्यवस्था से भी बढ़ता है। बस अड्डे से कुछ ही दूरी पर ऑटो, ई-रिक्शा और निजी वाहनों का जमावड़ा लगा रहता है। यातायात पुलिस कई बार इन्हें हटाती है लेकिन ये कुछ ही समय बाद वापस लौट आते हैं। साथ ही, अवैध पार्किंग और अतिक्रमण ने भी सड़कें संकरी कर दी हैं जिससे जाम का दबाव और बढ़ जाता है।
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बस अड्डे का बोझ हो कम तो मिले राहत
ट्रैफिक पुलिस के अध्ययन के मुताबिक, केवल बस अड्डे की भीड़ ही नहीं बल्कि पास के सिग्नल भी समस्या को बढ़ा रहे हैं। छत्तारेल लालबत्ती (लालकिला और जीपीओ के बीच) का जाम अक्सर रिंग रोड तक असर डाल देता है। इसके समाधान के लिए कई योजनाओं पर काम हो रहा है ताकि लालकिले की ओर से कश्मीरी गेट जाने वाले वाहनों को सिग्नल-फ्री रास्ता मिल सके। दिल्ली सरकार का मानना है कि मौजूदा जाम का स्थायी हल तभी निकलेगा जब कश्मीरी गेट का बोझ कम किया जाए। इसके लिए सीमा क्षेत्रों टीकरी बार्डर, नरेला और द्वारका सेक्टर-21 में नए अंतरराज्यीय बस अड्डे बनाने की योजना पर काम हो रहा है। हालांकि, इन योजनाओं को जमीन पर उतरने में समय लगेगा।
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सबसे बड़ा कारण महाराणा प्रताप अंतरराज्यीय बस अड्डा, यहीं रहता है सबसे ज्यादा दबाव
2,600 से अधिक बसें रोज चलती हैं बस अड्डे से
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। रिंग रोड राजधानी के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक है लेकिन जगह-जगह रोजाना लगने वाले जाम से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासकर कश्मीरी गेट और उसके आसपास लगभग दो किलोमीटर का हिस्सा जाम का स्थायी हॉटस्पॉट बन गया है। पुलिस और अन्य विभागों की तरफ से वर्षों से जाम से छुटकारा पाने और स्थायी समाधान की तलाश की जा रही है लेकिन कोई हल नहीं निकाला जा सका है।
जाम का सबसे बड़ा कारण महाराणा प्रताप अंतरराज्यीय बस अड्डा (आईएसबीटी) है जो 1976 से दिल्ली की ट्रांसपोर्ट व्यवस्था का केंद्र बना हुआ है। रोजाना यहां से 2,600 से अधिक बसें निकलती हैं। डेढ़ लाख से ज्यादा यात्रियों की आवाजाही के कारण यहां का दबाव केवल बस अड्डे तक सीमित नहीं रहता बल्कि रिंग रोड, जीटी रोड और आसपास की सड़कों को भी प्रभावित करता है। यही कारण है कि यहां पर व्यस्त समय के साथ ही अन्य समय पर भी जाम लग रहा है। कुछ वर्षों में जाम से छुटकारा पाने के लिए कई उपाय अपना गए हैं। कभी आईएसबीटी से बाहर निकलने वाली बसों के लिए अलग लेन बनाई गई तो कभी शाम 4 बजे से रात 10 बजे तक बस अड्डे के सामने वाले यू-टर्न को बंद कर दिया गया। इससे थोड़ी राहत जरूर मिली लेकिन जाम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। हाल ही में चंदगीराम अखाड़ा से आने वाली बसों को रिंग रोड पर न आने देने और उन्हें जीटी रोड होते हुए वापस आईएसबीटी में प्रवेश कराने की व्यवस्था की गई है। ट्रैफिक पुलिस इस उपाय को सफल मान रही है और स्थायी रूप से लागू करने की तैयारी भी है।
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अवैध पार्किंग व अतिक्रमण का संकट
जाम केवल बसों की संख्या से नहीं बल्कि आईएसबीटी के बाहर की अव्यवस्था से भी बढ़ता है। बस अड्डे से कुछ ही दूरी पर ऑटो, ई-रिक्शा और निजी वाहनों का जमावड़ा लगा रहता है। यातायात पुलिस कई बार इन्हें हटाती है लेकिन ये कुछ ही समय बाद वापस लौट आते हैं। साथ ही, अवैध पार्किंग और अतिक्रमण ने भी सड़कें संकरी कर दी हैं जिससे जाम का दबाव और बढ़ जाता है।
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बस अड्डे का बोझ हो कम तो मिले राहत
ट्रैफिक पुलिस के अध्ययन के मुताबिक, केवल बस अड्डे की भीड़ ही नहीं बल्कि पास के सिग्नल भी समस्या को बढ़ा रहे हैं। छत्तारेल लालबत्ती (लालकिला और जीपीओ के बीच) का जाम अक्सर रिंग रोड तक असर डाल देता है। इसके समाधान के लिए कई योजनाओं पर काम हो रहा है ताकि लालकिले की ओर से कश्मीरी गेट जाने वाले वाहनों को सिग्नल-फ्री रास्ता मिल सके। दिल्ली सरकार का मानना है कि मौजूदा जाम का स्थायी हल तभी निकलेगा जब कश्मीरी गेट का बोझ कम किया जाए। इसके लिए सीमा क्षेत्रों टीकरी बार्डर, नरेला और द्वारका सेक्टर-21 में नए अंतरराज्यीय बस अड्डे बनाने की योजना पर काम हो रहा है। हालांकि, इन योजनाओं को जमीन पर उतरने में समय लगेगा।