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विवाहित महिला का निवास अधिकार सास- ससुर की शांति की कीमत पर नहीं: हाईकोर्ट

Fri, 31 Oct 2025 06:59 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 31 Oct 2025 06:59 PM IST
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A married woman's right to reside cannot be at the cost of her in-laws' peace
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल के अपने आदेश में स्पष्ट किया कि घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 (पीडब्ल्यूडीवी एक्ट) के तहत महिला का साझा घर में निवास का अधिकार पूर्ण या स्थायी नहीं है। इसे वरिष्ठ नागरिकों या सास-ससुर के शांतिपूर्ण जीवन के अधिकार के साथ संतुलित करना जरूरी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह कानून लग्जरी की बराबरी की गारंटी नहीं देता, बल्कि निवास की पर्याप्तता सुनिश्चित करता है। न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर की डिवीजन बेंच ने कहा कि निवास का अधिकार सुरक्षा और स्थिरता के लिए है, न कि बड़े पारिवारिक घर पर कब्जे को बनाए रखने के लिए, जो कानूनी मालिकों की कीमत पर हो। कोर्ट ने जोर दिया कि जहां दोनों पक्षों के अधिकार टकराते हैं, वहां नाजुक संतुलन बनाना जरूरी है ताकि किसी की गरिमा या सुरक्षा प्रभावित न हो। यह टिप्पणी महिला द्वारा दाखिल याचिका पर आई जहां एक महिला ने सिंगल जज बेंच के सितंबर 2025 के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसे सास-ससुर के घर से खाली करने का निर्देश दिया गया था। ब्यूरो
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