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इमरजेंसी
Updated Mon, 20 Aug 2018 11:45 PM IST
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डॉक्टरों को हिदायत, एक मरीज को दें तीन मिनट
- अभी डॉक्टर मरीज को आधा मिनट भी नहीं दे रहे समय
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। जिला अस्पताल प्रशासन ने डॉक्टरों को हिदायत दी है कि वह एक मरीज को 3 मिनट का समय जरूर दें। ताकि वो अपनी बीमारी के बारे में डॉक्टरों को बता सकें। अभी मरीजों की भीड़ की वजह से डॉक्टर मुश्किल से आधे से 1 मिनट का समय ही दे पाते हैं। इस वजह से मरीजों की शिकायत रहती है कि डॉक्टर मरीज की बात सुनें बिना ही दवाई लिखकर पर्चा थमा देते हैं। इसे लेकर कई बार झगड़ा तक भी हो चुका है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में हर दिन ढाई से तीन हजार मरीज इलाज के लिए आते हैं। सोमवार को ओपीडी में मरीजों का आंकड़ा और बढ़ जाता है। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों का आंकड़ा इससे अलग है। ऐसे में एक विभाग में कम से कम 200 से 250 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। डॉक्टरों की शिकायत रहती है कि मरीजों की संख्या ज्यादा होने से वह समय नहीं दे पाते हैं। इस समय जिला अस्पताल में 35 डॉक्टर हैं। इसमें पांच फिजिशियन, तीन हड्डी रोग विशेषज्ञ, तीन नेत्र सर्जन, तीन रेडियोलॉजिस्ट, दो दंत रोग विशेषज्ञ, दो पैथोलॉजिस्ट, एक मनोचिकित्सक, एक मनोवैज्ञानिक, एक ईएनटी, आठ महिला रोग विशेषज्ञ, एक त्वचा रोग विशेषज्ञ समेत इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर हैं। डॉक्टरों का कहना है जिन विभागों में डॉक्टरों की संख्या ज्यादा है, वहां पर डॉक्टर मरीज को समय दे सकते हैं, लेकिन जिन विभागों में डॉक्टर कम हैं, वहां थोड़ी परेशानी होती है। इस वजह से डॉक्टर मरीज को बिल्कुल समय नहीं दे पाते हैं। वहीं, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अस्पताल में डॉक्टरों की संख्या ठीक है।
- मरीज को नहीं मिल पाता बोलने का मौका
मरीजों का आरोप रहता है कि डॉक्टर पूरी बात सुनते नहीं हैं। अक्सर डॉक्टर मरीज की पूरी बात सुने बिना ही दवाई लिखकर स्लिप थमा देते हैं। इससे इलाज में लाभ नहीं मिल पाता है और उन्हें बार-बार अस्पताल आना पड़ता है। डॉक्टर मरीज को पूरा समय दे पाए इसके लिए अस्पताल प्रशासन ने अलग से फीवर ओपीडी भी शुरू की थी, ताकि फिजिशियन के पास मरीजों का भार कम हो।
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- इन विभागों में रहती है सबसे ज्यादा भीड़
फिजिशियन, सर्जन, हड्डी, महिला रोग विशेषज्ञ।
डॉक्टर को मरीज की पूरी बात सुननी चाहिए। इसलिए डॉक्टरों से कहा गया है कि वह मरीज को तीन मिनट समय दें। डॉक्टर के अच्छे से देखने और बात करने से मरीज को अच्छा महसूस होता है। इससे उसके इलाज में फायदा मिलता है।
- डॉक्टर अजेय अग्रवाल, सीएमएस
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इमरजेंसी को मिली एक और डॉक्टर
नोएडा। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में एक डॉक्टर बढ़ गई हैं। डॉक्टर गुंजन ने बतौर इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर के ज्वाइन किया है। इससे इमरजेंसी का भार कम हो जाएगा। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में डॉक्टरों की संख्या कम थी। अस्पताल प्रशासन को ड्यूटी लगाने को लेकर परेशानी होती थी। एक डॉक्टर मिलने के बाद अस्पताल प्रशासन को थोड़ी राहत मिली है। ब्यूरो
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- अभी डॉक्टर मरीज को आधा मिनट भी नहीं दे रहे समय
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। जिला अस्पताल प्रशासन ने डॉक्टरों को हिदायत दी है कि वह एक मरीज को 3 मिनट का समय जरूर दें। ताकि वो अपनी बीमारी के बारे में डॉक्टरों को बता सकें। अभी मरीजों की भीड़ की वजह से डॉक्टर मुश्किल से आधे से 1 मिनट का समय ही दे पाते हैं। इस वजह से मरीजों की शिकायत रहती है कि डॉक्टर मरीज की बात सुनें बिना ही दवाई लिखकर पर्चा थमा देते हैं। इसे लेकर कई बार झगड़ा तक भी हो चुका है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में हर दिन ढाई से तीन हजार मरीज इलाज के लिए आते हैं। सोमवार को ओपीडी में मरीजों का आंकड़ा और बढ़ जाता है। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों का आंकड़ा इससे अलग है। ऐसे में एक विभाग में कम से कम 200 से 250 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। डॉक्टरों की शिकायत रहती है कि मरीजों की संख्या ज्यादा होने से वह समय नहीं दे पाते हैं। इस समय जिला अस्पताल में 35 डॉक्टर हैं। इसमें पांच फिजिशियन, तीन हड्डी रोग विशेषज्ञ, तीन नेत्र सर्जन, तीन रेडियोलॉजिस्ट, दो दंत रोग विशेषज्ञ, दो पैथोलॉजिस्ट, एक मनोचिकित्सक, एक मनोवैज्ञानिक, एक ईएनटी, आठ महिला रोग विशेषज्ञ, एक त्वचा रोग विशेषज्ञ समेत इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर हैं। डॉक्टरों का कहना है जिन विभागों में डॉक्टरों की संख्या ज्यादा है, वहां पर डॉक्टर मरीज को समय दे सकते हैं, लेकिन जिन विभागों में डॉक्टर कम हैं, वहां थोड़ी परेशानी होती है। इस वजह से डॉक्टर मरीज को बिल्कुल समय नहीं दे पाते हैं। वहीं, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अस्पताल में डॉक्टरों की संख्या ठीक है।
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- मरीज को नहीं मिल पाता बोलने का मौका
मरीजों का आरोप रहता है कि डॉक्टर पूरी बात सुनते नहीं हैं। अक्सर डॉक्टर मरीज की पूरी बात सुने बिना ही दवाई लिखकर स्लिप थमा देते हैं। इससे इलाज में लाभ नहीं मिल पाता है और उन्हें बार-बार अस्पताल आना पड़ता है। डॉक्टर मरीज को पूरा समय दे पाए इसके लिए अस्पताल प्रशासन ने अलग से फीवर ओपीडी भी शुरू की थी, ताकि फिजिशियन के पास मरीजों का भार कम हो।
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- इन विभागों में रहती है सबसे ज्यादा भीड़
फिजिशियन, सर्जन, हड्डी, महिला रोग विशेषज्ञ।
डॉक्टर को मरीज की पूरी बात सुननी चाहिए। इसलिए डॉक्टरों से कहा गया है कि वह मरीज को तीन मिनट समय दें। डॉक्टर के अच्छे से देखने और बात करने से मरीज को अच्छा महसूस होता है। इससे उसके इलाज में फायदा मिलता है।
- डॉक्टर अजेय अग्रवाल, सीएमएस
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इमरजेंसी को मिली एक और डॉक्टर
नोएडा। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में एक डॉक्टर बढ़ गई हैं। डॉक्टर गुंजन ने बतौर इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर के ज्वाइन किया है। इससे इमरजेंसी का भार कम हो जाएगा। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में डॉक्टरों की संख्या कम थी। अस्पताल प्रशासन को ड्यूटी लगाने को लेकर परेशानी होती थी। एक डॉक्टर मिलने के बाद अस्पताल प्रशासन को थोड़ी राहत मिली है। ब्यूरो