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- महेंद्रगढ़ में स्टोन क्रशर को मंजूरी देने का मामला
Updated Fri, 14 Dec 2018 05:40 AM IST
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एनजीटी ने कहा अधिकारियों के खिलाफ हो कड़ी कार्रवाई
- महेंद्रगढ़ में स्टोन क्रशर को मंजूरी देने का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले में अरावली वन क्षेत्र की आबोहवा प्रदूषित करने वाले स्टोन क्रशर के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की गाज अधिकारियों पर गिरी है। ट्रिब्यूनल ने कहा है कि बिना जांचे-परखे स्टोन क्रशर को अनुमति देने वाले नारनौल के तहसीलदार, संबंधित प्रखंड वन अधिकारी, जिला टाउन प्लानर व हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचपीसीबी) के अधिकारियों के खिलाफ एक महीने के भीतर कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही कार्रवाई रिपोर्ट राज्य के मुख्य सचिव को और ट्रिब्यूनल में भी दाखिल की जानी चाहिए।
जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने याची महेंद्र सिंह के मामले में यह आदेश दिया है। पीठ ने कहा कि 10 दिसंबर को एनजीटी में दाखिल गठित संयुक्त समिति की जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि संबंधित अधिकारियों ने बिना फील्ड सर्वे और पर्यावरण क्षति को जांचे ही स्टोन क्रशर को अनुमति दी है।
पीठ ने कहा कि 20 सितंबर और 25 सितंबर को स्टोन क्रशर के खिलाफ जांच और कार्रवाई का आदेश दिया गया था। वहीं, एक संयुक्त समिति भी गठित की गई थी। इस समिति में उप कमिश्नर, जिला टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, प्रभागीय वन अधिकारी को शामिल किया गया था। इस संयुक्त समिति की रिपोर्ट के मुताबिक मैसर्स यूनीक स्टोन क्रशर को गलत मंजूरी दी गई थी। इस स्टोन क्रशर की मंजूरी जल्द ही रद्द की जाएगी। पीठ ने कहा कि मंजूरी देने की गलती करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 18 फरवरी को होगी।
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- महेंद्रगढ़ में स्टोन क्रशर को मंजूरी देने का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले में अरावली वन क्षेत्र की आबोहवा प्रदूषित करने वाले स्टोन क्रशर के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की गाज अधिकारियों पर गिरी है। ट्रिब्यूनल ने कहा है कि बिना जांचे-परखे स्टोन क्रशर को अनुमति देने वाले नारनौल के तहसीलदार, संबंधित प्रखंड वन अधिकारी, जिला टाउन प्लानर व हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचपीसीबी) के अधिकारियों के खिलाफ एक महीने के भीतर कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही कार्रवाई रिपोर्ट राज्य के मुख्य सचिव को और ट्रिब्यूनल में भी दाखिल की जानी चाहिए।
जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने याची महेंद्र सिंह के मामले में यह आदेश दिया है। पीठ ने कहा कि 10 दिसंबर को एनजीटी में दाखिल गठित संयुक्त समिति की जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि संबंधित अधिकारियों ने बिना फील्ड सर्वे और पर्यावरण क्षति को जांचे ही स्टोन क्रशर को अनुमति दी है।
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पीठ ने कहा कि 20 सितंबर और 25 सितंबर को स्टोन क्रशर के खिलाफ जांच और कार्रवाई का आदेश दिया गया था। वहीं, एक संयुक्त समिति भी गठित की गई थी। इस समिति में उप कमिश्नर, जिला टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, प्रभागीय वन अधिकारी को शामिल किया गया था। इस संयुक्त समिति की रिपोर्ट के मुताबिक मैसर्स यूनीक स्टोन क्रशर को गलत मंजूरी दी गई थी। इस स्टोन क्रशर की मंजूरी जल्द ही रद्द की जाएगी। पीठ ने कहा कि मंजूरी देने की गलती करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 18 फरवरी को होगी।
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