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्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर नहीं हैं दवाइयां
Updated Mon, 03 Dec 2018 05:55 AM IST
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प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर नहीं हैं दवाइयां
-निजी स्टोरों से महंगी दवाई खरीदने को मजबूर हैं मरीज
ऋषिपाल सिंह
दादरी। देश का हर नागरिक स्वस्थ हो, सभी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं कम दामों में मिलें। इसको लेकर प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोले गए हैं। लेकिन स्थिति यह है कि नगर के जीटी रोड स्थित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र दवाई नहीं होने के चलते खुद बीमार है। मजबूरन मरीजों को बाहर से दवाइयां खरीदनी पड़ रही है।
नई आबादी मोहल्ले के सामने गरीब ओर बेसहारा लोगों को समय से सस्ता और सुलभ इलाज के लिए वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोला गया है। जिसे करीब दो साल हो गए हैं, जो आमतौर पर स्थानीय दवाई की दुकानों से करीब 70 फीसदी कम कीमत पर दवाई दी जाती है। बुखार, खांसी जैसी बीमारी की दवाई का पत्ता जो बाजार में करीब 15 रुपये का मिलता है। वह दो से तीन रुपये में इन केंद्रों से मिल जाता है। इसमें कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों की भी दवाइयां शामिल हैं। स्थिति यह है कि जन औषधि केंद्र की वेबसाइट पर दवाइयों की सूची तो अपलोड है, लेकिन सभी दाइयां मिल ही नहीं रही हैं। जो लोग केंद्रों पर दवाई लेने आ रहे हैं, उन्हें वापस लौटना पड़ रहा है। मजबूरी में गरीब और बेसहारा लोगों को निजी मेडिकल स्टोर से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ रही है।
फार्मासिस्ट रितु वर्मा का कहना है कि दवाइयां खत्म हो गई हैं। करीब दो सप्ताह पहले मांग भेजी जा चुकी है, लेकिन अभी तक नहीं आई हैं। यहां बाजार से 70 फीसदी कम कीमत पर दवाइयां दी जाती हैं।
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-निजी स्टोरों से महंगी दवाई खरीदने को मजबूर हैं मरीज
ऋषिपाल सिंह
दादरी। देश का हर नागरिक स्वस्थ हो, सभी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं कम दामों में मिलें। इसको लेकर प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोले गए हैं। लेकिन स्थिति यह है कि नगर के जीटी रोड स्थित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र दवाई नहीं होने के चलते खुद बीमार है। मजबूरन मरीजों को बाहर से दवाइयां खरीदनी पड़ रही है।
नई आबादी मोहल्ले के सामने गरीब ओर बेसहारा लोगों को समय से सस्ता और सुलभ इलाज के लिए वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोला गया है। जिसे करीब दो साल हो गए हैं, जो आमतौर पर स्थानीय दवाई की दुकानों से करीब 70 फीसदी कम कीमत पर दवाई दी जाती है। बुखार, खांसी जैसी बीमारी की दवाई का पत्ता जो बाजार में करीब 15 रुपये का मिलता है। वह दो से तीन रुपये में इन केंद्रों से मिल जाता है। इसमें कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों की भी दवाइयां शामिल हैं। स्थिति यह है कि जन औषधि केंद्र की वेबसाइट पर दवाइयों की सूची तो अपलोड है, लेकिन सभी दाइयां मिल ही नहीं रही हैं। जो लोग केंद्रों पर दवाई लेने आ रहे हैं, उन्हें वापस लौटना पड़ रहा है। मजबूरी में गरीब और बेसहारा लोगों को निजी मेडिकल स्टोर से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ रही है।
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फार्मासिस्ट रितु वर्मा का कहना है कि दवाइयां खत्म हो गई हैं। करीब दो सप्ताह पहले मांग भेजी जा चुकी है, लेकिन अभी तक नहीं आई हैं। यहां बाजार से 70 फीसदी कम कीमत पर दवाइयां दी जाती हैं।
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