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कर्मचारियों के इलाज में फर्जीवाड़ा रोकना हमारी जिम्मेदारी:ईएसआईसी
Updated Sat, 24 Nov 2018 07:11 AM IST
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कर्मचारियों के इलाज में फर्जीवाड़ा रोकना हमारी जिम्मेदारी
ईएसआईसी ने हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर दी दलील
इलाज के खर्च संबंधी नियमों में परिवर्तन को दी गई थी चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) कर्मचारियों और नियोक्ताओं के अंशदान की न्यासी है। इसलिए उसकी जिम्मेदारी है कि इस पैसे का फर्जी तरीके से किसी भी तरह का गलत इस्तेमाल न होने पाए। उपचार के खर्च की सीमा तय करने संबंधी नियम बनाए गए हैं। यह दलील ईएसआईसी ने हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर दी है। हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर नोटिस जारी करते हुए ईएसआईसी से जवाब मांगा था।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति वीके राव की खंडपीठ के समक्ष ईएसआईसी ने हलफनामा दायर कर कहा कि लाभार्थियों व उनके आश्रितों के इलाज के खर्च की सीमा संबंधी नियमों में बदलाव फर्जीवाड़ा रोकने के लिए किया गया है। अगर फर्जी लोगों को इलाज मिलता रहेगा तो वास्तविक लाभार्थियों को फायदा नहीं मिल पाएगा।
कोर्ट में यह हलफनामा उन जनहित याचिकाओं पर दिया गया है कि जिनमें सुपर स्पेशलिटी ट्रीटमेंट और दूसरे महंगे उपचार के खर्च की सीमा 10 लाख रुपये करने तथा लाभ लेने के लिए नियमों में बदलाव को चुनौती दी गई थी।
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याचिकाओं का जवाब देते हुए ईएसआईसी ने एक ऐसे मामले का हवाला दिया, जिसमें फर्जी तरीके से बीमा का लाभ लिया गया था जबकि वह कर्मचारी कई साल पहले इससे बाहर हो चुका था। इसका हवाला देते हुए ईएसआईसी ने कहा कि सुपर स्पेशलिटी ट्रीटमेंट के मामलों में इलाज का पूरा खर्च आयोग द्वारा उठाया जाता है। इसलिए इन मामलों की गहराई से जांच करना जरूरी है। इसके मद्देनजर आयोग की उप कमेटी ने इस फर्जीवाड़े को रोकने के लिए जो नियम बनाए है वह सही व ईएसआईसी अधिनियम और अन्य नियमों के अनुरूप हैं।
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ईएसआईसी ने हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर दी दलील
इलाज के खर्च संबंधी नियमों में परिवर्तन को दी गई थी चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) कर्मचारियों और नियोक्ताओं के अंशदान की न्यासी है। इसलिए उसकी जिम्मेदारी है कि इस पैसे का फर्जी तरीके से किसी भी तरह का गलत इस्तेमाल न होने पाए। उपचार के खर्च की सीमा तय करने संबंधी नियम बनाए गए हैं। यह दलील ईएसआईसी ने हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर दी है। हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर नोटिस जारी करते हुए ईएसआईसी से जवाब मांगा था।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति वीके राव की खंडपीठ के समक्ष ईएसआईसी ने हलफनामा दायर कर कहा कि लाभार्थियों व उनके आश्रितों के इलाज के खर्च की सीमा संबंधी नियमों में बदलाव फर्जीवाड़ा रोकने के लिए किया गया है। अगर फर्जी लोगों को इलाज मिलता रहेगा तो वास्तविक लाभार्थियों को फायदा नहीं मिल पाएगा।
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कोर्ट में यह हलफनामा उन जनहित याचिकाओं पर दिया गया है कि जिनमें सुपर स्पेशलिटी ट्रीटमेंट और दूसरे महंगे उपचार के खर्च की सीमा 10 लाख रुपये करने तथा लाभ लेने के लिए नियमों में बदलाव को चुनौती दी गई थी।
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याचिकाओं का जवाब देते हुए ईएसआईसी ने एक ऐसे मामले का हवाला दिया, जिसमें फर्जी तरीके से बीमा का लाभ लिया गया था जबकि वह कर्मचारी कई साल पहले इससे बाहर हो चुका था। इसका हवाला देते हुए ईएसआईसी ने कहा कि सुपर स्पेशलिटी ट्रीटमेंट के मामलों में इलाज का पूरा खर्च आयोग द्वारा उठाया जाता है। इसलिए इन मामलों की गहराई से जांच करना जरूरी है। इसके मद्देनजर आयोग की उप कमेटी ने इस फर्जीवाड़े को रोकने के लिए जो नियम बनाए है वह सही व ईएसआईसी अधिनियम और अन्य नियमों के अनुरूप हैं।