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हाईकोर्ट ने गंभीर मामलों में समझौते पर उठाया सवाल
Updated Tue, 20 Nov 2018 06:15 AM IST
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हाईकोर्ट ने गंभीर मामलों में समझौते पर उठाया सवाल
नई दिल्ली । दिल्ली हाईकोर्ट ने दुष्कर्म, छेड़छाड़ और आर्थिक धोखाधड़ी जैसे गंभीर प्रकृति के अपराधों को निचली अदालतों द्वारा मध्यस्थता के लिए भेजने के तौर-तरीकों पर सवाल उठाया है। पीठ ने ऐसे ही दो मामलों में प्राथमिकी रद्द करने की मांग को देखते हुए यह सवाल किया। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति आरके गाबा ने कहा कि क्या गंभीर या जघन्य मामलों में समझौता होने पर पक्षकारों को इसी आधार पर आपराधिक कार्यवाही निरस्त कराने के लिए उसके पास आना चाहिए? क्या इस तरह के मामलों में इस अदालत को सीआरपीसी की धारा 482 के तहत मिली पावर का इस्तेमाल करने के लिए कहना चाहिए। गौरतलब है कि अदालत के समक्ष दो मामलों में प्राथमिकी रद्द करने के लिए याचिकाएं, जिनमें एक व्याक्ति पर दुष्कर्म, अप्राकृतिक यौनाचार, एक महिला से छेड़छाड़ और दूसरे व्यक्ति पर एक निजी बैंक से 12 लाख की धोखाधड़ी का आरोप था। इन दोनों लोगों ने अदालत में कहा कि मीडिएशन में उनका दूसरे पक्षों से समझौता हो गया, इसलिए वे प्राथमिकी रद्द करवाना चाहते हैं। ब्यूरो
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नई दिल्ली । दिल्ली हाईकोर्ट ने दुष्कर्म, छेड़छाड़ और आर्थिक धोखाधड़ी जैसे गंभीर प्रकृति के अपराधों को निचली अदालतों द्वारा मध्यस्थता के लिए भेजने के तौर-तरीकों पर सवाल उठाया है। पीठ ने ऐसे ही दो मामलों में प्राथमिकी रद्द करने की मांग को देखते हुए यह सवाल किया। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति आरके गाबा ने कहा कि क्या गंभीर या जघन्य मामलों में समझौता होने पर पक्षकारों को इसी आधार पर आपराधिक कार्यवाही निरस्त कराने के लिए उसके पास आना चाहिए? क्या इस तरह के मामलों में इस अदालत को सीआरपीसी की धारा 482 के तहत मिली पावर का इस्तेमाल करने के लिए कहना चाहिए। गौरतलब है कि अदालत के समक्ष दो मामलों में प्राथमिकी रद्द करने के लिए याचिकाएं, जिनमें एक व्याक्ति पर दुष्कर्म, अप्राकृतिक यौनाचार, एक महिला से छेड़छाड़ और दूसरे व्यक्ति पर एक निजी बैंक से 12 लाख की धोखाधड़ी का आरोप था। इन दोनों लोगों ने अदालत में कहा कि मीडिएशन में उनका दूसरे पक्षों से समझौता हो गया, इसलिए वे प्राथमिकी रद्द करवाना चाहते हैं। ब्यूरो