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रेरा के तहत दिल्ली को मिला पूर्णकालिक रेगुलेटर
Updated Fri, 16 Nov 2018 12:19 AM IST
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हेड : रेरा के तहत दिल्ली को मिला पूर्णकालिक रेगुलेटर
सबहेड : सेवानिवृत्त आईएएस विजय एस मदान होंगे अथारिटी का रेगुलेटर, पांच साल का होगा कार्यकाल
प्वाइंटर : तीन सदस्यीय प्राधिकरण के दो अन्य सदस्यों की भी नियुक्ति
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली रीयल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) के तहत दिल्ली को पूर्णकालिक रीयल एस्टेट रेगुलेटर मिल गया है। इससे अब दिल्ली में फ्लैट खरीददारों की शिकायतों को माकूल समाधान मिलेगा। उपराज्यपाल अनिल बैजल ने बृहस्पतिवार को विज्ञान भवन में रीयल एस्टेट कानून पर आयोजित वर्कशॉप में इसकी जानकारी दी।
दरअसल, दिल्ली विकास प्राधिकरण ने खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए पिछले साल रीयल स्टेट रेगुलेटरी एक्ट को अधिसूचित किया था। लेकिन, अभी तक एक्ट के तहत बनने वाली अथॉरिटी के रेगुलेटर की नियुक्ति नहीं हुई थी। अंतरिम व्यवस्था के तौर पर डीडीए के उपाध्यक्ष इस काम को देख रहे थे। अब मंगलवार को सेवानिवृत्त आईएएस विजय एस मदान को अथारिटी का रेगुलेटर नियुक्त कर दिया गया है। मदान इससे पहले यूआईडीएआई के महानिदेशक भी रह चुके हैं। जबकि तीन सदस्यीय प्राधिकरण में ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव व रमेश चंद्रा की नियुक्ति बतौर सदस्य हुई है। अनिल बैजल ने बताया कि दिल्ली में पूर्णकालिक रेगुलेटर की नियुक्ति कर दी गई है। इनका कार्यकाल पांच साल के लिए होगा। इससे अब अगर किसी फ्लैट खरीददार को कोई शिकायत होगी तो वह अथॉरिटी से इसका समाधान ले सकेगा। अथॉरिटी का काम रीयल एस्टेट एक्ट के क्रियान्वयन पर निगरानी रखना है।
रीयल एस्टेट कानून को कमजोर न करें राज्य : पूरी
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राज्य सरकारों को नसीहत दी कि वह रीयल एस्टेट कानून में कोई ऐसा संशोधन न करें, जिससे कानून किसी तरह कमजोर हो। इस तरह की कोशिश राज्यों के नुकसानदेह साबित होगी। आम खरीदारों को एक्ट का फायदा तभी मिल सकेगा, जब इसके सभी प्रावधानों को एक्ट की भावना के अनुरूप लागू किया जा सके। हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि अगर कोई डेवलपर तयशुदा समय में खरीदारों को फ्लैट नहीं देता तो सरकार उन पर कार्रवाई करने से नहीं हिचकेगी। पुरी ने कहा कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा व पंजाब को कानून का उल्लंघन करने वालों पर उपयुक्त कार्रवाई करनी चाहिए। अभी तक रेरा में रीयल एस्टेट के 33,750 प्रोजेक्ट रजिस्टर्ड हैं। वहीं, एजेंट की संख्या 26,018 है।
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दो साल में सात राज्य रेरा से बाहर
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि एक्ट को लागू हुए दो साल पूरे हो गए हैं। इस बीच रीयल एस्टेट सेक्टर को पारदर्शी बनाने में एक्ट की अहम भूमिका रही है। हालांकि, उन्होंने चिंता जाहिर की कि अभी तक पश्चिम बंगाल समेत उत्तर पूर्वी भारत के छह राज्यों ने एक्ट को नोटीफाई नहीं किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इन राज्यों की सरकारें आम लोगों के हित में जल्द ही एक्ट को अधिसूचित करेें।
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सबहेड : सेवानिवृत्त आईएएस विजय एस मदान होंगे अथारिटी का रेगुलेटर, पांच साल का होगा कार्यकाल
प्वाइंटर : तीन सदस्यीय प्राधिकरण के दो अन्य सदस्यों की भी नियुक्ति
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली रीयल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) के तहत दिल्ली को पूर्णकालिक रीयल एस्टेट रेगुलेटर मिल गया है। इससे अब दिल्ली में फ्लैट खरीददारों की शिकायतों को माकूल समाधान मिलेगा। उपराज्यपाल अनिल बैजल ने बृहस्पतिवार को विज्ञान भवन में रीयल एस्टेट कानून पर आयोजित वर्कशॉप में इसकी जानकारी दी।
दरअसल, दिल्ली विकास प्राधिकरण ने खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए पिछले साल रीयल स्टेट रेगुलेटरी एक्ट को अधिसूचित किया था। लेकिन, अभी तक एक्ट के तहत बनने वाली अथॉरिटी के रेगुलेटर की नियुक्ति नहीं हुई थी। अंतरिम व्यवस्था के तौर पर डीडीए के उपाध्यक्ष इस काम को देख रहे थे। अब मंगलवार को सेवानिवृत्त आईएएस विजय एस मदान को अथारिटी का रेगुलेटर नियुक्त कर दिया गया है। मदान इससे पहले यूआईडीएआई के महानिदेशक भी रह चुके हैं। जबकि तीन सदस्यीय प्राधिकरण में ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव व रमेश चंद्रा की नियुक्ति बतौर सदस्य हुई है। अनिल बैजल ने बताया कि दिल्ली में पूर्णकालिक रेगुलेटर की नियुक्ति कर दी गई है। इनका कार्यकाल पांच साल के लिए होगा। इससे अब अगर किसी फ्लैट खरीददार को कोई शिकायत होगी तो वह अथॉरिटी से इसका समाधान ले सकेगा। अथॉरिटी का काम रीयल एस्टेट एक्ट के क्रियान्वयन पर निगरानी रखना है।
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रीयल एस्टेट कानून को कमजोर न करें राज्य : पूरी
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राज्य सरकारों को नसीहत दी कि वह रीयल एस्टेट कानून में कोई ऐसा संशोधन न करें, जिससे कानून किसी तरह कमजोर हो। इस तरह की कोशिश राज्यों के नुकसानदेह साबित होगी। आम खरीदारों को एक्ट का फायदा तभी मिल सकेगा, जब इसके सभी प्रावधानों को एक्ट की भावना के अनुरूप लागू किया जा सके। हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि अगर कोई डेवलपर तयशुदा समय में खरीदारों को फ्लैट नहीं देता तो सरकार उन पर कार्रवाई करने से नहीं हिचकेगी। पुरी ने कहा कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा व पंजाब को कानून का उल्लंघन करने वालों पर उपयुक्त कार्रवाई करनी चाहिए। अभी तक रेरा में रीयल एस्टेट के 33,750 प्रोजेक्ट रजिस्टर्ड हैं। वहीं, एजेंट की संख्या 26,018 है।
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दो साल में सात राज्य रेरा से बाहर
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि एक्ट को लागू हुए दो साल पूरे हो गए हैं। इस बीच रीयल एस्टेट सेक्टर को पारदर्शी बनाने में एक्ट की अहम भूमिका रही है। हालांकि, उन्होंने चिंता जाहिर की कि अभी तक पश्चिम बंगाल समेत उत्तर पूर्वी भारत के छह राज्यों ने एक्ट को नोटीफाई नहीं किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इन राज्यों की सरकारें आम लोगों के हित में जल्द ही एक्ट को अधिसूचित करेें।