{"_id":"5be76dfdbdec2269637c27c8","slug":"15418935824-grnoida-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीएजी ने जुटा लिया है डाटा, अब होगी ऑडिट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीएजी ने जुटा लिया है डाटा, अब होगी ऑडिट
Updated Sun, 11 Nov 2018 05:17 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
सीएजी ने जुटा लिया है डाटा, अब तैयार होगी रिपोर्ट
- सीएजी की ऑडिट दूसरे चरण में पहुंची, रिपोर्ट आने पर ग्रेनो प्राधिकरण की गड़बड़ी आएगी सामने
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में सीएजी की ऑडिट अब दूसरे चरण में पहुंच गई है। सीएजी ने ऑडिट के लिए पूरा ब्योरा जुटा लिया है। अब ऑडिट शुरू होगी। माना जा रहा है कि रिपोर्ट बनने के साथ ही प्राधिकरणों की गड़बड़ी भी सामने आएगी।
पिछले साल ग्रेनो प्राधिकरण की सीएजी की ऑडिट शुरू हुई है। सीएजी की चार टीमें ऑडिट कर रही हैं। इन टीमों ने मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर रिपोर्ट तैयार की है। पहला, योजनाएं कब शुरू हुईं और कब पूरी हुईं। वे देरी से तो पूरी नहीं हुईं। अगर देरी से पूरी हुई हैं तो उसकी वजह क्या है। दूसरा, प्रोजेक्ट का पूरा ब्योरा और उसका औचित्य खंगाला है। तीसरा, विगत 10 वर्षों में प्राधिकरण ने कहां-कहां से पैसे लिए हैं और कहां-कहां भुगतान किए हैं। सीएजी ने बिल्डरों को दी गई सहूलियतों का भी अध्ययन किया है। सूत्रों ने बताया कि टीमों ने विगत 10 वर्षों का पूरा डाटा जुटा लिया है। अब उनका अध्ययन करेगी और रिपोर्ट तैयार करेगी, प्राधिकरण की गड़बड़ियां अब सामने आएंगी। बड़े आवंटनों पर भी सीएजी की नजर है। बता दें, कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले चुनाव में गाजियाबाद में आयोजित जनसभा में प्राधिकरणों की सीएजी ऑडिट की बात कही थी। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनते ही सीएजी ऑडिट पर सरकार ने मुहर लगा दी। करीब एक साल हो गए।
तय समय से पहले बिल्डरों को आवंटन की खुलेगी पोल
सीएजी की टीम बिल्डरों के आवंटन का भी डाटा जुटाया है। सूत्र बताते हैं कि ग्रेटर नोएडा व ग्रेटर नोएडा वेस्ट में चार चरणों में विकास का मसौदा तैयार किया गया था। पहला 2001, दूसरा, 2011, तीसरा 2021 व चौथा 2031 में पूरा होना था। 2001 तक करीब पांच लाख आबादी, 2011 तक 10 और 2021 तक 20 लाख आबादी का आकलन था, लेकिन ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने बिल्डरों के जरिए 2011 में ही पांच लाख फ्लैट बनाने का प्लान बना दिया और उसी हिसाब से जमीन भी बेच दी। इसके लिए लैंडयूज भी बदल दिया गया। जमीन आवंटन की कुल धनराशि का मात्र 10 फीसदी लेकर बिल्डरों के नाम कर दी गई। इससे तमाम वे लोग बिल्डर बन गए, जिनकी फ्लैट बनाने की क्षमता नहीं थी। सीएजी तय समय से पहले जरूरत से अधिक आवंटन को आधार बनाकर रिपोर्ट तैयार कर रहा है।
- सीएजी की ऑडिट दूसरे चरण में पहुंची, रिपोर्ट आने पर ग्रेनो प्राधिकरण की गड़बड़ी आएगी सामने
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में सीएजी की ऑडिट अब दूसरे चरण में पहुंच गई है। सीएजी ने ऑडिट के लिए पूरा ब्योरा जुटा लिया है। अब ऑडिट शुरू होगी। माना जा रहा है कि रिपोर्ट बनने के साथ ही प्राधिकरणों की गड़बड़ी भी सामने आएगी।
पिछले साल ग्रेनो प्राधिकरण की सीएजी की ऑडिट शुरू हुई है। सीएजी की चार टीमें ऑडिट कर रही हैं। इन टीमों ने मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर रिपोर्ट तैयार की है। पहला, योजनाएं कब शुरू हुईं और कब पूरी हुईं। वे देरी से तो पूरी नहीं हुईं। अगर देरी से पूरी हुई हैं तो उसकी वजह क्या है। दूसरा, प्रोजेक्ट का पूरा ब्योरा और उसका औचित्य खंगाला है। तीसरा, विगत 10 वर्षों में प्राधिकरण ने कहां-कहां से पैसे लिए हैं और कहां-कहां भुगतान किए हैं। सीएजी ने बिल्डरों को दी गई सहूलियतों का भी अध्ययन किया है। सूत्रों ने बताया कि टीमों ने विगत 10 वर्षों का पूरा डाटा जुटा लिया है। अब उनका अध्ययन करेगी और रिपोर्ट तैयार करेगी, प्राधिकरण की गड़बड़ियां अब सामने आएंगी। बड़े आवंटनों पर भी सीएजी की नजर है। बता दें, कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले चुनाव में गाजियाबाद में आयोजित जनसभा में प्राधिकरणों की सीएजी ऑडिट की बात कही थी। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनते ही सीएजी ऑडिट पर सरकार ने मुहर लगा दी। करीब एक साल हो गए।
विज्ञापन
तय समय से पहले बिल्डरों को आवंटन की खुलेगी पोल
सीएजी की टीम बिल्डरों के आवंटन का भी डाटा जुटाया है। सूत्र बताते हैं कि ग्रेटर नोएडा व ग्रेटर नोएडा वेस्ट में चार चरणों में विकास का मसौदा तैयार किया गया था। पहला 2001, दूसरा, 2011, तीसरा 2021 व चौथा 2031 में पूरा होना था। 2001 तक करीब पांच लाख आबादी, 2011 तक 10 और 2021 तक 20 लाख आबादी का आकलन था, लेकिन ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने बिल्डरों के जरिए 2011 में ही पांच लाख फ्लैट बनाने का प्लान बना दिया और उसी हिसाब से जमीन भी बेच दी। इसके लिए लैंडयूज भी बदल दिया गया। जमीन आवंटन की कुल धनराशि का मात्र 10 फीसदी लेकर बिल्डरों के नाम कर दी गई। इससे तमाम वे लोग बिल्डर बन गए, जिनकी फ्लैट बनाने की क्षमता नहीं थी। सीएजी तय समय से पहले जरूरत से अधिक आवंटन को आधार बनाकर रिपोर्ट तैयार कर रहा है।
विज्ञापन