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हाईकोर्ट ने दो साल से खराब एमआरआई मशीन पर मांगा जवाब
Updated Thu, 27 Sep 2018 03:44 AM IST
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हाईकोर्ट ने खराब एमआरआई मशीन को लेकर मांगा जवाब
दिल्ली सरकार ने बताया जीबी पंत में 2016 से खराब है एमआरआई मशीन
कोर्ट ने दिल्ली सरकार से अस्पतालों पर मांगी विस्तृत रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो,
नई दिल्ली। जीबी पंत अस्पताल में एमआरआई मशीन 2016 से खराब पड़ी है और मरीजों को बाहर से जांच करवाने के लिए कहा जा रहा है। यह तथ्य सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने सरकारी अस्पतालों पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति वीके राव की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार से पूछा है कि उसके अस्पतालों में कितने जीवन रक्षक यंत्र, कितनी दवाएं, बिस्तर, ऑपरेशन थियेटर व कितना स्टाफ है। इसकी जानकारी छह सप्ताह में दे। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 25 जनवरी 2019 की तारीख तय की है। कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली सरकार की ओर से पेश स्टेटस रिपोर्ट को खारिज कर दिया। कोर्ट को जब यह बताया गया कि जीबी पंत अस्पताल में एमआरआई मशीन 2016 से खराब है तो कोर्ट ने इस संबंध में एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने यह निर्देश करावल निवासी महिला मधु बाला की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुये दिया है। मधु बाला को डिलीवरी के लिये जीटीबी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था लेकिन ऑपरेशन थियेटर उपलब्ध न होने के कारण उसका ऑपरेशन नहीं किया जा सका था। इससे उसके पेट में नौ माह के भू्रण की मौत हो गई थी।
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याची महिला अध्यापक ने अधिवक्ता प्रशांत मनचंदा के जरिये जनहित याचिका दायर कर अपने बच्चे की मौत के लिये सरकारी अस्पतालों में इलाज व सर्जरी की सुविधाओं के अभाव को जिम्मेदार बताया था। याची ने सरकारी अस्पतालों की बदहाल को सुधारने के लिये सरकार को निर्देश देने की मांग की थी।
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दिल्ली सरकार ने बताया जीबी पंत में 2016 से खराब है एमआरआई मशीन
कोर्ट ने दिल्ली सरकार से अस्पतालों पर मांगी विस्तृत रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो,
नई दिल्ली। जीबी पंत अस्पताल में एमआरआई मशीन 2016 से खराब पड़ी है और मरीजों को बाहर से जांच करवाने के लिए कहा जा रहा है। यह तथ्य सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने सरकारी अस्पतालों पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति वीके राव की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार से पूछा है कि उसके अस्पतालों में कितने जीवन रक्षक यंत्र, कितनी दवाएं, बिस्तर, ऑपरेशन थियेटर व कितना स्टाफ है। इसकी जानकारी छह सप्ताह में दे। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 25 जनवरी 2019 की तारीख तय की है। कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली सरकार की ओर से पेश स्टेटस रिपोर्ट को खारिज कर दिया। कोर्ट को जब यह बताया गया कि जीबी पंत अस्पताल में एमआरआई मशीन 2016 से खराब है तो कोर्ट ने इस संबंध में एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
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कोर्ट ने यह निर्देश करावल निवासी महिला मधु बाला की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुये दिया है। मधु बाला को डिलीवरी के लिये जीटीबी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था लेकिन ऑपरेशन थियेटर उपलब्ध न होने के कारण उसका ऑपरेशन नहीं किया जा सका था। इससे उसके पेट में नौ माह के भू्रण की मौत हो गई थी।
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याची महिला अध्यापक ने अधिवक्ता प्रशांत मनचंदा के जरिये जनहित याचिका दायर कर अपने बच्चे की मौत के लिये सरकारी अस्पतालों में इलाज व सर्जरी की सुविधाओं के अभाव को जिम्मेदार बताया था। याची ने सरकारी अस्पतालों की बदहाल को सुधारने के लिये सरकार को निर्देश देने की मांग की थी।