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यूजी व पीजी में 2019 सत्र से मॉडल पाठ्यक्रम लागू करना अनिवार्य
Updated Thu, 20 Sep 2018 12:56 AM IST
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यूजी व पीजी में मॉडल पाठ्यक्रम होगा अनिवार्य
- कई विवि में पिछले साल से लागू है यह पाठ्यक्रम
- देशी लेखकों की किताबों को पढ़ाई में शामिल करने की सिफारिश
- एआईसीटीई ने विश्वविद्यालयों को लिखा पत्र
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। तकनीकी शिक्षा में गुणवत्ता लाने के लिए अंडरग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट में मॉडल पाठ्यक्रम को देशभर के तकनीकी विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2019-20 से लागू करना अनिवार्य होगा। सरकार ने इसके लिए निर्देश जारी कर दिया है। इस पाठ्यक्रम की खासियत यह है कि इसमें देशी लेखकों की लिखित इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट विषयों की किताबों को पढ़ाने की सिफारिश की गई है। ताकि छात्र इसे आसानी से समझ सकें।
एआईसीटीई के चेयरमैन प्रो. अनिल डी सहस्रबुद्धे के मुताबिक, कुछ विश्वविद्यालयों ने यूजी व पीजी प्रोग्राम में मॉडल पाठ्यक्रम को लागू कर दिया है। लेकिन जिन विश्वविद्यालयों में यह पाठ्यक्रम लागू नहीं किया गया है, उन्हें आगामी सत्र में लागू करना अनिवार्य होगा। दरअसल तकनीकी शिक्षा में फिलहाल अधिकतर विदेशी लेखकों की किताबें पढ़ाई जाती हैं। इसलिए पहली बार भारतीय लेखकों ने आम बोलचाल की भाषा पर आधारित हिंदी व अंग्रेजी में पाठ्यक्रम की किताबें लिखी हैं। ताकि छात्र इसे आसानी से समझ सकें।
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- विश्वविद्यालयों से मांगा एक्शन प्लान
विश्वविद्यालय अब सिर्फ फाइलों में योजनाओं को दिखाकर सरकार से फंड नहीं ले पाएंगे। दरअसल योजनाओं के नाम पर फंड लेने के बाद भी सालों काम शुरू नहीं होता है। इसलिए सरकार ने विश्वविद्यालयों से 2021 तक एक्शन प्लान मांगा है। इस प्लान के माध्यम से विश्वविद्यालयों को अपनी योजनाओं का खाका तैयार कर देना होगा। इसी के आधार पर योजना मंजूर होने के बाद ही फंड मिलेगा।
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- कई विवि में पिछले साल से लागू है यह पाठ्यक्रम
- देशी लेखकों की किताबों को पढ़ाई में शामिल करने की सिफारिश
- एआईसीटीई ने विश्वविद्यालयों को लिखा पत्र
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। तकनीकी शिक्षा में गुणवत्ता लाने के लिए अंडरग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट में मॉडल पाठ्यक्रम को देशभर के तकनीकी विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2019-20 से लागू करना अनिवार्य होगा। सरकार ने इसके लिए निर्देश जारी कर दिया है। इस पाठ्यक्रम की खासियत यह है कि इसमें देशी लेखकों की लिखित इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट विषयों की किताबों को पढ़ाने की सिफारिश की गई है। ताकि छात्र इसे आसानी से समझ सकें।
एआईसीटीई के चेयरमैन प्रो. अनिल डी सहस्रबुद्धे के मुताबिक, कुछ विश्वविद्यालयों ने यूजी व पीजी प्रोग्राम में मॉडल पाठ्यक्रम को लागू कर दिया है। लेकिन जिन विश्वविद्यालयों में यह पाठ्यक्रम लागू नहीं किया गया है, उन्हें आगामी सत्र में लागू करना अनिवार्य होगा। दरअसल तकनीकी शिक्षा में फिलहाल अधिकतर विदेशी लेखकों की किताबें पढ़ाई जाती हैं। इसलिए पहली बार भारतीय लेखकों ने आम बोलचाल की भाषा पर आधारित हिंदी व अंग्रेजी में पाठ्यक्रम की किताबें लिखी हैं। ताकि छात्र इसे आसानी से समझ सकें।
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- विश्वविद्यालयों से मांगा एक्शन प्लान
विश्वविद्यालय अब सिर्फ फाइलों में योजनाओं को दिखाकर सरकार से फंड नहीं ले पाएंगे। दरअसल योजनाओं के नाम पर फंड लेने के बाद भी सालों काम शुरू नहीं होता है। इसलिए सरकार ने विश्वविद्यालयों से 2021 तक एक्शन प्लान मांगा है। इस प्लान के माध्यम से विश्वविद्यालयों को अपनी योजनाओं का खाका तैयार कर देना होगा। इसी के आधार पर योजना मंजूर होने के बाद ही फंड मिलेगा।
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