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सरकार पर मुख्य सचिव मारपीट मामले को कमजोर करने का आरोप
Updated Mon, 27 Aug 2018 10:12 PM IST
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मुख्य सचिव मारपीट केस को
कमजोर करने का आरोप
विजेंद्र गुप्ता ने विशेष वकीलों की नियुक्ति नामंजूर करने पर दिल्ली सरकार पर उठाए सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। विधानसभा में नेता विपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने मुख्य सचिव मारपीट मामले में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और 11 विधायकों के खिलाफ दर्ज मुकदमे को कमजोर करने का आरोप दिल्ली सरकार पर लगाया है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री सतेंद्र जैन ने अपने बॉस को खुश करने के लिए मामले की सुनवाई के लिए विशेष वकीलों की नियुक्ति संबंधी प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया है।
गुप्ता ने कहा कि यह साधारण मामला नहीं है। इसी कारण दिल्ली पुलिस और गृह मंत्रालय ने सुनवाई के लिए तीन स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर नियुक्त करने का आग्रह किया था, ताकि मामले की निष्पक्ष सुनवाई हो सके। दूसरी तरफ, सतेंद्र जैन ने इस आग्रह को खारिज करते हुए इसे कहा कि सहायक प्रोसिक्यूटर, प्रोसिक्यूटर मामला निपटाने में सक्षम हैं। इससे स्पष्ट है कि वे मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ मारपीट के मामले को किसी न किसी प्रकार कमजोर कर रहे हैं, ताकि अदालत में पुलिस आरोपों को सिद्ध न कर पाए। उन्होंने कहा कि जिस सरकार ने कम महत्वपूर्ण मामलों में सरकार का पक्ष रखने के लिए एक पेशी के लाखों रुपये लेने वाले वकील चुने और अब वही रुटीन प्रोसिक्यूटर द्वारा केस लड़ने की बात कर रही है। सरकार करोड़ों का राजस्व बहाकर कई मामलों में चिदंबरम, जेठमलानी, इंदिरा जयसिंह जैसे धुरंधर वकील उतारती रही है।
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कमजोर करने का आरोप
विजेंद्र गुप्ता ने विशेष वकीलों की नियुक्ति नामंजूर करने पर दिल्ली सरकार पर उठाए सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। विधानसभा में नेता विपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने मुख्य सचिव मारपीट मामले में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और 11 विधायकों के खिलाफ दर्ज मुकदमे को कमजोर करने का आरोप दिल्ली सरकार पर लगाया है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री सतेंद्र जैन ने अपने बॉस को खुश करने के लिए मामले की सुनवाई के लिए विशेष वकीलों की नियुक्ति संबंधी प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया है।
गुप्ता ने कहा कि यह साधारण मामला नहीं है। इसी कारण दिल्ली पुलिस और गृह मंत्रालय ने सुनवाई के लिए तीन स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर नियुक्त करने का आग्रह किया था, ताकि मामले की निष्पक्ष सुनवाई हो सके। दूसरी तरफ, सतेंद्र जैन ने इस आग्रह को खारिज करते हुए इसे कहा कि सहायक प्रोसिक्यूटर, प्रोसिक्यूटर मामला निपटाने में सक्षम हैं। इससे स्पष्ट है कि वे मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ मारपीट के मामले को किसी न किसी प्रकार कमजोर कर रहे हैं, ताकि अदालत में पुलिस आरोपों को सिद्ध न कर पाए। उन्होंने कहा कि जिस सरकार ने कम महत्वपूर्ण मामलों में सरकार का पक्ष रखने के लिए एक पेशी के लाखों रुपये लेने वाले वकील चुने और अब वही रुटीन प्रोसिक्यूटर द्वारा केस लड़ने की बात कर रही है। सरकार करोड़ों का राजस्व बहाकर कई मामलों में चिदंबरम, जेठमलानी, इंदिरा जयसिंह जैसे धुरंधर वकील उतारती रही है।
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