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ऊबर कैब अधिक किराया मुद्दा
Updated Mon, 20 Aug 2018 10:24 PM IST
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उबर की याचिका पर एनजीओ को नोटिस
- 10 सितंबर तक जवाब दाखिल करने का दिया आदेश
- एनजीओ ने बिना लाइसेंस टैक्सी चलाने और ज्यादा किराया वसूलने का लगाया था आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने उबर कैब की याचिका पर एनजीओ ‘न्याय भूमि’ को नोटिस जारी कर 10 सितंबर तक जवाब मांगा है। निचली अदालत ने एनजीओ की शिकायत पर उबर को समन जारी किया था। इस मामले में हाईकोर्ट ने अदालती सुनवाई पर रोक लगा दी थी। एनजीओ ने उबर पर बिना लाइसेंस के टैक्सी चलाने और यात्रियों से अधिक किराया वसूलने का आरोप लगाया था। इस मामले में जस्टिस संजीव सचदेवा ने न्यायभूमि को नोटिस जारी किया है। एनजीओ के जवाब के बाद उबर की याचिका पर सुनवाई होगी।
मामले में एनजीओ ने उबर व ओला टैक्सी सर्विस मुहैया करवाने वाली एएनआई टैक्रोलोजी के खिलाफ शिकायत दी थी। इसमें कहा गया था कि यह दोनों कंपनियां यात्रियों से अधिक किराया वसूल रही है इसलिए इन पर 91 हजार करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जाए। गौरतलब है कि उबर से पहले ओला हाईकोर्ट में याचिका दायर कर निचली अदालत से 31 जुलाई को जारी समन रद करने का आग्रह कर चुकी है। ओला की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 12 मार्च तक निचली अदालत की सुनवाई पर रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट में इन कंपनियों ने तर्क रखा है कि उनके खिलाफ उनकी प्रतिस्पर्धी कंपनी मैजिक सेवा के इशारे पर शिकायत दायर की गई है। इन कंपनियों ने कहा वह टैक्सी मुहैया करवाने वाले एजेंट नहीं है। हाईकोर्ट ने अपने अगस्त 2016 के आदेश में कहा था कि कोई टैक्सी मुहैया करवाने वाली कंपनी 22 अगस्त 2016 के बाद दिल्ली सरकार की जून 2013 में तय किए गए अधिकतम किराये से अधिक नहीं वसूलेगी।
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- 10 सितंबर तक जवाब दाखिल करने का दिया आदेश
- एनजीओ ने बिना लाइसेंस टैक्सी चलाने और ज्यादा किराया वसूलने का लगाया था आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने उबर कैब की याचिका पर एनजीओ ‘न्याय भूमि’ को नोटिस जारी कर 10 सितंबर तक जवाब मांगा है। निचली अदालत ने एनजीओ की शिकायत पर उबर को समन जारी किया था। इस मामले में हाईकोर्ट ने अदालती सुनवाई पर रोक लगा दी थी। एनजीओ ने उबर पर बिना लाइसेंस के टैक्सी चलाने और यात्रियों से अधिक किराया वसूलने का आरोप लगाया था। इस मामले में जस्टिस संजीव सचदेवा ने न्यायभूमि को नोटिस जारी किया है। एनजीओ के जवाब के बाद उबर की याचिका पर सुनवाई होगी।
मामले में एनजीओ ने उबर व ओला टैक्सी सर्विस मुहैया करवाने वाली एएनआई टैक्रोलोजी के खिलाफ शिकायत दी थी। इसमें कहा गया था कि यह दोनों कंपनियां यात्रियों से अधिक किराया वसूल रही है इसलिए इन पर 91 हजार करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जाए। गौरतलब है कि उबर से पहले ओला हाईकोर्ट में याचिका दायर कर निचली अदालत से 31 जुलाई को जारी समन रद करने का आग्रह कर चुकी है। ओला की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 12 मार्च तक निचली अदालत की सुनवाई पर रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट में इन कंपनियों ने तर्क रखा है कि उनके खिलाफ उनकी प्रतिस्पर्धी कंपनी मैजिक सेवा के इशारे पर शिकायत दायर की गई है। इन कंपनियों ने कहा वह टैक्सी मुहैया करवाने वाले एजेंट नहीं है। हाईकोर्ट ने अपने अगस्त 2016 के आदेश में कहा था कि कोई टैक्सी मुहैया करवाने वाली कंपनी 22 अगस्त 2016 के बाद दिल्ली सरकार की जून 2013 में तय किए गए अधिकतम किराये से अधिक नहीं वसूलेगी।
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