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संविधान की गलत व्याख्या करके सरकार की योजनाओं को रोका गया:सिसोदिया
Updated Thu, 09 Aug 2018 10:52 PM IST
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संविधान की गलत व्याख्या कर योजनाओं को रोका गया : सिसोदिया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। संविधान की गलत व्याख्या कर साढ़े तीन साल से दिल्ली सरकार की योजनाओं को पलीता लगाया जा रहा है। उपराज्यपाल केंद्र सरकार के इशारे पर दिल्ली की जनता से चुनावी हार का बदला ले रहे है। अधिकारियों को काम नहीं करने के लिए धमकाया जा रहा है। यह बातें सदन में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहीं। वह सरकार के अधिकारों व सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आयोजित चर्चा में बोल रहे थे। उधर, विधानसभा नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सदन में कहा कि न्यायालय के आदेशों की आधी अधूरी व्याख्या की जा रही है।
सिसोदिया ने भाजपा पर निशाना साधते हुए सदन में कहा कि अंग्रेजों के दौर में नक्शा दिखाकर राजा बताते थे यहां हमारा राज। आज भी लोग देश का नक्शा दिखाकर बता रहे हैं कि यहां उनका राज है। वह कहते है कोई चराग जले तो हम बुझा देंगे। उन्हें पता नहीं यहां 66 चिराग (आप के विधायक) जल रहे हैं दम है तो बुझा कर दिखाओ। हम अदालत के चक्कर नहीं लगाना चाहते लेकिन हमें मजबूर किया जा रहा है। बकौल सिसोदिया जब मैने उपराज्यपाल का रिपोर्ट कार्ड पेश किया था तब कहा था कि जमीन, पुलिस और पब्लिक आर्डर उनके हिस्से में है और बाकी काम सरकार का है। उसी संविधान की धारा की व्याख्या सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट शब्दों में किया। सरकार शिक्षा ऋण स्कीम लागू करना चाहती थी, उसे 402 दिनों तक लटका दिया गया। मोहल्ला क्लीनिक योजना को भी 102 दिनों तक रोककर रखा गया। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से साफ हो गया है कि संविधान की अनुच्छेद 239 एए के तहत चुनी हुई सरकार का काउंसिल आफ मिनिस्टर के क्या काम है।
उल्लेखनीय है कि चर्चा मंगलवार को आप विधायक आदर्श शास्त्री ने शुरू की थी। बुधवार को सदन स्थगित होने के कारण बृहस्पतिवार को इस विषय पर चर्चा पूरी हुई। सदन में दिल्ली सरकार के मंत्री सतेंद्र जैन ने कहा कि अधिकारी तो काम करना चाहते है, लेकिन दिल्ली के उपराज्यपाल उन्हें काम नहीं करने देते। विधानसभा नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सदन में कहा कि न्यायालय के आदेशों की आधी अधूरी व्याख्या सरकार कर रही है। दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश अभी भी सर्वमान्य और सर्वस्वीकार्य हैं। संविधान की धारा 239 एए के अंतर्गत उपराज्यपाल को दी गई शक्तियां अभी भी उन्हीं में निहित हैं। इसी प्रकार भ्रष्टाचार निरोधक शाखा भी उपराज्यपाल के अधीन ही है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। संविधान की गलत व्याख्या कर साढ़े तीन साल से दिल्ली सरकार की योजनाओं को पलीता लगाया जा रहा है। उपराज्यपाल केंद्र सरकार के इशारे पर दिल्ली की जनता से चुनावी हार का बदला ले रहे है। अधिकारियों को काम नहीं करने के लिए धमकाया जा रहा है। यह बातें सदन में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहीं। वह सरकार के अधिकारों व सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आयोजित चर्चा में बोल रहे थे। उधर, विधानसभा नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सदन में कहा कि न्यायालय के आदेशों की आधी अधूरी व्याख्या की जा रही है।
सिसोदिया ने भाजपा पर निशाना साधते हुए सदन में कहा कि अंग्रेजों के दौर में नक्शा दिखाकर राजा बताते थे यहां हमारा राज। आज भी लोग देश का नक्शा दिखाकर बता रहे हैं कि यहां उनका राज है। वह कहते है कोई चराग जले तो हम बुझा देंगे। उन्हें पता नहीं यहां 66 चिराग (आप के विधायक) जल रहे हैं दम है तो बुझा कर दिखाओ। हम अदालत के चक्कर नहीं लगाना चाहते लेकिन हमें मजबूर किया जा रहा है। बकौल सिसोदिया जब मैने उपराज्यपाल का रिपोर्ट कार्ड पेश किया था तब कहा था कि जमीन, पुलिस और पब्लिक आर्डर उनके हिस्से में है और बाकी काम सरकार का है। उसी संविधान की धारा की व्याख्या सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट शब्दों में किया। सरकार शिक्षा ऋण स्कीम लागू करना चाहती थी, उसे 402 दिनों तक लटका दिया गया। मोहल्ला क्लीनिक योजना को भी 102 दिनों तक रोककर रखा गया। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से साफ हो गया है कि संविधान की अनुच्छेद 239 एए के तहत चुनी हुई सरकार का काउंसिल आफ मिनिस्टर के क्या काम है।
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उल्लेखनीय है कि चर्चा मंगलवार को आप विधायक आदर्श शास्त्री ने शुरू की थी। बुधवार को सदन स्थगित होने के कारण बृहस्पतिवार को इस विषय पर चर्चा पूरी हुई। सदन में दिल्ली सरकार के मंत्री सतेंद्र जैन ने कहा कि अधिकारी तो काम करना चाहते है, लेकिन दिल्ली के उपराज्यपाल उन्हें काम नहीं करने देते। विधानसभा नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सदन में कहा कि न्यायालय के आदेशों की आधी अधूरी व्याख्या सरकार कर रही है। दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश अभी भी सर्वमान्य और सर्वस्वीकार्य हैं। संविधान की धारा 239 एए के अंतर्गत उपराज्यपाल को दी गई शक्तियां अभी भी उन्हीं में निहित हैं। इसी प्रकार भ्रष्टाचार निरोधक शाखा भी उपराज्यपाल के अधीन ही है।
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