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92 की उम्र में प्रसिद्ध आलोचक नामवर ने लिखी चार और पुस्तकें
Updated Sat, 28 Jul 2018 10:04 PM IST
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‘नामवर संग बैठक’ संगोष्ठी का आयोजन
नामवर के 92वें जन्मदिन पर जुटे साहित्यकार
- 92 की उम्र में नामवर ने लिखी चार और पुस्तकें
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। समकालीन हिंदी आलोचना को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने वाले सुप्रसिद्ध आलोचक नामवर सिंह के 92वें जन्मदिन पर राजकमल प्रकाशन की ओर से ‘नामवर संग बैठक’ गोष्ठी आयोजित की गई। उन्होंने इस उम्र में चार और पुस्तकें लिखी हैं। इस मौके पर साहित्य जगत के प्रमुख साहित्यकार विश्वनाथ त्रिपाठी, काशीनाथ सिंह, पुरुषोतम अग्रवाल, गोपेश्वर सिंह और संजीव कुमार मौजूद रहे।
इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित इस संगोष्ठी में राजकमल प्रकाशन समूह के निदेशक अशोक माहेश्वरी ने कहा कि नामवर जी राजकमल परिवार के मुखिया हैं और हमें उनका 92 वां जन्मदिन मनाते हुए बेहद ख़ुशी हो रही है। हम उनकी अच्छी सेहत की कामना करते हैं। इसी मौके पर उन्होंने नामवर की आगामी 4 पुस्तकों की भी घोषणा की। कार्यक्रम में नामवर सिंह ने साहित्य प्रेमियों से कहा कि आचार्य रामचंद्र शुक्ल के बाद हिंदी के सबसे बड़े आलोचक रामविलास शर्मा हैं। रामविलास शर्मा कट्टरपंथी प्रगतिशील आलोचक थे। उदारवादी प्रगतिशील और कट्टरपंथी प्रगतिशील में बहस चलती रहती थी। बाद में रामविलास ने वेदों पर भी काम किया। मुझे आगरा में काम करते हुए रामविलास को जानने का मौक़ा मिला था। इसलिए मैंने उन पर एक पुस्तक लिखी है। इस मौके पर नामवर की हाल ही लिखी गयीं रामविलास शर्मा, छायावाद-प्रसाद, निराला, महादेवी और पंत, द्वाभा और आलोचना अनुक्रमणिका इन चार आगामी पुस्तकों की घोषणा की गई। इन पुस्तकों का संपादन डॉ. नीलम सिंह, विजय प्रकाश सिंह, ज्ञानेंद्र कुमार संतोष और शैलेश कुमार मटियानी ने किया है। इस अवसर पर लेखक गोपेश्वर सिंह ने कहा कि नामवर सिंह ने अपने दौर में देश का सर्वोच्च हिंदी विभाग जेएनयू में बनवाया हमारी पीढ़ी ने नामवर के व्यक्तित्व से बहुत कुछ सीखा है।
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नामवर के 92वें जन्मदिन पर जुटे साहित्यकार
- 92 की उम्र में नामवर ने लिखी चार और पुस्तकें
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। समकालीन हिंदी आलोचना को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने वाले सुप्रसिद्ध आलोचक नामवर सिंह के 92वें जन्मदिन पर राजकमल प्रकाशन की ओर से ‘नामवर संग बैठक’ गोष्ठी आयोजित की गई। उन्होंने इस उम्र में चार और पुस्तकें लिखी हैं। इस मौके पर साहित्य जगत के प्रमुख साहित्यकार विश्वनाथ त्रिपाठी, काशीनाथ सिंह, पुरुषोतम अग्रवाल, गोपेश्वर सिंह और संजीव कुमार मौजूद रहे।
इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित इस संगोष्ठी में राजकमल प्रकाशन समूह के निदेशक अशोक माहेश्वरी ने कहा कि नामवर जी राजकमल परिवार के मुखिया हैं और हमें उनका 92 वां जन्मदिन मनाते हुए बेहद ख़ुशी हो रही है। हम उनकी अच्छी सेहत की कामना करते हैं। इसी मौके पर उन्होंने नामवर की आगामी 4 पुस्तकों की भी घोषणा की। कार्यक्रम में नामवर सिंह ने साहित्य प्रेमियों से कहा कि आचार्य रामचंद्र शुक्ल के बाद हिंदी के सबसे बड़े आलोचक रामविलास शर्मा हैं। रामविलास शर्मा कट्टरपंथी प्रगतिशील आलोचक थे। उदारवादी प्रगतिशील और कट्टरपंथी प्रगतिशील में बहस चलती रहती थी। बाद में रामविलास ने वेदों पर भी काम किया। मुझे आगरा में काम करते हुए रामविलास को जानने का मौक़ा मिला था। इसलिए मैंने उन पर एक पुस्तक लिखी है। इस मौके पर नामवर की हाल ही लिखी गयीं रामविलास शर्मा, छायावाद-प्रसाद, निराला, महादेवी और पंत, द्वाभा और आलोचना अनुक्रमणिका इन चार आगामी पुस्तकों की घोषणा की गई। इन पुस्तकों का संपादन डॉ. नीलम सिंह, विजय प्रकाश सिंह, ज्ञानेंद्र कुमार संतोष और शैलेश कुमार मटियानी ने किया है। इस अवसर पर लेखक गोपेश्वर सिंह ने कहा कि नामवर सिंह ने अपने दौर में देश का सर्वोच्च हिंदी विभाग जेएनयू में बनवाया हमारी पीढ़ी ने नामवर के व्यक्तित्व से बहुत कुछ सीखा है।
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