{"_id":"5b5c9a134f1c1b1e308b7714","slug":"15327954063-ashram-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एनएमसी विधेयक के खिलाफ आईएमए की हड़ताल में शामिल नहीं हुए निजी अस्पताल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एनएमसी विधेयक के खिलाफ आईएमए की हड़ताल में शामिल नहीं हुए निजी अस्पताल
Updated Sat, 28 Jul 2018 10:08 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आईएमए को नहीं मिला निजी अस्पतालों का समर्थन
- आईएमए ने किया देशव्यापी हड़ताल के सफल रहने का दावा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। आईएमए के कॉल फॉर एक्शन के आह्वान पर शनिवार को 12 घंटे की बुलाई गई डॉक्टरों की हड़ताल का निजी अस्पतालों ने समर्थन नहीं किया। वहीं, सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर भी हड़ताल में हिस्सा लेने से कतराते दिखाई दिए। हालांकि, आईएमए का दावा है देशभर के करीब डेढ़ लाख डॉक्टरों ने हड़ताल में हिस्सा लिया।
दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के कार्यकारी सदस्य डॉ हरीश गुप्ता ने कहा कि हमारी मांगों के अनुरूप राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक में कई बदलाव को शामिल किया गया है। सरकार भी बात करने के लिए तैयार है। हम विधेयक की दोबारा समीक्षा करेंगे। ऐसे में हम आईएमए की हड़ताल का समर्थन नहीं करते हैं। उधर, दिल्ली के निजी अस्पताल में ओपीडी समेत अन्य सभी विभाग सामान्य रूप से चलते रहे। सरकारी अस्पतालों ने भी हड़ताल का समर्थन नहीं किया।
वहीं, आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रवि वानखेडकर ने सरकार के राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक के खिलाफ डेढ़ लाख डॉक्टरों के शामिल होने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि आईएमए की ओर से गैर आपातकालीन सेवाओं को बंद रखने का आह्वान सरकार के लिए केवल चेतावनी था। यदि सरकार जन विरोधी और अमीरों के हितों को साधने वाले गैर लोकतांत्रिक एवं गैर संघीय एनएमसी विधेयक को लागू करेगी तो आईएमए अपने आंदोलन को तेज करने के लिए मजबूर होगा। हम चाहते हैं कि सरकार मौजूदा विधेयक पर पुनर्विचार करे। हम समाज के हाशिए के और वंचित वर्गों के हितों की रक्षा के लिए मोदी से हस्तक्षेप करने की अपील करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
- आईएमए ने किया देशव्यापी हड़ताल के सफल रहने का दावा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। आईएमए के कॉल फॉर एक्शन के आह्वान पर शनिवार को 12 घंटे की बुलाई गई डॉक्टरों की हड़ताल का निजी अस्पतालों ने समर्थन नहीं किया। वहीं, सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर भी हड़ताल में हिस्सा लेने से कतराते दिखाई दिए। हालांकि, आईएमए का दावा है देशभर के करीब डेढ़ लाख डॉक्टरों ने हड़ताल में हिस्सा लिया।
दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के कार्यकारी सदस्य डॉ हरीश गुप्ता ने कहा कि हमारी मांगों के अनुरूप राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक में कई बदलाव को शामिल किया गया है। सरकार भी बात करने के लिए तैयार है। हम विधेयक की दोबारा समीक्षा करेंगे। ऐसे में हम आईएमए की हड़ताल का समर्थन नहीं करते हैं। उधर, दिल्ली के निजी अस्पताल में ओपीडी समेत अन्य सभी विभाग सामान्य रूप से चलते रहे। सरकारी अस्पतालों ने भी हड़ताल का समर्थन नहीं किया।
विज्ञापन
वहीं, आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रवि वानखेडकर ने सरकार के राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक के खिलाफ डेढ़ लाख डॉक्टरों के शामिल होने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि आईएमए की ओर से गैर आपातकालीन सेवाओं को बंद रखने का आह्वान सरकार के लिए केवल चेतावनी था। यदि सरकार जन विरोधी और अमीरों के हितों को साधने वाले गैर लोकतांत्रिक एवं गैर संघीय एनएमसी विधेयक को लागू करेगी तो आईएमए अपने आंदोलन को तेज करने के लिए मजबूर होगा। हम चाहते हैं कि सरकार मौजूदा विधेयक पर पुनर्विचार करे। हम समाज के हाशिए के और वंचित वर्गों के हितों की रक्षा के लिए मोदी से हस्तक्षेप करने की अपील करते हैं।
विज्ञापन