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भिक्षावृति और बालश्रम रोकने के लिए पदयात्रा पर नौजवान
Updated Sat, 14 Jul 2018 11:36 PM IST
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भिक्षावृति और बालश्रम रोकने के लिए पदयात्रा पर नौजवान
- उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से शुरू किया पैदल जागरूकता अभियान
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ का एक नौजवान देश में फैली भिक्षावृति और बालश्रम को जड़ से खत्म करने के लिए पैदल जागरूकता अभियान पर है। उत्तराखंड से पैदल चलते-चलते करीब 490 किमी की यात्रा करते हुए शनिवार को यह नौजवान दिल्ली पहुंचा। यहां पहुंचने से पहले ही इसकी हालत बिगड़ गई, लेकिन इसने हिम्मत नहीं हारी और लोगों को भिक्षावृति और बालश्रम के खिलाफ जागरूक करना नहीं रोका।
पिथौरागढ़ के अजय औली महज 26 साल के हैं। इन्होंने मानव संसाधन में मास्टर्स डिग्री हासिल की है। इतनी कम उम्र में तीन कंपनियों में नौकरी भी की, लेकिन मन को संतुष्टि नहीं मिली। सितम्बर 2015 में लखनऊ में झुग्गी बस्ती में रहकर भीख मांगने वाली बच्चियों और महिलाओं को देख इन्होंने देश में सड़कों पर रहने वाले लोगों के उत्थान का बीड़ा उठाया और चप्पल-जूतों का त्याग कर दिया। इसके बाद पैदल ही शहर-शहर जाकर लोगों को भिक्षावृति और बालश्रम समाप्त करने का संदेश देना शुरू कर दिया।
1 जुलाई 2018 से उन्होंने पिथौरागढ़ से अपनी दूसरी यात्रा शुरू की। 14 दिनों तक पैदल चलने के बाद शनिवार को दिल्ली पहुंचे। उन्होंने बताया कि दिल्ली 51वां शहर है, जहां तक की पैदल यात्रा तय कर सैकड़ों लोगों को भिक्षावृति और बालश्रम के बारे में जागरूक किया है। उन्होंने लोगों से किसी को भी भिक्षा न देने और बालश्रम को रोकने की अपील की। एक रिसर्च के आधार पर उन्होंने कहा कि भीख मांगने वाले करीब 87 प्रतिशत बच्चे आपराधिक गतिविधियों में लिप्त होते हैं।
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दिल्ली के कनॉट प्लेस समेत अन्य इलाकों में लोगों को जागरूक करते हुए वह गुड़गांव की ओर निकल पडे़। वह पिथौरागढ़ से चंडीगढ़ तक 2100 किमी की पदयात्रा पर हैं।
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भिक्षावृति और बालश्रम रोकने के लिए पदयात्रा पर नौजवान
- उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से शुरू किया पैदल जागरूकता अभियान
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ का एक नौजवान देश में फैली भिक्षावृति और बालश्रम को जड़ से खत्म करने के लिए पैदल जागरूकता अभियान पर है। उत्तराखंड से पैदल चलते-चलते करीब 490 किमी की यात्रा करते हुए शनिवार को यह नौजवान दिल्ली पहुंचा। यहां पहुंचने से पहले ही इसकी हालत बिगड़ गई, लेकिन इसने हिम्मत नहीं हारी और लोगों को भिक्षावृति और बालश्रम के खिलाफ जागरूक करना नहीं रोका।
पिथौरागढ़ के अजय औली महज 26 साल के हैं। इन्होंने मानव संसाधन में मास्टर्स डिग्री हासिल की है। इतनी कम उम्र में तीन कंपनियों में नौकरी भी की, लेकिन मन को संतुष्टि नहीं मिली। सितम्बर 2015 में लखनऊ में झुग्गी बस्ती में रहकर भीख मांगने वाली बच्चियों और महिलाओं को देख इन्होंने देश में सड़कों पर रहने वाले लोगों के उत्थान का बीड़ा उठाया और चप्पल-जूतों का त्याग कर दिया। इसके बाद पैदल ही शहर-शहर जाकर लोगों को भिक्षावृति और बालश्रम समाप्त करने का संदेश देना शुरू कर दिया।
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1 जुलाई 2018 से उन्होंने पिथौरागढ़ से अपनी दूसरी यात्रा शुरू की। 14 दिनों तक पैदल चलने के बाद शनिवार को दिल्ली पहुंचे। उन्होंने बताया कि दिल्ली 51वां शहर है, जहां तक की पैदल यात्रा तय कर सैकड़ों लोगों को भिक्षावृति और बालश्रम के बारे में जागरूक किया है। उन्होंने लोगों से किसी को भी भिक्षा न देने और बालश्रम को रोकने की अपील की। एक रिसर्च के आधार पर उन्होंने कहा कि भीख मांगने वाले करीब 87 प्रतिशत बच्चे आपराधिक गतिविधियों में लिप्त होते हैं।
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दिल्ली के कनॉट प्लेस समेत अन्य इलाकों में लोगों को जागरूक करते हुए वह गुड़गांव की ओर निकल पडे़। वह पिथौरागढ़ से चंडीगढ़ तक 2100 किमी की पदयात्रा पर हैं।